"धनतेरस" पर अवश्य ध्यान रखें इन बातों का...

“धनतेरस” पर अवश्य ध्यान रखें इन बातों का…

  •  पूजा का शुभ मुहूर्त
 पूजा का शुभ मुहूर्त

पूजा का शुभ मुहूर्त

धनतेरस की तिथि और शुभ मुहूर्त : धनतेरस की तिथि: 25 अक्‍टूबर 2019 त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 25 अक्‍टूबर 2019 को शाम 07 बजकर 08 मिनट से त्रयोदशी तिथि समाप्‍त: 26 अक्‍टूबर 2019 को दोपहर 03 बजकर 36 मिनट, धनतेरस पूजा मुहूर्त: 25 अक्‍टूबर 2019 को शाम 07 बजकर 08 मिनट से रात 08 बजकर 13 मिनट तक अवधि: 01 घंटे 05 मिनट

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान धन्वंतरि विष्णु के अंशावतार माने जाते हैं। धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा के साथ-साथ यमराज की पूजा भी की जाती है। कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। इस दिन लोग बर्तन और सोना-चांदी से बनी चीजें खरीदते हैं। जिसकी दिवाली वाले दिन पूजा की जाती है। इस दिन इन समान की खरीदारी करना शुभ माना जाता है। दिवाली से दो दिन पहले आने वाले इस पर्व का खास महत्व है। धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा के साथ-साथ यमराज की पूजा भी की जाती है। साल 2019 में धनतेरस 25 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। जानिए धनतेरस का महत्व और पौराणिक कथा…

क्यों मनाया जाता है धनतेरस पर्व: शास्त्रों के अनुसार समुद्र मंथन के समय कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में अमृत से भरा कलश लेकर प्रकट हुए थे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान धन्वंतरि विष्णु के अंशावतार माने जाते हैं। संसार में चिकित्सा विज्ञान के विस्तार और प्रसार के लिए ही भगवान विष्णु ने ये अवतार लिया था। भगवान धन्वंतरि के प्रकट होने के उपलक्ष्य में ही धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है।

"धनतेरस" पर अवश्य ध्यान रखें इन बातों का...

“धनतेरस” पर अवश्य ध्यान रखें इन बातों का…

25 अक्टूबर यानी धनतेरस कार्तिक कृष्ण पक्ष त्रयोदशी में शुभ लग्न सुबह 7:08 मिनट से शुरू होकर 26 अक्टूबर को दोपहर में 3:46 बजे तक है। इस कारण इस बीच की गयी खरीदारी शुभ और फलदायी होगी। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा के लिये श्रेष्ठ मुहूर्त प्रदोष काल एवं वृष लग्न शाम 5:39 बजे से 8:47 बजे तक रहेगा।

धनतेरस पर करें ये उपाय, मिलेगा लाभ : धनतेरस के दिन धन्वंतरि का पूजन करना चाहिए. साथ ही नवीन झाडू एवं सूपड़ा खरीदकर भी उनका पूजन करना चाहिए। इस दिन सायंकाल दीपक प्रज्वलित कर घर, दुकान आदि को श्रृंगारित करना फलदायी साबित होता है। इस दिन लोग मंदिर, गोशाला, नदी के घाट, कुओं, तालाब, बगीचों में भी दीपक लगाएं।

धनतेरस के दिन आरोग्‍य के देवता और आयुर्वेद के जनक भगवान धन्‍वंतरि की पूजा की जाती है। मान्‍यता है कि इस दिन धन्‍वंतरि की पूजा करने से आरोग्‍य और दीर्घायु प्राप्‍त होती है। इस दिन भगवान धन्‍वंतरी की प्रतिमा को धूप और दीपक दिखाएं। साथ ही फूल अर्पित कर सच्‍चे मन से पूजा करें।

धनतेरस पर न करें इनकी खरीदारी: धनतरेस के दिन लोहा, कांच और एल्युमिनियम के बर्तन नहीं खरीदना चाहिए। इससे आपके ग्रहों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। जब भी कोई बर्तन खरीद कर लाएं तो उसमें अन्न आदि रखकर लाएं। खाली बर्तन घर में नहीं लाना चाहिए। इसके अलावा आपको धनतेरस के दिन काले रंग से बचना चाहिए। यह अशुभ माना जाता है।

धनतेरस पर पूजा सामग्री – सबसे पहले एक लाल रंग का आसन बिछाएं और इसके बीचों बीच मुट्ठी भर अनाज रखें।- अनाज के ऊपर स्‍वर्ण, चांदी, तांबे या मिट्टी का कलश रखें. इस कलश में तीन चौथाई पानी भरें और थोड़ा गंगाजल मिलाएं।- अब कलश में सुपारी, फूल, सिक्‍का और अक्षत डालें. इसके बाद इसमें आम के पांच पत्ते लगाएं।- अब पत्तों के ऊपर धान से भरा हुआ किसी धातु का बर्तन रखें।- धान पर हल्‍दी से कमल का फूल बनाएं और उसके ऊपर मां लक्ष्‍मी की प्रतिमा रखें. साथ ही कुछ सिक्‍के भी रखें।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान धन्वंतरि विष्णु के अंशावतार

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान धन्वंतरि विष्णु के अंशावतार

धनतेरस के दिन सुबह जल्दी उठें और अपने सभी नित्य कामों से निवृत्त होकर स्नान कर लें। इसके बाद धन्वंतरि की मूर्ति या तस्वीर को पूजा स्थल में स्थापित करें। इस बात का ध्यान रहें कि भगवान की मूर्ति ऐसी जगह स्थापित करें जिससे आपका मुख पूर्व की तरह रहे। इसके बाद हाथ में फूल और अक्षत लेकर धन्वंतरि का आवाहन करें-

  • सत्यं च येन निरतं रोगं विधूतं,अन्वेषित च सविधिं आरोग्यमस्य।गूढं निगूढं औषध्यरूपम्, धन्वन्तरिं च सततं प्रणमामि नित्यं।।

इसके बाद चावल और आचमन के लिए जल चढाएं। इसके बाद भगवान को गंध, अबीर, गुलाल पुष्प, रोली, आदि लगाएं। साथ ही चांदी या फिर किसी भी तरह के बर्तन में खीर का भोग लगाएं। भोग के बाद फिर आचमन करें। फिर उनके मुख की शुद्धि के लिए पान, लौंग, सुपारी चढ़ाएं। भगवान धन्वंतरि को वस्त्र अर्पित करें। साथ ही शंखपुष्पी, तुलसी, ब्राह्मी आदि पूजनीय औषधियां भी भगवान धन्वंतरि को अर्पित करें। इसके बाद रोग नाश की कामना के लिए इस मंत्र का जाप करें-ऊं रं रूद्र रोग नाशाय धनवंतर्ये फट्।।इसके बाद भगवान धन्वंतरि को दक्षिणा और श्रीफल चढ़ाएं। और सबसे बाद में भगवान की कपूर से आरती करें।

कुछ महत्वपूर्ण बातें : धनतेरस के दिन मृत्‍यु के देवता यमराज की पूजा भी की जाती है। इस दिन संध्‍या के समय घर के मुख्‍य दरवाजे के दोनों ओर अनाज के ढेर पर मिट्टी का बड़ा दीपक रखकर उसे जलाएं। दीपक का मुंह दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए। दीपक जलाते समय इस मंत्र का जाप करें: मृत्‍युना दंडपाशाभ्‍यां कालेन श्‍याम्‍या सह।त्रयोदश्‍यां दीप दानात सूर्यज प्रीयतां मम।।

धनतेरस का पर्व हर साल दीपावली से दो दिन पहले मनाया जाता है। हिन्‍दू कैलेंडर के मुताबिक कार्तिक मास की तेरस यानी कि 13वें दिन धनतेरस मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार यह पर्व हर साल अक्‍टूबर या नवंबर महीने में आता है। इस बार धनतेरस 25 अक्‍टूबर को है।

सुख समृद्धि के लिए करें इस मंत्र का जाप : गृहस्थों को इसी अवधि के मध्य ‘ॐ नमो भगवते धन्वंतराय विष्णुरूपाय नमो नमः। मंत्र से षोडशोपचार विधि द्वारा पूजन अर्चन करना चाहिए। धनतेरस के दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा होती है और शाम के समय घर के मुख्य दरवाजे के दोनों तरफ दीपक जलाया जाता है।

धनतेरस के दिन इन चीजों की करें खरीदारी : धनतेरस पर सोना,चांदी, पीतल, स्टील से बनी चीजें खरीदना शुभ रहता है। इन चीजों को खरीदने से मां लक्ष्मी की कृपा मिलती है। धनतेरस पर झाड़ू खरीदने की प्रथा है ऐसा माना जाता है झाड़ू मां लक्ष्मी को बहुत ही प्रिय होती है।

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