आईएचबीटी पालमपुर : हाइड्रोपोनिक व एरोपोनिक खेती पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

आईएचबीटी पालमपुर : हाइड्रोपोनिक व एरोपोनिक खेती पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

  • प्रशिक्षण में दी हाइड्रोपोनिक प्रणाली में पौधों के प्रसार व तकनीकी जानकारी
  • हाइड्रोपोनिक्स प्रणाली के तहत जड़ी-बूटियों, मसालों और फूलों की खेती के लिए प्रतिभागियों को दिया जाएगा व्यावहारिक प्रशिक्षण

पालमपुर : सीएसआईआर–हिमालयन जैवसम्पदा प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएचबीटी), पालमपुर ने हाइड्रोपोनिक व ऐरोपोनिक खेती प्रणाली पर 5 से 8 फरवरी तक चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। प्रशिक्षण आयोजक डॉ. भव्य भार्गव ने बताया कि इस कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश, गुजरात व उत्तराखंड, राज्यों से 38 प्रतिभागी जिसमें उद्यान विकास अधिकारी,  प्रगतिशील किसान, बेरोजगार युवा और छात्रों ने लिया। प्रतिभागियों को हाइड्रोपोनिक प्रणाली में पौधों के प्रसार व तकनीकी ज्ञान प्रदान किया गया। हाइड्रोपोनिक्स पानी के विलायक का उपयोग करके मिट्टी के बिना पौधों को उगाने की तकनीक है जिसमें खनिज पोषक तत्व होते हैं। एरोपोनिक हवा में पौधे उगने की तकनीक है। प्रतिभागियों को यह भी बताया जाएगा कि हाइड्रोपोनिक एवं एरोपोनिक प्रणाली फसल चक्र में वृद्धि और संतुलित पोषक तत्वों की आपूर्ति के कारण पारंपरिक कृषि प्रथाओं की तुलना में अधिक उपज प्रदान की जा सकती है।

प्रशिक्षण में दी हाइड्रोपोनिक प्रणाली में पौधों के प्रसार व तकनीकी जानकारी

प्रशिक्षण में दी हाइड्रोपोनिक प्रणाली में पौधों के प्रसार व तकनीकी जानकारी

सीएसआईआर-आईएचबीटी के निदेशक डॉ. संजय कुमार ने कहा कि भारत के अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में फसल को जानवरों का ख़तरा और पारंपरिक कृषि प्रणाली से कम लाभ के कारण ग्रामीण जनसंख्या  का शहरी क्षेत्रों की ओर पलायन हो रहा है। उन्होंने युवा और इच्छुक उद्यमियों के साथ बातचीत की और कहा कि ये युवा किसान पोषक तत्वों से समृद्ध मसाले, हर्बल और उच्च मूल्य वाली फसलों के उत्पादन के लिए स्टार्टअप व्यवसाय के रूप में हाइड्रोपोनिक्स प्रणाली को अपना सकते हैं जिनकी शहरी बाजार में भारी मांग है। जनसंख्या के आकार में वृद्धि के साथ, भोजन की मांग भी बढ़ रही है और 2050 तक 59% से 98% तक बढ़ने का अनुमान है। शहरीकरण के कारण उच्च घनत्व वाले शहरों और तिमाहियों में बढ़ोतरी हुई है और भूमि की उपलब्धता में कमी आई है। प्रतिभागियों को हाइड्रोपोनिक सिस्टम से परिचित कराया गया और पानी की गुणवत्ता, बढ़ते सिस्टम, पोषक तत्वों के समाधान, फसल सुरक्षा और कीट प्रबंधन के बारे में जागरूक किया गया। यह प्रणाली छोटे और सीमित स्थान व खराब और हीन मिट्टी वाले स्थान के लिए उपयुकत समाधान है।

डॉ. राकेश कुमार, कार्यक्रम समन्वयक ने बताया कि हाइड्रोपोनिक प्रणाली मौसम, जानवरों व किसी भी अन्य प्रकार के बाहरी जैविक या अजैविक कारकों से प्रभावित नहीं होती है। इन लाभों के अतिरिक्त, हाइड्रोपोनिक प्रणाली पानी का भी कम और कुशल उपयोग करती है। साथ ही हाइड्रोपोनिक प्रणाली में फसलों को कृत्रिम बुधीमत्ता (ए आई), हर्बिसाइड्स और कीटनाशकों के उपयोग के उन्मूलन के बारे में भी अवगत कराया गया, जिस से बेहतर एवं पौष्टिक खाद्य उत्पाद प्राप्त किए जाते हैं। समग्र हाइड्रोपोनिक्स प्रणाली का बाजार 2019 में 8.1 बिलियन अमरीकी डालर से बढ़कर 2025 तक अमरीकी डालर 16.0 बिलियन तक बढ़ने का अनुमान है और यह 12.1% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है। हाइड्रोपोनिक खेती के विशेषज्ञ प्रशिक्षण व कार्यक्रम के सह-आयोजक डॉ. आशीष वरगट ने बताया कि हाइड्रोपोनिक्स प्रणाली के तहत जड़ी-बूटियों, मसालों और फूलों की खेती के लिए प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। यद्यपि हाइड्रोपोनिक्स प्रणाली स्थापित करने के लिए प्रारंभिक निवेश लागत अधिक है, लेकिन लंबे समय में यह किसानों को बेहतर लाभ प्रदान करेगा और आईएचबीटी कम लागत वाली हाइड्रोपोनिक प्रणाली को विकसित करने के लिए पूरी तरह से प्रयासरत है जिससे छोटे पैमाने के किसान भी फसल उगाने के लिए इस प्रणाली का उपयोग कर सकते हैं।

सम्बंधित समाचार

अपने सुझाव दें

Your email address will not be published. Required fields are marked *