हर वर्ष एक ऊँची उड़ान, एसजेवीएन के अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते कदम..

हर वर्ष एक ऊँची उड़ान, एसजेवीएन के अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते कदम..

  • सतलुज जल विद्युत निगम का 2023 तक 5,000 मैगावाट, 2030 तक 12,000 मैगावाट व 2040 तक 25,000 मैगावाट विद्युत उत्पादन हासिल करने का लक्ष्य : मुख्य प्रबंध निदेशक नंद लाल शर्मा

शिमला: हिमाचल की सबसे बड़ी विद्युत परियोजना संचालित करने वाली सतलुज जल विद्युत निगम ने 2023 तक 5,000 मैगावाट, 2030 तक 12,000 मैगावाट व 2040 तक 25,000 मैगावाट विद्युत उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। वर्तमान में कंपनी 86 किलोमीटर लंबी एक ट्रांसमिशन लाइन के अलावा 2015.2 मैगावाट विद्युत उत्पादन कर रहा है जबकि 2880 मैगावाट निर्माणाधीन है। एसजेवीएन में भारत सरकार का 61.15 और हिमाचल सरकार का शेयर 26.85 फीसदी है शेष 12 फीसदी शेयर पब्लिक के पास है। एसजेवीएन के मुख्य प्रबंध निदेशक नंद लाल शर्मा ने आज शिमला में प्रेसवार्ता के दौरान जानकारी देते हुए बताया कि कंपनी सबसे बड़ी 1500 मैगावाट की नाथपा झाकड़ी जलविद्युत परियोजना भी चला रही है। इसके अलावा 4 अन्य परियोजनाएं चला रही है।

एसजेवीएन के सफल कार्य के बाद कंपनी ने हाल ही में 7 नई परियोजनाओं के एमओयू हिमाचल सरकार के साथ हस्ताक्षरित किए है। एसजेवीएन की कुल पूंजी 3929.80 करोड़ रुपए है जबकि अधिकृत पूंजी 7000 करोड़ रुपए है। 2018-19 एसजेवीएन का कुल राजस्व 2908.99 रहा, जिसमें कर पश्चात लाभ 1364.29 रहा जबकि शुद्ध लाभ 844.91 अर्जित किया गया। एसजेवीएन ने अपने शेयरधारकों को 6888.47 करोड़ रुपए का लाभांश अदा किया। भारत सरकार को 4413.71 करोड़ रुपए का भुगतान जबकि हिमाचल सरकार को 1711.88 करोड़ भुगतान किया, जिसमें पब्लिक को 562.88 करोड़ का भुगतान भी शामिल है। कंपनी ने पिछले वित्तिय वर्ष के मुकाबले 12 फीसदी ज्यादा लाभ अर्जित किया है।

एसजेवीएन

एसजेवीएन

नंद लाल शर्मा ने बताया कि पिछले वर्ष नदियों में पानी में कमी के बावजूद 95 से 98 फीसदी तक विद्युत उत्पादन किया। 2019 में 9100 मिलियन यूनिट के लक्ष्य में से 7355 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन कर लिया है। इस मर्तबा नदियों में पानी भी अच्छा है तो कंपनी लक्ष्य से ज्यादा उत्पादन करने की उम्मीद कर रही है। बरसात की वजह से गाद आने से इस मर्तबा अढ़ाई दिन प्लांट बंद रहा है। इसके अलावा पहले मुरम्मत के लिए 22 दिन लगते थे लेकिन अब 10 दिन लग रहे हैं इसलिए भी उत्पादन बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि एसजेवीएन को चुनौतिपूर्ण हिमालयी भू-गर्भीय परिस्थितियों में वृहद जलविद्युत परियोजनाओं के निष्‍पादन में गहन अनुभव है तथा एसजेवीएन की 11238.78 करोड़ रुपए (31/03/2019 को) की वर्तमान नेटवर्थ के साथ एसजेवीएन के पास नई परियेाजनाओं के विकास के लिए इक्विटी भाग के वित्‍त पोषणार्थ आवश्‍यक वित्‍तीय सामर्थ्‍य है। अपनी अब तक की यात्रा में एसजेवीएन न केवल अत्‍याधुनिक प्रौद्योगिकी से संपन्‍न तथा चुनौतिपूर्ण हिमालयी भूगर्भीय परिस्थितियों से निपटने का अनुभव है अपितु किसी भी आकार की जलविद्युत परियोजनाओं की अवधारणा, ईष्‍टतमीकरण तथा निर्माण के लिए आवश्‍यक ज्ञान और क्षमता विकसित कर चुका है। कंपनी के विस्‍तार के अपने लक्ष्‍य में एसजेवीएन ने निर्माणार्थ नई परियोजनाओं में प्रवेश किया है तथा अपने आधार का विस्‍तार हिमाचल प्रदेश राज्‍य से अखिल भारतीय किया है और अपनी उपस्थिति विदेशों में भी दर्ज की है। वर्तमान में एसजेवीएन विद्युत परियोजनाओं के दोहन की प्रक्रिया में है, जो निर्माण की विभिन्‍न अवस्‍थाओं में है, इन परियोजनाओं में बारह जलविद्युत परियेाजनाएं तथा एक ताप विद्युत परियोजना शामिल है जिनके पूरा होने पर 5134 मेगावाट की अतिरिक्‍त क्षमता की वृद्धि‍ होगी।

उन्होंने कहा कि एसजेवीएन अपने उद्देश्‍यों को व्‍यावसायिकता, जबावदेही, सततशीलता, सर्वोत्‍कृषटता, नवोन्‍वेषता तथा विश्‍वास की उन मुख्‍य धारणाओं के जरिए हासिल करने में यकीन रखता है जिनमें हम हर दिन जीते हैं और जो हमारे जीवन का अभिन्न अंग है।

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