राज्य मंत्री आर.के. सिंह ने किया नेपाल में एसजेवीएन की 900 मेगावाट अरुण-3 जल विद्युत परियोजना का दौरा

राज्य मंत्री आर.के. सिंह ने किया नेपाल में एसजेवीएन की 900 मेगावाट अरुण-3 जल विद्युत परियोजना का दौरा

  • एसजेवीएन का 2023 तक 5000 मेगावाट कंपनी बनने का लक्ष्य

रीना ठाकुर/शिमला: भारत सरकार के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) (विद्युत, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा) एवं राज्य मंत्री (कौशल विकास एवं उद्यमिता) आर.के. सिंह ने आज नेपाल के काठमांडू में तीसरे नेपाल इंफ्रास्ट्रक्चर शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। राज्य मंत्री आर.के. सिंह ने 900 मेगावाट की अरुण-3 जल विद्युत परियोजना का भी निरीक्षण किया। परियोजना को नेपाल में अरुण नदी पर एसजेवीएन द्वारा इसकी पूर्ण स्वामित्व वाली अधीनस्थ कंपनी एसजेवीएन अरुण-3 पावर डेवलपमेंट कंपनी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निष्पादित किया जा रहा है।

एसजेवीएन

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मंत्री के साथ भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव (विद्युत) एस. के. जी. रहाटे, हिमाचल प्रदेश सरकार के विशेष सचिव (विद्युत) प्रबोध सक्सेना, मिशन के उप प्रमुख (भारतीय मिशन) डॉ. अजय कुमार, एसजेवीएन के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक नंदलाल शर्मा, पीजीसीआईएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक के. श्रीकांत तथा मंत्री के निजी सचिव मनोज कुमार सिंह भा.प्र.से. भी साथ थे।

इस दौरान मंत्री ने अरुण-3 जल विद्युत परियोजना के बांध स्थल पर इनटेक संकार्यों के निर्माण का उद्घाटन किया तथा पावर हाउस में सेंट्रल गुल्‍लट की खुदाई का अंतिम ब्लास्ट किया। 900 मेगावाट अरुण-3 जल विद्युत परियोजना की उत्पादन क्षमता 900 मेगावाट है तथा प्रति वर्ष 3924 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन की क्षमता है। इसके अतिरिक्त, इस परियोजना में 217 किलोमीटर लंबी 400 केवी डबल सर्किट एसोसिएटिड ट्रांसमिशन लाइन (भारत-नेपाल सीमा तक) की स्थापना भी शामिल है।

एसजेवीएन का लक्ष्य 2023 तक 5000 मेगावाट कंपनी, 2030 तक 12000 मेगावाट कंपनी तथा 2040 तक 25000 मेगावाट कंपनी बनने का है। वर्तमान में एसजेवीएन का कुल पोर्टफोलियो 6801.2 मेगावाट है जिसमें से 2015.2 मेगावाट प्रचालनाधीन है, 2880 मेगावाट निर्माणाधीन है, 528 मेगावाट निर्माणपूर्व एवं निवेश अनुमोदनाधीन है तथा 1378 मेगावाट सर्वेक्षण एवं अन्‍वेषणाधीन चरण में है। इसके अतिरिक्त नेपाल में अरुण-3 जलविद्युत परियोजना से नेपाल-भारत सीमा बथनाहा तक 217 कि.मी. लंबी 400 केवी डबल सर्किट ट्रांसमिशन लाईन भी निर्माणाधीन है।

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