हिमाचली उत्पादों को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाने में सहायक होगा शिल्प मेला : मुख्यमंत्री

हिमाचली उत्पादों को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाने में सहायक होगा शिल्प मेला : मुख्यमंत्री

  • मेले से कला, संस्कृति एवं पर्यटन को व्यापक स्तर पर प्रदर्शित करने का मौका मिला

शिमला : मुख्यमन्त्री जय राम ठाकुर ने आज सूरजकुंड अन्तरराष्ट्रीय शिल्प मेला-2020 के उद्घाटन अवसर पर कहा कि विश्व के इस सबसे बड़े शिल्प मेले में हिमाचल को ‘थीम राज्य’ बनने का विशेष सम्मान प्राप्त होने से प्रदेश की कला, संस्कृति एवं पर्यटन को व्यापक स्तर पर प्रदर्शित करने का अवसर प्राप्त हुआ है। यह मेला हिमाचल के उत्पादों को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाने में भी सहायक सिद्ध होगा। राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने आज सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला-2020 का शुभारंभ किया, मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित थे। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर भी कार्यक्रम में मौजूद थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय क्राफ्ट मेले के माध्यम से देश-विदेश के पर्यटकों को प्रदेश की संस्कृति में विविधता के बारे में जानकारी मिलेगी तथा शिल्पकारों, बुनकरों और कामगारों को सम्मान मिला है। जय राम ठाकुर ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेले में भाग लेने का उद्देश्य हिमाचल के हथकरघा, हस्तशिल्प, फल उत्पाद, चाय, शहद, धातु शिल्प तथा व्यंजन आदि को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का मंच प्रदान करना और राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि पर्यटकों तथा अन्य लोगों की सुविधा के लिए चंडीगढ़ से शिमला के लिए हेलीकाप्टर सेवा शुरू की गई है तथा उड़ान योजना के अंतर्गत यह सेवा चंडीगढ़ से शिमला, शिमला से कुल्लू और शिमला से धर्मशाला के लिए चलाई जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल सरकार ने पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए हैलीपैड निर्माण तथा मौजूदा तीनों हवाई अड्डों के विस्तार को प्राथमिकता दी है। जिला मंडी के नागचला में प्रस्तावित ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट के लिए भारतीय विमानन प्राधिकरण के साथ 15 जनवरी, 2020 को समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। हिमाचल सरकार पर्यटन क्षेत्र के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देते हुए पैराग्लाइडिंग के लिए जिला कांगड़ा के बीड़-बिलिंग में अधोसंरचना विकास पर जोर दिया गया है। इको-पर्यटन के लिए जिला मंडी का जंजैहली, स्कीइंग के लिए शिमला का चांशल और जल क्रीड़ा गतिविधियों के लिए पौंग, लारजी व तत्तापानी जलाशय का चयन किया गया है तथा इन क्षेत्रों में पर्यटन से संबन्धित अधोसंरचना के विकास के लिए धनराशि भी स्वीकृत की गई है।

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