आचार्य महिंदर कृष्ण शर्मा ने दी मन्त्र दीक्षा

कई बीमारियां जिनका इलाज नही हो पाता वो केवल योग से है संभव : आचार्य महिंदर कृष्ण शर्मा

  • आचार्य महिंदर कृष्ण शर्मा द्वारा साधू पुल में विवेकानंद विद्यालय निकेतन में किया गया योग का आयोजन
  • आचार्य महिंदर कृष्ण शर्मा ने  दी मन्त्र  दीक्षा
  • कहा: हर व्यक्ति अपने जीवन में योग को दे महत्व
  • : योग अब आम लोगों के मानसिक और शारीरिक रोग मिटाने में लाभदायक हो रहा है सिद्ध
  • : योग का नियम से और नियमित अभ्यास करने से सबसे पहले हमारे शरीरबनता है  स्वस्थ

 

 आचार्य महिंदर कृष्ण ने  शिव का ज्ञान और अध्यात्म योग के बारे में  दी जानकारी

आचार्य महिंदर कृष्ण ने शिव का ज्ञान और अध्यात्म योग के बारे में दी जानकारी

शिमला: विश्व में हर जगह योग की चर्चा के मध्य आचार्य महिंदर कृष्ण शर्मा द्वारा भी आज योग दिवस के अवसर साधू पुल में विवेकानंद विद्यालय निकेतन में योग शिविर का आयोजन किया गया।साथ ही उन्होंने सरस्वती साधना मन्त्र दीक्षा भी दी। जिसमें अभिभावकों और विद्यालय के अध्यापक वर्ग ने  भाग लिया। आचार्य महिंदर कृष्ण ने उन्होंने स्कूल में शिक्षा सरस्वती साधना शिव का ज्ञान और अध्यात्म योग के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि योग का अर्थ है जोड़। कई बीमारियां जिसका इलाज नही हो पाता वो केवल योग से संभव है। आवश्यक है कि हर व्यक्ति अपने जीवन में योग को महत्व दे। आज से 50 वर्ष पूर्व योग का अध्ययन-अध्यापन ऋषियों तथा महर्षियों का विषय माना जाता था, लेकिन योग अब आम लोगों के मानसिक और शारीरिक रोग मिटाने में लाभदायक सिद्ध हो रहा है।

उन्होंने कहा कि योग का नियम से और नियमित अभ्यास करने से सबसे पहले हमारे शरीर स्वस्थ बनता है। शरीर के स्वस्थ रहने से मन और मस्तिष्क भी ऊर्जावान बनते हैं। दोनों के सेहतमंद रहने से ही आत्मिक सुख की प्राप्ति होती है। यह तीनों के स्वास्थ्य तालमेल से ही जीवन में खुशी और सफलता मिलती है।

उन्होंने कहा कि हमें एक स्वस्थ व्यक्ति बनना होगा और इसके लिए योगाभ्यास जरूरी है। इसके द्वारा हम स्वस्थ मस्तिष्क व शरीर बनाते हैं। स्वस्थ होने पर ही हम हमारे कर्म की उपलब्धियों का सही उपयोग करते हुए अपने जीवन को स्वर्ग के समान बनाने में सफल हो सकते हैं। कार्यक्रम में मुख्यअथिति आचार्य महिंदर कृष्ण और उमेश दत्त पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री भी मौजूद रहे। करीब 800 के  लोगों ने यहाँ योग शिविर में हिस्सा लिया। साधना का समय लगभग सवा घंटे का रहा।

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