अनियमित दिनचर्या और खान-पान के कारण कब्‍ज और पेट गैस की समस्‍या आम बीमारी

अनियमित दिनचर्या और खान-पान के कारण कब्‍ज और पेट गैस की समस्‍या आम बीमारी

अनियमित दिनचर्या और खान-पान के कारण कब्‍ज और पेट गैस की समस्‍या आम बीमारी की तरह हो गई है। कब्‍ज रोगियों में पेट फूलने की शिकायत भी देखने को मिलती है। लोग कहीं भी और कुछ भी खा लेते हैं। खाने के बाद बैठे रहना, डिनर के बाद तुरंत सो जाना ऐसी आदतें हैं जिनके कारण कब्‍ज की शिकायत शुरू होती है। पेट में गैस बनने की बीमारी ज्‍यादातर बुजुर्गों में देखी जाती है लेकिन यह किसी को भी और किसी भी उम्र में हो सकती है।  हम आपको कब्‍ज से बचने के घरेलू नुस्‍खों के बारे में विस्तार से जानकारी दे रहे हैं।

सुबह सवेरे अच्छे से पेट साफ होना, हेल्दी होने की सबसे बड़ी निशानी है। मगर खान-पान में अनियमितता, भागदौड़ भरा जीवन और इसके चलते पैदा हुआ तनाव, हर सुबह मोशन की जंग लड़वाता है। कब्ज से सिर्फ बूढ़े ही नहीं जवान भी परेशान रहते हैं। मगर थोड़ी सी सावधानी से इस पर काबू पाया जा सकता है। आइये जाने कब्ज दूर करने के उपाय :

आंतों की गतिशीलता कम होना या पाचन शक्ति कम होने से खाना सही ढंग से हजम नहीं होता और पचकर बचा हुआ अंश बड़ी आंत में समय पर नहीं पहुंच पाता। खाया गया भोजन सबसे पहले आमाशय या पेट में जाता है। वहां से पाचक रसों के साथ मिलकर छोटी आंत में चला जाता है, जहां उसका अन्य तत्वों के साथ पूर्ण पाचन होता है। पाचन के पूरा हो जाने के बाद यहां से आवश्यक रस या तत्व लीवर से होते हुए शरीर के अन्य अंगों की ओर चले जाते हैं, जबकि बचा हुआ बेकार पदार्थ बड़ी आंत की ओर खिसक जाता है। यह बचा हुआ पदार्थ बड़ी आंत के रास्ते मलमूत्र के रूप में शरीर से बाहर निकलता है। लेकिन अगर पाचन कमजोर है तो बचा हुआ पदार्थ सही समय पर बड़ी आंत में नहीं पहुंच पाता। नतीजतन जब सुबह मलत्याग की कोशिश होती है, तो पेट ठीक से साफ नहीं होता। इसी को कब्ज कहते हैं।

आयुर्वेद: आयुर्वेद के अनुसार शरीर में वात के बढ़ने से कब्ज होती है। खान-पान की गलत आदतें, जितनी भूख लगी है, उससे ज्यादा खाना, मीट और ऐसे ही मुश्किल से पचने वाली भारी अन्न पदार्थों को खाना और फल-सब्जियां-सलाद कम खाने से कब्ज होती है। नींद पूरी न होना, तनाव-भय-चिंता या शोक आदि से भावनात्मक दबाव पैदा होता है, जिससे मल त्याग के रास्ते में रुकावट पैदा होने और आंतों में विषाक्त तत्व जमा होने के अलावा नर्वस सिस्टम ज्यादा उत्तेजित रहने के कारण भी कब्ज बन जाती है। नशीली दवाएं व स्मोकिंग भी कब्ज का कारण है।

कैसे पहचानें कब्ज : अगर रोजाना ढंग से पेट साफ नहीं होता। हमेशा ऐसा लगता रहे कि पेट से मल पूरी तरह से बाहर नहीं निकला है। बार-बार टॉइलेट जाएं, मगर फिर भी मोशन आने का अंदेशा बना रहे। इसे सीधे तौर पर कब्ज नहीं कहा जाता, मगर यह कब्ज का ही एक रूप यानी उदर विकार ( पेट साफ न होने की बीमार) है।

कब्ज के लक्षण : गैस बनना, पेट में हवा भरना, पेट में दर्द या भारीपन, सिरदर्द, भूख में कमी, जीभ पर अन्न कणों का जमा होना या मुंह का स्वाद बिगड़ना। चक्कर आना, टांगों में दर्द होना, बुखार, नींद-सी छाई रहना और धड़कन का बढ़ जाना।

कब्ज के कारण : नाभि का ऊपर की तरफ खिसक जाना। बहुत ज्यादा मानसिक तनाव में रहना। तला-भुना, मसालेदार गरिष्ठ भोजन करना। एलोपैथिक दवाओं का ज्यादा सेवन करना। खाने का समय नियमित न होना। टॉइलेट जाने की जरूरत महसूस होने पर भी तमाम वजहों से उसे टालते रहना। इस वजह से कब्ज भी हो जाता है। स्मोकिंग या तंबाकू के दूसरे तरीकों से सेवन के कारण। नशीली दवाओं के सेवन से। कोल्ड ड्रिंक या शराब जरूरत से ज्यादा पीने की वजह से। जितनी भूख लगी है, उससे कम खाना खाना।

आयुर्वेद में कब्ज का इलाज : हिमालय ड्रग्स की हर्बोलेक्स की दो गोली, रात को गुनगुने पानी से। गंधर्व हरीतकी चूर्ण आधा से एक चम्मच, रात को गुनगुने पानी से। स्वादिष्ट विरेचन चूर्ण आधा से एक चम्मच, रात को गुनगुने पानी से। त्रिवृत्त चूर्ण आधा से एक चम्मच, रात को गुनगुने पानी से। सेज कंपनी का त्रिफला सीरप दो चम्मच पानी के साथ। शुगर के पेशंट्स के लिए इस दवा का इस्तेमाल न करें। सीगल कंपनी का फिगोलेक्स सीरप दो चम्मच, रात को पानी के साथ। सॉफ्टोवैक पाउडर एक से दो चम्मच। यह दवा ईसबगोल का ही एक रूप है। शुगर पेशंट्स के लिए यह पाउडर सॉफ्टोवैक-एसएफ या शुगर फ्री के नाम से आता है। त्रिफगोल एक चम्मच पाउडर, रात को पानी से। बिल्वादि चूर्ण एक चम्मच, गुनगुने पानी से। केस्टॅर ऑयल (अरंड का तेल) दो छोटे चम्मच। इसमें थोड़ा सा गुनगुना पानी या दूध मिला लें। आरोग्यवधिर्नी वटी दो-दो गोली सुबह-शाम पानी से। गुलकंद एक-एक चम्मच सुबह-शाम दूध से। पंचसकार चूर्ण एक चम्मच रात के समय।

नोट – इनमें से कोई एक उपाय करें।

 

 

ऐलोपैथी

क्या है कब्ज : अगर शौच जाने पर निकलने वाला मल सख्त हो या उसके निकलने में बहुत जोर लगाना पड़े या मल की प्रकृति सामान्य न हो, तो उसे कब्ज कहते हैं।

कब्ज के कारण : कई ऐसी बमारियां हैं, जिनकी वजह से कब्ज की बीमारी हो जाती है। मसलन रसौली ( आंत में गांठ) की बीमारी की वजह से कब्ज हो जाता है। इसी तरह किसी वजह से आंत में रुकावट आने की वजह से भी कब्ज हो जाता है। ऐसे मामलों में डॉक्टर से सलाह करें। ज्यादातर मामलों में ऑपरेशन किया जाता है।

अगर किसी को हाल ही में कब्ज शुरू हुआ है, पेट में तेज दर्द होता हैया पेट बुरी तरह फूल जाता है। उल्टियां आ रही हैं या फिर मोशन के दौरान ब्लड आ रहा है, तो फौरन डॉक्टर से सलाह लें। लगातार पेनकिलर्स या नॉरकोटिस, एनलजेसिक या दर्द निवारक दवाएं खाने वाले भी कब्ज का शिकार हो जाते हैं। यदि ऐसी दवाओं को रोक दिया जाए तो कब्ज ठीक हो जाएगी।

हॉरमोंस की प्रॉब्लम, थाइरॉयड या शुगर से भी कब्ज हो जाती है। पारकिन्सन्स, पैरालिसिस से ग्रस्त या बिस्तर पर लेटे रोगियों को भी कब्ज हो जाती है।

क्या है इलाज : अगर कब्ज से दूर रहना है, तो छोटी मोटी शारीरिक परेशानियों में फौरन दवा खाने की आदत से बचें। मतलब यह है कि कम से दवाइयां खाएं। खानपान का ध्यान रखें। हरी और रेशेदार सब्जियां और लिक्विड मसलन, दूध, फलों का रस, शिकंजी आदि का सेवन करें। रेग्युलर एक्सर्साइज करें। अगर वजन सही अनुपात में है और बॉडी फिट है, तो कब्ज की आशंका कम ही रहती है। कब्ज की दवाओं के सहारे पेट साफ करने की आदत सही नहीं है। लंबे समय तक इन दवाओं को खाने से अंतडि़यों में सूजन आ जाती है। इन दवाओं की आदत भी पड़ जाती है। दूध-दही या पानी के साथ रात के समय ईसबगोल की भूसी दो चम्मच लें। अगर ऊपर बताए उपाय करने पर भी कब्ज से आराम नहीं मिल रहा है, तो कुछ दिनों के लिए लेक्टोलॉज 15 एमएम की गोली ले सकते हैं।

डॉक्टर मनोवैज्ञानिक सलाह और ट्रेनिंग के जरिए भी कब्ज के रोगियों का इलाज करते हैं।

योग के जरिए कब्ज का इलाज : कपालभाति प्राणायाम धीरे-धीरे एक बार में जितना कर सकें। ऐसे तीन से चार राउंड करने की सलाह दी जाती है। इसे करते समय आंखें बंद रखें और ध्यान पेट पर लगाएं। मन में यह भाव लाएं कि आंतों की क्रियाशीलता बढ़ रही है और कब्ज दूर हो रहा है। अग्निसार क्रिया, उर्ध्व हस्तोत्तानासन, पवनमुक्तासन, भुजंगासन, मंडूकासन और भस्त्रिका प्राणायाम। धनुरासन, उत्तानपाद, पश्चिमोत्तानासन, मत्स्यासन भी कब्ज दूर करने में सहायक होते हैं। कोई भी आसन तीन से चार बार कर सकते हैं। मगर गोल्डन रूल यही है कि योग अपनी शक्ति और सार्मथ्य के हिसाब से ही करें, जबरन नहीं। दो-तीन दिन में एक बार गुनगुने पानी की एनीमा लें।

कुछ दिनों के अंतराल पर लघु शंखप्रक्षालन करते रहें।

क्या होता है लघु शंखप्रक्षालन- सुबह खाली पेट नमक मिला गुनगुना पानी पीकर कुछ विशेष आसन करने होते हैं। उसके बाद मोशन के जरिए पेट की सफाई होने लगती है।

मुद्रा विज्ञान के जरिए इलाज : अपान मुद्रा को एक से पचीस मिनट तक रोजाना करें।

हॉम्योपैथी : हॉम्योपैथी किसी भी बीमारी के मूल कारणों को दूर करने पर जोर देती है। कब्ज की अलग-अलग वजहों के लिए हॉम्योपैथी में अलग-अलग दवाएं हैं-

डाइट चार्ट : कब्ज की सबसे बड़ी वजह होती है खान-पान की अनियमितता। अगर हमें पता हो कि कौन सी चीजें खाने से पेट अच्छे ढंग से साफ होता है और कौन सी चीजों से कब्ज होता है, तो खानपान के सहारे ही इस बीमारी से दूर रहा जा सकता है।

खाएं : फल – मौसमी, संतरा, नाशपाती, तरबूज, खरबूजा, आड़ू, अन्ननास, कीनू, सरदा, आम, शरीफा, अमरूद, पपीता व रसभरी, थोड़ा-बहुत अनार। यानी मुख्य रूप से रेशेदार फल ही लें।

सब्जियां : रसे वाले या दूसरी सब्जियों में मिलाकर बनाए गए आलू, बंदगोभी, फूलगोभी, मटर, सभी प्रकार की फलियां, शिमला मिर्च, तोरी, टिंडा, लौकी, परमल, गाजर, थोड़ी बहुत मेथी, मूली, खीरा , ककड़ी, कद्दू- पेठा, पालक, नींबू व सरसों। कब्ज के लिए बथुआ खास तौर पर अच्छा होता है।

दालें : उड़द की छोड़कर सभी साबुत यानी छिलके वाली दालें।

अनाज: रोटी बनाने के लिए गेंहूं के आटे में काले चने का आटा या चोकर मिलाकर आटा गूंदें। पांच किलोग्राम आटे में में ढाई सौ ग्राम चोकर मिला लें।

चावल कम खाएं। क्रीम निकला हुआ यानी टोंड दूध ही पीएं। कोल्ड ड्रिंक के रूप में शर्बत, शिकंजी, नींबू पानी या लस्सी को प्राथमिकता दें। जमकर पानी पिएं।

परहेज करें फल- चीकू, केला, सेब, अंगूर, शरीफा, लीची।

सब्जियां -अरबी, भिंडी, कचालू, रतालू, बैंगन, जिमीकंद, चुकंदर।

दालें –राजमा, सफेद छोले, साबुत उड़द, चने, सोयाबीन, लोबिया (खास तौर पर रात के वक्त इन्हें खाने से परहेज करें) मीट, अंडा व मछली कब्ज करती हैं। इन्हें दूसरी सब्जियों के साथ मिलाकर खाएं।

जूस के बजाय साबुत फल खाएं: पनीर, मक्खन व घी से बचें। पनीर को पालक के साथ खा सकते हैं। मलाई वाला दूध।

ध्यान दें : फास्ट फूड, जंक फूड यानी मैदे आदि से बनी चीजों से परहेज करें। सॉफ्ट ड्रिंक, शराब और सिगरेट-तंबाकू से दूर रहें। लाइफ स्टाइल में सुधार लाएं। दवाओं पर निर्भर न रहें। पपीता खाएं। कब्ज के रोगियों को इस गूदेदार फल से बहुत लाभ मिलता है। किशमिश या मुनक्के के बीज निकालकर 5 से 10 दाने रोजाना भिगोकर खायें। अगर भिगोकर खाने में सहूलियत नहीं, तो ऐसे ही खा लें। मुनक्का दूध के साथ भी ले सकते हैं। जिन्हें कब्ज की शिकायत है, वे सेब और अनार न खाएं। इन फलों से कब्ज बढ़ता है। गैस बनने की वजह से भी कब्ज की शिकायत होती है। इसलिए ऐसी चीजों से परहेज करें, जिनसे गैस बनती है।

स्मोकिंग से मोशन बनने का मिथ :कुछ लोग मोशन के वक्त बीड़ी-सिगरेट या गुटखे आदि की तलब की बात करते हैं। उनका कहना होता है कि इसके बिना पेट साफ ही नहीं होता। कुछ लोग टॉइलेट जाते समय अखबार साथ लेकर जाते हैं। ऐक्सपर्ट्स का कहना है कि निकोटीन को किसी भी फॉर्म में लेने का पेट साफ करने से कोई संबंध नहीं है। सिर्फ यह दिमाग का भ्रम है। जरूरत अपनी विल पॉवर को मजबूत करने की है। शुरुआत में कुछ दिक्कत लग सकती है। ऐसे में गर्म पानी पिएं। धीमे-धीमे आदत छूट जाएगी।

शुगर पेशंट को अकसर हाजमा खराब रहने और कब्ज की शिकायत होती है। शुगर पेशंट्स की आंत पर शुगर की वजह से असर पड़ता है। आंतों में मल का मूवमेंट स्लो हो जाता है। इसी वजह से कब्ज हो जाता है। शुगर के रोग निम्न तरीके अपना सकते हैं-

सबसे पहले शुगर को कंट्रोल में करें। खाने में फाइबर यानी रेशेदार चीजों की मात्रा बढ़ाएं। आटे में चोकर मिलाकर रोटियां बनवाएं। ईसबगोल की भूसी शाम को छह बजे के आसपास पानी से लें लें। ईसबगोल का असर होने में 10-12 घंटे लग जाते हैं, इसलिए शाम को छह बजे के करीब लेंगे तो सुबह समय से मोशन हो सकेगा। जब कब्ज ठीक हो जाए, तो यह प्रयोग बंद कर दें। ईसबगोली की भूसी का दूध के साथ सेवन न करें।

सुबह उठकर गुनगुना पानी पिएं। रोजाना टहलने जरूर जाएं। खास तौर पर सुबह के समय। रोजाना दो सौ ग्राम कोई भी रेशेदार फल मसलन, पपीता जरूर खाएं। शुगर के रोगी चीकू, केले, नारियल, आम व भुट्टा न खाएं। सब्जियों में पत्ते वाली सब्जियां, फलियां व सलाद लें। हरी सब्जियां ज्यादा खाएं। दलिया खाएं। दूध में ओटमील या जई का आटा मिलाकर खाएं। त्रिफला व ईसबगोल की भूसी दो चम्मच मिलाकर शाम को लें।

गैस बनने की समस्या काफी तकलीफदेह साबित होती है। यह कई बार आपको शर्मिंदा तो कर ही सकती है, आपके पाचन तंत्र की भी सेहत बिगाड़ सकती है. अगर आप गैस बनने यानी एसिडिटी से परेशान हैं तो आपके लिए कुछ घरेलू नुस्खे हैं जिन्हें अपनाने से आपकी सारी परेशानियां दूर हो जाएगी।

गैस बनने के लक्षण: पेट में दर्द, जलन, पेट से गैस पास होना, डकारें आना, छाती में जलन. इसके अलावा, खाना खाने के बाद पेट ज्यादा भारी लगना और खाना हजम न होना, भूख कम लगना, पेट भारी-भारी रहना और पेट साफ न होने जैसा महसूस होना।

किससे बनती है गैस : खानपान, शराब पीने से, मिर्च-मसाला, तली-भुनी चीजें ज्यादा खाने से, राजमा, छोले, लोबिया, मोठ, उड़द की दाल. खाने के साथ कोल्ड ड्रिंक लेने से। इसमें गैसीय तत्व होते हैं. तला या बासी खाना।

लाइफस्टाइल: तनाव में रहना, देर से सोना, सुबह देर से जागना, खाने-पीने का टाइम फिक्स्ड न होना।

बाकी वजहें भी हैं लीवर में सूजन, गॉल ब्लेडर में स्टोन, अल्सर या मोटापे से, डायबीटीज, अस्थमा या बच्चों के पेट में कीड़ों की वजह से, अक्सर पेनकिलर खाने से, कब्ज, खाना न पचने व उलटी की वजह से।

घरेलू नुस्खे: गैस बनने की समस्या काफी तकलीफदेह साबित होती है. यह कई बार आपको शर्मिंदा तो कर ही सकती है, आपके पाचन तंत्र की भी सेहत बिगाड़ सकती है. अगर आप गैस बनने यानी एसिडिटी से परेशान हैं तो आपके लिए कुछ घरेलू नुस्खे हैं जिन्हें अपनाने से आपकी सारी परेशानियां दूर हो जाएगी।

गैस बनने के लक्षण: पेट में दर्द, जलन, पेट से गैस पास होना, डकारें आना, छाती में जलन. इसके अलावा, खाना खाने के बाद पेट ज्यादा भारी लगना और खाना हजम न होना, भूख कम लगना, पेट भारी-भारी रहना और पेट साफ न होने जैसा महसूस होना।

घरेलू नुस्खे: एक मुनक्के का बीज निकालकर उसमें मूंग की दाल के एक दाने के बराबर हींग या फिर लहसुन की एक छिली कली रखकर मुनक्के को बंद कर लें। इसे सुबह खाली पेट पानी से निगल लें। इसके 20-25 मिनट बाद तक कुछ न खाएं। तीन दिन लगातार ऐसा करें। अजवायन, जीरा, छोटी हरड़ और काला नमक बराबर मात्रा में पीस लें। बड़ों के लिए दो से छह ग्राम, खाने के तुरंत बाद पानी से लें। बच्चों के लिए मात्रा कम कर दें। पांच ग्राम हल्दी या अजवायन और तीन ग्राम नमक मिलाकर पानी से लें। दो लौंग चूस लें या फिर उन्हें उबालकर उस पानी को पी लें। पानी में 10-12 ग्राम पुदीने का रस और 10 ग्राम शहद मिलाकर लें। खाना खाने के बाद 25 ग्राम गुड़ खाने से गैस नहीं बनती और आंतें मजबूत रहती हैं।

हॉम्योपैथी के मुताबिक शुगर वालों के लिए कब्ज का इलाज-

जैलसीमियम-30, केल्केरिया कार्ब-30, इंसुलिनम-30, सिलिशिया-30 या पैराफिन-30 में से कोई एक दवा, दिन में तीन-चार बार पानी से लें। इस इलाज के साथ शुगर के लिए ली जा रही एलोपैथिक दवाएं भी जारी रखें। इस बारे में डॉक्टर से सलाह करना ठीक रहेगा।

कब्ज का घरेलू इलाज :बच्चों में कब्ज के लिए बड़ी हरड़ को पानी में घिसकर दो चम्मच पिलाएं। इसमें चीनी भी मिला सकते हैं। बच्चों की गुदा में थोड़ा सा सरसों या नारियल का तेल लगाने से उनकी कब्ज खुल जाती है। बड़ों को सनाय के पत्ते, सौंफ, छोटी हरड़, काला नमक व पिपली बराबर मात्रा में मिलाकर एक चम्मच के बराबर फंकी रात में गुनगुने पानी से लें। छोटी हरड़ का चूर्ण तीन से पांच ग्राम तक रात को पानी से लें। बहुत ज्यादा कब्ज हो तो एक बार दिन में भी ले सकते हैं। रात को सोते वक्त एक चम्मच आंवला चूर्ण गुनगुने पानी से लें। रात को सोते वक्त एक चम्मच त्रिफला (हरड़, बहेड़ा व आंवला का मिक्स)चूर्ण गुनगुने पानी से लें। सुबह उठकर खाली पेट गुनगुना पानी पीएं। खाना खाने के बाद एक कप गरम पानी पीएं। रात को सोते समय गरम दूध लें। सदिर्यों में इसमें बादाम रोग डाल लें। दूध में दो-चार मुनक्के के दाने उबालकर रात को लें। ईसबगोल की भूसी दूध के साथ फंकी लें।

खाने की गलत आदतों के कारण होती है कब्‍ज। मुनक्‍का में कब्‍ज नष्‍ट करने के तत्‍व मौजूद होते हैं। कब्‍ज के लिए त्रिफला बहुत ही अच्‍छा घरेलू उपचार है। इसबगोल की भूसी कब्‍ज के लिए रामबाण दवा है।

मुनक्‍का: मुनक्‍का में कब्‍ज नष्‍ट करने के तत्‍व मौजूद होते हैं। 6-7 मुनक्‍का रोज रात को सोने से पहले खाने से कब्‍ज समाप्‍त होती है। इसके अलावा सुबह उठने के बाद बिना कुछ खाए हुए, 4-5 दाने काजू के और 4-5 दाने मुनक्‍का के साथ खाइए, इससे कब्‍ज की शिकायत समाप्‍त होगी।

शहद: कब्‍ज के लिए शहद बहुत फायदेमंद है। रात को सोने से पहले एक चम्‍मच शहद को एक गिलास पानी के साथ मिलाकर नियमित रूप से पीने से कब्‍ज दूर हो जाता है।

त्रिफला: कब्‍ज के लिए त्रिफला बहुत ही अच्‍छा घरेलू उपचार है। त्रिफला शब्द का शाब्दिक अर्थ है “तीन फल”। त्रिफला तीन चीजों यानी आंवला, बहेडा और हरड़ को समान मात्रा में मिलाकर बनता है। 20 ग्राम त्रिफला रात को एक लिटर पानी में भिगोकर रख दीजिए। सुबह उठने के बाद त्रिफला को छानकर उस पानी को पी लीजिए। इससे कुछ ही दिनों में कब्‍ज की शिकायत दूर हो जाएगी। या त्रिफला चूर्ण एक चम्मच के साथ दूध अथवा गर्म पानी में लेने से कब्ज दूर हो जाता है।

अजवायन: अजवायन 10 ग्राम, त्रिफला 10 ग्राम और सेंधानमक 10 ग्राम को बराबर मात्रा में लेकर कूटकर चूर्ण बना लें। रोजाना 3 से 5 ग्राम इस चूर्ण को हल्के गर्म पानी के साथ सेवन करने से काफी पुरानी कब्ज समाप्त हो जाती है। इसके अलावा सुबह उठने के बाद नींबू के रस को काला नमक मिलाकर पानी के साथ सेवन कीजिए। इससे पेट साफ होगा।

इसबगोल: इसबगोल की भूसी कब्‍ज के लिए रामबाण दवा है। इसके नियमित सेवन से कब्‍ज की समस्‍या जड़ से दूर हो जाती है। इसके लिए आप दूध या पानी के साथ रात में सोते वक्‍त इसाबेल की भूसी लेने से कब्‍ज समाप्‍त होता है।

किशमिश: किशमिश में कब्ज निवारण गुण होते हैं। सूखे अंगूर याने किशमिश पानी में 3 घन्टे भिगों दें फिर इसके बाद किशमिश को पानी से निकालकर खा लीजिए। इसे खाने से आंतों को ताकत मिलती है और दस्त आसानी से आती है। इससे कब्‍ज की शिकायत दूर होती है।

हर रोज रात में हर्रई को पीसकर बारीक चूर्ण बना लीजिए, इस चूर्ण को कुनकुने पानी के साथ पीजिए। कब्‍ज दूर होगा और पेट में गैस बनना बंद हो जाएगा। रात को सोते वक्‍त अरंडी के तेल को हल्‍के गरम दूध में मिलाकर पीजिए। इससे पेट साफ होगा। अमरूद और पपीता कब्‍ज के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। अमरूद और पपीता को किसी भी समय खाया जा सकता है। पालक का रस पीने से कब्‍ज की शिकायत दूर होती है, खाने में भी पालक की सब्‍जी का प्रयोग करना चाहिए। अंजीर के फल को रात भर पानी में डालकर गलाइए, इसके बाद सुबह उठकर इस फल को खाने से कब्‍ज की शिकायत समाप्‍त होती है।

कब्‍ज की समस्‍या से बचने के लिए नियमित रूप से व्‍यायाम और योगा करना चाहिए। गरिष्‍ठ भोजन करने से बचें। इन नुस्‍खों को अपनाने के बाद भी अगर पेट की बीमारी ठीक नही होती तो चिकित्‍सक से संपर्क अवश्‍य कीजिए। सामान्य रूप से मल का निष्कासन ना होना तथा आंतों में मल का रूकना कब्ज कहलाता है॰

अनियमित दिनचर्या और खान-पान के कारण कब्‍ज और पेट गैस की समस्‍या आम बीमारी की तरह हो गई है। कब्‍ज रोगियों में गैस व पेट फूलने की शिकायत भी देखने को मिलती है। लोग कहीं भी और कुछ भी खा लेते हैं। खाने के बाद बैठे रहना, डिनर के बाद तुरंत सो जाना ऐसी आदतें हैं जिनके कारण कब्‍ज की शिकायत शुरू होती है। पेट में गैस बनने की बीमारी ज्‍यादातर बुजुर्गों में देखी जाती है लेकिन यह किसी को भी और किसी भी उम्र में हो सकती है।

सुबह उठने के बाद नींबू के रस को काला नमक मिलाकर पानी के साथ सेवन कीजिए। इससे पेट साफ होगा।   20 ग्राम त्रिफला रात को एक लिटर पानी में भिगोकर रख दीजिए। सुबह उठने के बाद त्रिफला को छानकर उस पानी को पी लीजिए। इससे कुछ ही दिनों में कब्‍ज की शिकायत दूर हो जाएगी।कब्‍ज के लिए शहद बहुत फायदेमंद है। रात को सोने से पहले एक चम्‍मच शहद को एक गिलास पानी के साथ मिलाकर नियमित रूप से पीने से कब्‍ज दूर हो जाता है।

हर रोज रात में हर्र को पीसकर बारीक चूर्ण बना लीजिए, इस चूर्ण को कुनकुने पानी के साथ पीजिए। कब्‍ज दूर होगा और पेट में गैस बनना बंद हो जाएगा।

रात को सोते वक्‍त अरंडी के तेल को हल्‍के गरम दूध में मिलाकर पीजिए। इससे पेट साफ होगा। इसबगोल की भूसी कब्‍ज के लिए रामबाण दवा है। दूध या पानी के साथ रात में सोते वक्‍त इसबगोल की भूसी लेने से कब्‍ज समाप्‍त होता है। पका हुआ अमरूद और पपीता कब्‍ज के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। अमरूद और पपीता को किसी भी समय खाया जा सकता है। किशमिश को पानी में कुछ देर तक डालकर गलाइए, इसके बाद किशमिश को पानी से निकालकर खा लीजिए। इससे कब्‍ज की शिकायत दूर होती है। पालक का रस पीने से कब्‍ज की शिकायत दूर होती है, खाने में भी पालक की सब्‍जी का प्रयोग करना चाहिए।

अंजीर के फल को रात भर पानी में डालकर गलाइए, इसके बाद सुबह उठकर इस फल को खाने से कब्‍ज की शिकायत समाप्‍त होती है। मुनक्‍का में कब्‍ज नष्‍ट करने के तत्‍व मौजूद होते हैं। 6-7 मुनक्‍का रोज रात को सोने से पहले खाने से कब्‍ज समाप्‍त होती है। कब्‍ज की समस्‍या से बचने के लिए नियमित रूप से व्‍यायाम और योगा करना चाहिए। गरिष्‍ठ भोजन करने से बचें।

इन नुस्‍खों को प्रयोग करने से पहले अपने चिकित्सक की सलाह अवश्य लें। अपनाने के बाद भी अगर पेट की बीमारी ठीक नही होती तो चिकित्‍सक से संपर्क अवश्‍य कीजिए।

 

 

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