मशोबरा कृषि प्रबंधन संस्थान में एक दिवसीय कृषि निर्यात नीति-2018 पर आधारित कार्यशाला

मशोबरा कृषि प्रबंधन संस्थान में एक दिवसीय कृषि निर्यात नीति-2018 पर आधारित कार्यशाला

  • कृषि मंत्री का विशेषज्ञों से किसान वर्ग को जागरूक करने व कृषि को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए आह्वान
  • प्रयोगशाला की तकनीकों को किसानों तक पहुंचाए, ताकि  लघु एवं सीमांत किसानों की आय में हो बढ़ोतरी : कृषि मंत्री

रीना ठाकुर/शिमला: मशोबरा कृषि प्रबंधन संस्थान के सभागार में एक दिवसीय कृषि निर्यात नीति-2018 पर आधारित कार्यशाला का कृषि, जनजातीय एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने आज शुभारंभ किया। कृषि निदेशक डॉ. राकेश कौंडल ने मुख्यातिथि का स्वागत किया और उन्हें विभाग की समावेशी और किसान कल्याण की योजनाओं से अवगत करवाया। वहीं इस अवसर पर एपीईडीए की एजीएम रजनी अरोड़ा, कृषि प्रबंधन संस्थान मशोबरा के निदेशक डॉ. देशराज ठाकुर व कृषि विभाग के विशेषज्ञगण भी उपस्थित थे।

इस अवसर पर कृषि विशेषज्ञों एवं कृषि उत्पादक संगठन के पदाधिकारी को संबोधित करते हुए मारकंडा ने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि का सकल घरेलू उत्पाद में 20 प्रतिशत योगदान है। उन्होंने कृषि विशेषज्ञों से अनुरोध किया कि वे प्रयोगशाला की तकनीकों को किसानों तक पहुंचाए, ताकि ग्रामीण आर्थिकी को संबल प्रदान हो और लघु एवं सीमांत किसानों की आय में बढ़ोतरी दर्ज हो।

डॉ. मारकंडा ने बताया कि भारत सरकार 2022 तक कृषि निर्यात को 100 अरब डालर तक पहुंचाने के लिए कृत संकल्प है और नवीनतम तकनीक से किसानों को लाभान्वित किया जा रहा है। उन्होंने किसानों की आय में इजाफा करने के लिए मूल्य संवर्धन के कार्य को गति देने पर बल दिया।

कृषि मंत्री ने रसायन युक्त खेती के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डाला और विशेषज्ञों से गहन विचार विमर्श किया। उन्होंने स्वास्थ्य के लिए हानिकारक कीटनाशकों के जहर से लोगों को जागरूक करने के लिए समाज के जागरूक वर्ग का सहयोग मांगा। उन्होंने वैश्विक बाजार के युग में नवीन तकनीकों व प्रतिस्पर्धा के दौर में कार्यशाला से किसान वर्ग को जागरूक करने और कृषि को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए विशेषज्ञों से आह्वान किया ताकि ग्रामीण लोगों को वर्तमान प्रदेश सरकार की समावेशी नीतियों का लाभ मिल सके।

कृषि मंत्री ने रसायन मुक्त खेती के लाभ से किसान उत्पादक संगठनों को अवगत करवाया और इसकी कम लागत के महत्व पर विस्तृत चर्चा की।

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