बागवान वास्तविक स्थिति जाने बिना किसी माईटनाशक का छिडक़ाव न करें : डा. एस पी भारद्वाज

बागवान वास्तविक स्थिति जाने बिना न करें माईटनाशक का छिडक़ाव : डा. एसपी भारद्वाज

  •  सेब बागीचों में रैड माईट पूर्व पत्ती झडऩ रोग के नियंत्रण व गुणवत्ता युक्त फल बनाने के प्रयास करने का यह उचित समय
  • मॉनसून के आने कुछ दिन पहले पौधों पर पूर्व पत्ती झडऩ रोग की सम्पूर्ण रोकथाम के लिए फफूंदनाशक का छिडक़ाव आवश्यक
  • पहले छिडक़ाव में अकेले मौलीक्यूल वाले फफूंदनाशक का करें चयन 
  • बरसात होने के पश्चात दो मौलीक्यूल वाले फफूंदनाशक का प्रयोग लाभप्रद
बागवानी विशेषज्ञ डा. एस.पी. भारद्वाज

बागवानी विशेषज्ञ डा. एस.पी. भारद्वाज

गुणवत्ता युक्त फल बनाने के प्रयास करने का उचित समय

गुणवत्ता युक्त फल बनाने के प्रयास करने का उचित समय

इस समय सेब बागीचों में रैड माईट पूर्व पत्ती झडऩ रोग के नियंत्रण तथा गुणवत्ता युक्त फल बनाने के प्रयास करने का उचित समय है। रैड माईट के अण्डे ग्रीष्मकाल में पत्तियों की निचली सतह पर मुख्य रूप से मुख्य नाड़ी या अन्य नाडिय़ों के आसपास दिए जाते हैं। इनका रंग हल्के पीले से क्रीम रंग का होता है और यह अत्यन्त छोटे होते हैं तथा इन्हें सुगमता से हैंड लैंस से देखा जा सकता है। इनका आकार गोल व 0.15 मि.मि तक लम्बे-चौड़े होते हैं। इनकी शिशु माईट की विभिन्न अवस्थाएं जो लारवा, प्रोटोनिया, डयुटोनिफ व वयस्क होती हैं को भी एक साथ देखा जा सकता है। 25 पौधों के मध्य भाग से चार पत्तियां जो प्रत्येक दिशा से ली गई हों, जो 100 बनती हैं का परीक्षण करने पर यदि इस समय माईट की जीवसंख्या औसतन 6 प्रति पत्ती हो या इससे अधिक हो तो ही माईट को नियंत्रण करने की आवश्यकता है अन्यथा किसी माईट नाशक के छिडक़ाव की आवश्यकता नहीं है।

माईट की जीवसंख्या प्रति पत्ती 7-10 होने पर मैजिस्टर 25 मि.लि. मडेन 100 मि.लि. या ओवेरान 60 मि.लि. प्रति 200 लिटर पानी में मिलाकर छिडक़ाव करें। यदि माईट की जीवसंख्या 10 प्रति पत्ती से अधिक हो तो मडेन मैजिस्टर 50 मि.लि. या 200 मि.लिटर प्रयोग करें। अभी लेखक सेब बागीचों के कई क्षेत्रों का सर्वेक्षण करके लौटे हैं और माईट की जीवसंख्या प्रति पत्ती 4 से कम ही देखी गई है। अत: अपने बागीचे की वस्तुत: स्थिति का आंकलन करने के पश्चात ही किसी युक्तिगत निर्णय पर पहुंचे। केवल देखा देखी या वास्तविक स्थिति जाने बिना किसी माईटनाशक का छिडक़ाव न करें। अन्यथा माईट की जीव संख्या अधिक होने की संभावना बढ़ जाती है।

बागवान भाईयों की एक धारण बन गई है कि गर्मियों में किसी छिडक़ाव को न करें यह सर्वथा अनुचित है। मॉनसून के आने से 10-15 दिन पहले पौधों पर पूर्व पत्ती झडऩ रोग की सम्पूर्ण रोकथाम के लिए फफूंदनाशक का छिडक़ाव आवश्यक है। इस समय पूर्व पत्ती झडऩ रोग की रोकथाम हेतु जून 20 से 25 के मध्य डायथेन या इंडोफिल एम 45 (600 ग्राम) या डोडीन (150 ग्राम) या रोको/ टापसिन एम (100 ग्राम) या इंडेक्स या सिस्थेन (80 ग्राम) या गर्वनर (50 मि. लिटर) या कन्टाफ (100 मि. लिटर) या स्कोर (50 मि.लिटर) में से किसी एक का चयन करके प्रति 200 लिटर पानी की मात्रा में घोलकर छिडक़ें। पहले छिडक़ाव में अकेले मौलीक्यूल वाले फफूंदनाशक का चयन करें तथा बरसात होने के पश्चात दो मौलीक्यूल वाले फफूंदनाशक का प्रयोग लाभप्रद होता है।

ऐसे फफूंदनाशक जो फलों की डंडियों पर या फल पर चिपक जाते हैं, का प्रयोग इस महीने के अन्त तक कर लें। इन चिपकने वाले फफूंदनाशकों से माईट के परभक्षी कीट अधिक संख्या में मर जाते हैं और इनसे रैड माईट की जीवसंख्या बढ़ जाती है जो पौधे के स्वास्थ्य तथा फल की गुणवत्ता को न केवल इस वर्ष प्रभावित करती है अपितु अगले वर्ष भी फल को उचित दाम नहीं मिल पाते। अत: उपयुक्त फफूंदनाशक का चयन अति आवश्यक है।

इस समय फलों में उपयुक्त गुणवत्ता निर्धारण करने का भी समय है। हमारे अधिकतर फलों व पौधों में कैल्शियम, बोरोन व जिंक की कमी देखी गई है। अत: कैल्शियम चिलेटिड फार्म का प्रयोग

पौधों के भीतरी भाग में समर प्रूनिंग यानि अवांछित नई कोमल शाखाओं को तुरन्त निकालते रहें

पौधों के भीतरी भाग में समर प्रूनिंग यानि अवांछित नई कोमल शाखाओं को तुरन्त निकालते रहें

करने से यह तत्व पौधों में शीघ्र प्रवेश करता है तथा मूलत: कोई नकारात्मक असर भी नहीं छोड़ता है। चिलेटिड कैल्शियम जो कैल्शियम ईडीटीए या चैलाकेल के नाम से बाज़ार में उपलब्ध है, को 33 ग्राम प्रति 200 लिटर पानी में घोलकर छिडक़ें। यदि जिंक या बोरोन की कमी पौधों में देखी गई है जो चिलेटिड जिंक 100 ग्राम तथा बोरिक एसिड 200 ग्राम पति 200 लिटर पानी में मिलाकर इस महीने के अन्त तक छिडक़ा जा सकता है।

यदि विशेष तत्वों की कमी बागीचों में नहीं देखी गई है तो एक छिडक़ाव सूक्ष्म तत्वों का दिया जाना वांछित है। इसके लिए एग्रोमिन 250 मि.लिटर या मल्टीप्लैक्स 500 मि.लिटर प्रति 200 लिटर पानी में मिलाकर छिडक़ें। इस समय नत्रजन तत्व का प्रयोग अकेले या मिश्रित रूप में न करें क्योंकि इससे फल में वांछित रंग की कमी तथा अन्दर से ठोसपन कम तथा अधिक समय तक ऐसे फलों का भण्डारण नहीं हो पाएगा।

पौधों के भीतरी भाग में समर प्रूनिंग यानि अवांछित नई कोमल शाखाओं को तुरन्त निकालते रहें इससे फल गुणवत्ता में 20-25 प्रतिशत तक सकारात्मक सुधार होगा तथा सर्दियों में 35 प्रतिशत तक कांट-छांट के कार्य में कमी होगी।

यह ध्यान रखें कि किसी भी कीटनाशक-माईटनाशक या फफूंदनाशक व पोषक तत्वों को बिना इनकी समरूपता जाने, न मिलाएं अन्यथा हानि होगी। वैज्ञानिक सलाह लिए बिना किसी भी छिडक़ाव को न करें। ऊपर दिए गए सुझावों पर यदि बागवान अमल करेंगे तो नि:संदेह खर्चों में कमी आएगी अपितु फल उत्पादन में भी गुणात्मक सुधार होगा और अच्छी आय की प्राप्ति होगी।

अगर आप बागवानी संबंधी किसी भी प्रकार की जानकारी पाना चाहते हैं तो आप इस नम्बर पर 94180-64600 फोन, ई-मेल या फिर वॉटस ऐप द्वारा भी बागवानी विशेषज्ञ डा. एस.पी. भारद्वाज जी से जानकारी हासिल कर सकते हैं।

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