वर्ष 2020 में प्रदेश के 2 लाख किसानों को प्राकृतिक खेती के दायरे में लाया जाएगा : कृषि मंत्री

वर्ष 2020 में प्रदेश के 2 लाख किसानों को प्राकृतिक खेती के दायरे में लाया जाएगा : कृषि मंत्री

  • प्रदेश के किसानों एवं बागवानों तक वैज्ञानिकों का अनुसंधान शीघ्र पंहुचाया जाना आवश्यक  : कृषि मंत्री
  • वर्तमान में राज्य में 61,000 से अधिक किसान कर रहे प्रकृतिक खेती
  • किसानों को शीघ्र मिले अनुसंधान एवं उच्च तकनीक का लाभ- डॉ. मारकण्डा
  • प्रैक्टिसिस ऑफ पैकेजिज फॉर वैजिटेबल्सविषय पर कार्यशाला

सोलन: कृषि, जनजातीय विकास एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने कहा कि किसानों एवं बागवानों को प्रदेश के बागवानी एवं वानिकी तथा कृषि विश्वविद्यालय में किए गए अनुसंधान एवं उच्च तकनीक का लाभ शीघ्र मिलना चाहिए ताकि इनके माध्यम से राज्य की आर्थिकी को सुदृढ़ किया जा सके। डॉ.  मारकण्डा आज डॉ. यशवन्त सिंह परमार वानिकी एवं बागवानी विश्वविद्यालय, नौणी में प्रैक्टिसिस ऑफ पैकेजिज फॉर वैजिटेबल्सविषय पर कार्यशाला का शुभारम्भ करने के उपरान्त उपस्थित वैज्ञानिकों, अधिकारियों एवं अन्य को सम्बोधित कर रहे थे।

डॉ. मारकण्डा ने कहा कि हिमाचल की जनसंख्या का बड़ा भाग वर्तमान मे भी अपनी आजीविका के लिए कृषि एवं बागवानी पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि यह जनसंख्या प्रदेश की आर्थिकी के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है। प्रदेश के किसानों एवं बागवानों तक वैज्ञानिकों का अनुसंधान शीघ्र पंहुचाया जाना आवश्यक है।

कृषि मंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती को जन आंदोलन के रूप में अपनाना समय की मांग है ताकि हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक खेती की दिशा में विश्व तथा देश में एक आदर्श राज्य बनकर उभरे और हिमाचल को पूर्ण रूप से प्राकृतिक खेती राज्य घोषित किया जा सके। वर्तमान में हम सभी रसायन युक्त खेती के दुष्परिणामों से परिचित हैं। इन दुष्परिणामों से बचाव के लिए प्राकृतिक खेती कारगर उपाय है। उन्होंने आग्रह किया कि प्राकृतिक खेती के विषय में सभी को जानकारी दें ताकि प्रदेश के सभी किसान प्राकृतिक खेती अपनाकर इससे लाभान्वित हो सकें। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 में प्रदेश के 2 लाख किसानों को प्राकृतिक खेती के दायरे में लाया जाएगा। वर्तमान में प्रदेश सरकार के प्रयासों से राज्य में 61000 से अधिक किसान प्रकृतिक खेती कर रहे हैं।

डॉ. मारकण्डा ने कहा कि यह कार्यशाला 07 वर्ष के अन्तराल के उपरान्त आयोजित की जा रही है। भविष्य में इस कार्यशाला को नियमित रूप से चौधरी सरवण कुमार कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर तथा डॉ. यशवन्त सिंह परमार वानिकी एवं बागवानी विश्वविद्यालय, नौणी में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में शीघ्र ही कृषि, जाईका तथा प्रकृतिक खेती की योजनाओं को समन्वय के साथ कार्यान्वित किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक किसान एवं बागवान इनसे लाभान्वित हो सकें।

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