हिमाचल पर्यटन विभाग ने एक ही बर्तन में पकाई 1995 किलोग्राम खिचड़ी, गिनीज बुक में दर्ज हुआ वर्ल्ड रिकॉर्ड

हिमाचल पर्यटन विभाग ने एक ही बर्तन में पकाई 1995 किलोग्राम खिचड़ी, गिनीज बुक में दर्ज हुआ वर्ल्ड रिकॉर्ड

  • मुख्यमंत्री ने तत्तपानी क्षेत्र में 25 करोड़ की सरूर खड्ड से चुराग तक उठाऊ पेयजल योजना की आधारशिला रखी

मण्डी: पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन विभाग द्वारा आज जिला मण्डी के तत्तापानी में 1995 किलोग्राम दाल और चावल से बनाई गई खिचड़ी गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अब तक कि सबसे अधिक परोसी जाने वाली खिचड़ी के रूप में दर्ज की गई है। इस खिताब के तहत इससे पहले का रिर्कार्ड 918.8 किलोग्राम था। यह घोषणा मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज मंकर संक्रान्ति के पावन अवसर पर जिला मण्डी के करसोग क्षेत्र के तत्तापानी में ‘तत्तापानी महोत्सव’ के दौरान संस्कृतिक कार्यक्रम के उपरान्त विशाल जन समूह को सम्बोधित करते हुए की।

मुख्यमंत्री ने इतनी बड़ी मात्रा में खिचड़ी पकाने के अपने लक्ष्य में सफलता हासिल करने के लिए पर्यटन विभाग की सराहना की। उन्होंने कहा कि विभाग ने लगभग 1000 किलो के बड़े अन्तर के साथ पहले का रिकार्ड तोड़ दिया है।

जय राम ठाकुर ने मकर संक्रान्ति के अवसर पर प्रदेश के लोगों को बधाई दी और कहा कि राज्य की समृद्ध संस्कृति को संजोए रखना हम सभी का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि कोलडैम के निर्माण से यह क्षेत्र जल क्रीड़ा के लिए प्रमुख गंतव्य बन कर उभरा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तत्तापानी को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाएगा क्योंकि इस क्षेत्र में जल क्रीड़ा की आपार सम्भावना है। इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रसिद्ध नरसिंह मन्दिर और शनिदेव मन्दिर में पूजा अर्चना की।

निदेशक पर्यटन और नागरिक उड्डयन युनूस ने कहा कि खिचड़ी बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला बर्तन 7:4 फीट के दायरे का था और इस प्रयास का उद्देश्य तत्तापानी को विश्व पर्यटन के मानचित्र में लाना था।

गिनीज वल्र्ड रिकार्ड के एडजुडिकेटर ने घोषणा की कि पर्यटन और नागरिक उड्डयन विभाग ने एक ही बर्तन में 1995 किलो खिचड़ी पकाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया है।

मुख्यमंत्री ने जल क्रीड़ा गतिविधि प्रदर्शन का भी निरीक्षण किया और हिमाचल पथ परिवहन निगम की टूरिज्म सर्किट बस को हरी झण्डी दिखा कर रवाना किया। उन्होंने इस अवसर पर वाटर जेटी की सवारी का भी आनंद लिया। मुख्यमंत्री ने तत्तापानी क्षेत्र में 25 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले सरूर खड्ड से चुराग उठाऊ पेयजल योजना का शिलान्यास किया, जिससे क्षेत्र के 174 बस्तियां लाभान्वित होंगी।

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