सीएसआईआर का मिजोरम ग्रामीण और कृषि विकास सोसाईटी के साथ समझौता ज्ञापन

सीएसआईआर का मिजोरम ग्रामीण और कृषि विकास सोसाईटी के साथ समझौता ज्ञापन

कांगड़ा/पालमपुर: उत्तर पूर्व हिमालयी क्षेत्र के मिज़ोरम रूरल एंड एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट सोसाइटी, ज़ोटलंग, ऐज़वाल, मिज़ोरम के किसान समूह ने पिछले कल सीएसआईआर-आईएचबीटी, पालमपुर का दौरा किया। उन्हें संस्थान में उपलब्ध सभी सुगंधित फसलों की जानकारी प्रदान की गई व इनके महत्व के बारे में बताया गया। इन फसलों की विश्व भर में व्यापक रूप से खेती की जा रही है, इन फसलों से प्राप्त सगंधित तल का उपयोग इत्र उद्योग, भोजन, फार्मास्युटिकल और एग्रोकेमिकल उद्योग में किया जाता है। उन्हें संस्थान द्वारा विकसित विभिन्न बेहतर कृषि विज्ञान प्रोद्योगिकियों के बारे में अवगत कराया गया। मिज़ोरम भारत का उत्तरपूर्वी राज्य है, जिसकी अर्थव्यवस्था अन्य राज्यों की तुलना में तेजी से बढ़ रही है,  तथा प्रति व्यक्ति आय 50,021 रुपये है। अपनी अर्थव्यवस्था को अधिक बढ़ावा देने के लिए वे सुगंधित फसलें उगा सकते हैं और इन फसलों को उगाकर उच्च राजस्व अर्जित  कर सकते हैं।

तदौप्रांत सीएसआईआर-आईएचबीटी ने इस सोसाइटी के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया जिसमें मुख्य उदेश्य जिला लुंगले, मिज़ोरम में उच्च मूल्य की सुगंधित फसलों की खेती, संवर्धन और आसवन इकाई की स्थापना करना है। किसान समूह के अध्यक्ष श्री ज़िओन ने कहा  प्रसंस्करण इकाई को लुंगले में स्थापित किया जाना है, जो उत्तर-पूर्व भारत के दक्षिण-मध्य भाग में स्थित है, लुंगले जिले की औसतन ऊंचाई 722 मीटर है तथा लुंगले जिले के स्थानीय निवासी कृषि पर निर्भर हैं और फसलों को उगाकर अपनी आजीविका कमाते हैं। इस तथ्य के बावजूद कि राज्य की लगभग 60% आबादी के लिए कृषि मुख्य आधार है, क्रमशः 5% और 11% क्षेत्र खेती और सिंचाई के अधीन है। यह क्षेत्र सिंचाई सुविधाओं से वंचित है और अधिकांश कृषि क्षेत्र वर्षा पर निर्भर हैं तथा यह क्षेत्र उच्च मूल्य वाली सुगंधित फसलों की खेती के लिए उपयुक्त है क्योंकि इन फसलों के लिए अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती है। मिजोरम रूरल एंड एग्रीकल्चर डेवलपमेंट सोसाइटी सिंबोपोगोन प्रजातियों की खेती और प्रसंस्करण में समिलित है और सुगंधित फसल के क्षेत्र में बेहतर काम कर रही है।

ड़ा संजय कुमार, निदेशक, सीएसआईआर-आईएचबीटी, पालमपुर ने इस अवसर पर बोलते हुए कहा कि सीएसआईआर ने सुगंधित फसलों को बढ़ावा देने लिए अरोमा मिशन कार्यक्रम शुरू किया है तथा इन फसलों के अंतर्गत 5500 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र का लाने का फैसला किया है। जिससे कृषक समुदाय और ग्रामीण जनता का सामाजिक-आर्थिक उत्थान होगा और रोजगार सृजन में मदद मिलेगी। सुगंधित पौधों के मूल्य संवर्धन के लिए प्रसंस्करण इकाई अपरिहार्य है और इस सुविधा की स्थापना से लुंगले जिले के स्थानीय किसानों को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि 2019 के दौरान, संस्थान ने प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए किसानों के समूहों के साथ 20 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं और देश के विभिन्न क्षेत्रों में इसे स्थापित किया है। उच्च मूल्य की सुगंधित फसलों की खेती से लुंगले क्षेत्र के किसानों को लाभान्वित किया जा सकता है।

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