महाशिवरात्रि: इस शुभ मुहूर्त करें भगवान शिव की पूजा..

महाशिवरात्रि: इस शुभ मुहूर्त करें भगवान शिव की पूजा..

  • जानें शिवरात्रि की पूजा विधान
महाशिवरात्रि: इस शुभ मुहूर्त करें भगवान शिव की पूजा..

महाशिवरात्रि: इस शुभ मुहूर्त करें भगवान शिव की पूजा..

महाशिवरात्रिहिन्‍दू धर्म के प्रमुख त्‍योहरों में से एक है। इस दिन शिवालयों में शिवलिंग पर जल, दूध और बेल पत्र चढ़ाकर भक्‍त शिव शंकर को प्रसन्‍न करने की कोशिश करते हैं। मान्‍यता है कि महाशिवरात्रि के दिन जो भी भक्‍त सच्‍चे मन से शिविलंग का अभिषेक या जल चढ़ाते हैं उन्‍हें महादेव की विशेष कृपा मिलती है। कहते हैं कि शिव इतने भोले हैं कि अगर कोई अनायास भी शिवलिंग की पूजा कर दे तो भी उसे शिव कृपा प्राप्‍त हो जाती है। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन आने वाली शिवरात्रि को सिर्फ शिवरात्रि कहा जाता है। लेकिन फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी के दिन आने वाले शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहते हैं. साल में होने वाली 12 शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है।

महाशिवरात्रि कब है? : हिन्‍दू पंचांग के अनुसार फाल्‍गुन मास की कृष्‍ण पक्ष चतुर्थी को पड़ने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहते हैं। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार यह हर साल फरवरी या मार्च महीने में आती है। इस बार शिवरात्रि 21 फरवरी यानि कल है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार  इस विशेष संयोग का नाम शश योग है। इस दिन पांच ग्रहों की राशि पुनरावृत्ति होने के साथ शनि व चंद्र मकर राशि, गुरु धनु राशि, बुध कुंभ राशि तथा शुक्र मीन राशि में रहेंगे।

इससे पहले ग्रहों की यह स्थिति और ऐसा योग वर्ष 1961 में रहे थे। इस दौरान दान-पुण्य करने का भी विधान है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह विशेष संयोग लगभग 59 साल बाद बन रहा है, जो साधना-सिद्धि के लिए खास महत्व रखता है।मान्यता है कि इस दिन शिव और पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। ऐसे में आइए जानते हैं इस दिन भोलेबाबा को प्रसन्न करने के लिए किस शुभ मुहूर्त में पूजा करना फलदायक है।

जानें शिवरात्रि की पूजा विधान

जानें शिवरात्रि की पूजा विधान

 

महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त: 21 तारीख को शाम को 5 बजकर 20 मिनट से 22 फरवरी, शनिवार को शाम सात बजकर 2 मिनट तक रहेगा।

शिवरात्रि की पूजा विधि-

  • – शिव रात्रि के दिन सबसे पहले सुबह स्नान करके भगवान शंकर को पंचामृत से स्नान करवाएं।
  • – उसके बाद भगवान शंकर को केसर के 8 लोटे जल चढ़ाएं।
  • – इस दिन पूरी रात दीपक जलाकर रखें।
  • – भगवान शंकर को चंदन का तिलक लगाएं।
  • – तीन बेलपत्र, भांग धतूर, तुलसी, जायफल, कमल गट्टे, फल, मिष्ठान, मीठा पान, इत्र व दक्षिणा चढ़ाएं। सबसे बाद में केसर युक्त खीर का भोग लगा कर प्रसाद बांटें।
  •  – पूजा में सभी उपचार चढ़ाते हुए ॐ नमो भगवते रूद्राय, ॐ नमः शिवाय रूद्राय् शम्भवाय् भवानीपतये नमो नमः मंत्र का जाप करें।

पूजन सामग्री : महाशिवरात्रि के व्रत से एक दिन पहले ही पूजन सामग्री एकत्रित कर लें, जो इस प्रकार है: शमी के पत्ते, सुगंधित पुष्‍प, बेल पत्र, धतूरा, भांग, बेर, आम्र मंजरी, जौ की बालें, तुलसी दल, गाय का कच्चा दूध, गन्‍ने का रस, दही, शुद्ध देसी घी, शहद, गंगा जल, पवित्र जल, कपूर, धूप, दीप, रूई, चंदन, पंच फल, पंच मेवा, पंच रस, इत्र, रोली, मौली, जनेऊ, पंच मिष्‍ठान, शिव व मां पार्वती की श्रृंगार की सामग्री, दक्षिणा, पूजा के बर्तन आदि।

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