अवैध खनन के लिए उठाए गए प्रभावी कदमों के आ रहे सकारात्मक परिणाम

  • यदि सरकारी सम्पति को नुकसान पहुंचता है तो संबंधित विभाग दोषी के विरुद्ध एफ.आई.आर. करवाएगा दर्ज  
  • खनन गतिविधियों को सुचारू रूप से चलाने के लिए खनन पट्टा स्वीकृति के लिए लैटर आफ इंटेंट जारी करने का प्रावधान
  • प्रदेश सरकार ने लगभग 120 आवेदकों को लैटर आफ इंटेंट किये हैं जारी

 

शिमला: प्रदेश सरकार द्वारा राज्य में अवैध खनन पर निगरानी रखने के लिए लागू किए गए कठोर नियमों व प्रभावी कदमों के ठोस परिणाम आने शुरू हो गए हैं। खनिजों के दोहन के लिए वैज्ञानिक पद्धति सुनिश्चित बनाई गई है।

प्रदेश सरकार के एक प्रवक्ता ने आज यहां कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश में वैज्ञानिक ढंग से खनिजों का दोहन तथा अवैध खनन की समस्या को गम्भीरता से लेते हुए कई कदम उठाए हैं। इसी के दृष्टिगत 10 वर्ष के अन्तराल के बाद अगस्त 2013 को हिमाचल प्रदेश खनिज नीति-2013 अधिसूचित की गई। इस नीति के अर्न्तगत अवैध खनन से सरकारी सम्पति की सुरक्षा के लिए यह प्रावधान किया गया है कि यदि सरकारी सम्पति जैसे कि पुलों व सिंचाई स्कीमों आदि को नुकसान पहुंचता है तो संबंधित विभाग दोषी के विरुद्ध एफ.आई.आर. दर्ज करवाएगा। इसके अतिरिक्त खनिजों के ढुलान के लिए निर्यात पत्रों की पिंरटिंग व वितरण विभागीय स्तर पर किया जा रहा है। प्रदेश में खनन गतिविधियों को सुचारू रूप से चलाने के लिए खनन पट्टा स्वीकृति के लिए लैटर आफ इंटेंट जारी करने का प्रावधान किया गया है ताकि आवेदक पर्यावरण सम्बन्धी स्वीकृतियां शीघ्र प्राप्त कर सकें। प्रदेश सरकार ने लगभग 120 आवेदकों को लैटर आफ इंटेंट जारी किये हैं। प्रवक्ता ने कहा कि सरकार ने ईंट-भट्ठों के लिए निजी भूमि पर खनन पट्टा प्रदान करने की प्रक्रिया को सरल किया है, जिसके अन्तर्गत आवेदित क्षेत्र का संयुक्त निरीक्षण केवल सम्बन्धित उपमण्डलाधिकारी नागरिक, खनन अधिकारी व प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड के प्रतिनिधियों द्वारा ही किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि मुख्यमन्त्री व उद्योग मन्त्री के सतत प्रयासों के फलस्वरूप केन्द्र सरकार ने प्रदेश में राज्य स्तरीय पर्यावरण स्वीकृति समिति का गठन कर दिया है। समिति ने अब तक लगभग 100 आवेदकों को पर्यावरण स्वीकृतियां प्रदान कर दी हैं।  हिमाचल प्रदेश में पहली बार माननीय उद्योग मन्त्री की अध्यक्षता में राज्य खनिज सलाहकार समिति का गठन किया गया है। यह समिति खनिजों के सुव्यवस्थित एवं वैज्ञानिक दोहन तथा अवैध खनन की रोकथाम के लिए सरकार को समय समय पर अपने सुझाव देगी।

प्रवक्ता ने कहा कि प्रदेश में अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए सरकार ने हाल ही में 43 वर्ष पुराने नियमों में बदलाव करते हुए हिमाचल प्रदेश गौण खनिज (रियायत) और खनिज (अवैध खनन, उसके परिवहन और भण्डारण का निवारण) नियम, 2015 अधिसूचित किए हैं। इन नियमों में अन्य प्रावधानों के अतिरिक्त अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लिए कठोर प्रावधान किए गए हैं। अवैध खनन में संलिप्त दोषियों को 2 वर्ष की सजा व 25,000 रुपये तक का जुर्माने या दोनों सजाओं का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त अवैध खनिज की मात्रा के आधार पर सजा देने का प्रावधान भी किया गया है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रथम बार खनिजों के अवैध भण्डारण की समस्या को देखते हुए इसमें संलिप्त दोषियों से न्यूनतम 25000 रुपये कम्पाउडिंग फीस के अतिरिक्त अवैध रूप से भण्डारित किए गए कुल खनिज का विक्रय मूल्य वसूलने का प्रावधान किया है।प्रवक्ता ने कहा कि नए नियमों मे यदि कोई स्टोन क्रशर मालिक बिना पंजीकरण स्टोन क्रशर का संचालन करता हुआ पाया जाता है तो उसके विरूद्व एक वर्ष तक का कारावास व 50 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वित वर्ष 2013-14 में खनिजों से सरकार को 11108 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था, जोकि वर्ष 2014-15 में बढ़ कर लगभग 135 करोड़ रुपये हो गया है।

प्रवक्ता ने कहा कि प्रदेश सरकार के प्रयासों के परिणामस्वरूप राज्य में अवैध खनन पर काफी हद तक अंकुश लगा है। पूर्व प्रदेश सरकार के कार्यकाल के दौरान वर्ष 2008-09 से 2012-13 तक अवैध खनन के 16376 मामले पकडे़ गए थे, जिसमें 494 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया था, जबकि वर्तमान प्रदेश सरकार के विगत अढ़ाई वर्षों के कार्यकाल में अवैध खनन के 16193 मामले पकडे़ गए, जिनमें दोषियों से 7.99 करोड़ रुपये जुर्माना वसूला गया। यही नहीं, इस अवधि के दौरान दोषियों के विरूद्व 2394 मामले न्यायालय में भी दायर किए गए। सरकार ने अवैध खनन पर कड़ा संज्ञान लेते हुए 20 जे.सी.बी. मशीनों को जब्त करके उनके मालिकों से 5.75 लाख रुपये व अवैध खनन में संलिप्त 42 अन्य वाहनों को जब्त कर उन पर 3 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया। अवैध निकासी के दौरान लगभग 25000 टन खनिज जब्त किए गए तथा इसकी नीलामी से 40 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।

उन्होंने कहा कि नये नियमों में प्रदेश के नदी-नालों में उपलब्ध खनिज सम्पदा को नीलामी/खुली बोली द्वारा प्रदान करने की समय अवधि को पांच वर्ष से बढाकर 10 वर्ष कर दिया गया है एवं वन भूमि वाले क्षेत्रों में यह अवधि 15 वर्ष तक की होगी। इसके अतिरिक्त विकासात्मक कार्यों जैसे सड़क निर्माण, सुरंग निर्माण, पन-विद्युत परियोजनाओं आदि के विनिर्माण के दौरान निकाले गए अवशिष्ट खनिजों को स्टोन क्रशर इकाईयों में प्रयुक्त करने के लिए प्रावधान किए गए हैं।

प्रवक्ता ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा खनन विभाग को सुदृढ़ करने के लिए दो भू-विज्ञानी, एक सहायक भू-विज्ञानी तथा दो खनिज अधिकारियों के पदों को भरा गया है । इसके अतिरिक्त सहायक खनि निरीक्षक के 7 पद भरे गए हैं तथा खनिज रक्षकों के 25 पदों को भरने की प्रक्रिया भी अन्तिम चरण में है। सरकार द्वारा विभाग में कुल 44 नए पद सृजित किए गए हैं, जिनमें से दो खनन अधिकारी, एक विधि अधिकारी, 16 सहायक खनि निरीक्षक व 25 खनन रक्षक के पद सृजित किए गए हैं जिन्हें शीघ्र ही भरा जाएगा। क्षेत्रीय स्तर पर अवैध खनन की रोकथाम सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तर पर खनन अधिकारियों को सरकार द्वारा वाहन उपलब्ध करवाये गये हैं।

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