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“बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” योजना को लोगों तक पहुंचाने के लिए जिला शिमला देश के 10 श्रेष्ठतम जिलों में शामिल

रीना ठाकुर/शिमला: नवीनतम जानकारी के माध्यम से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना को लोगों तक पहुंचाने के लिए किये गये उत्कृष्ठ कार्यों के लिए जिला शिमला को देश के 10 श्रेष्ठतम जिलों में शामिल किया गया है, जो कि प्रदेश के साथ-साथ जिला के लिए गौरव की बात है।

उपायुक्त शिमला अमित कश्यप ने बताया कि 6 सितम्बरको अशोका होटल चाणक्यपुरी नई दिल्ली में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी द्वारा ये पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।  उपायुक्त ने बताया कि ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना के तहत देश के लगभग 600 जिलों में से चयनित 10 जिलों में जिला शिमला को इसके तहत जागरूकता से संबंधित अभियान एवं गतिविधियों के बेहतर क्रियान्वयन के लिए चयनित किया गया है।                                                  

उन्होंने बताया कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के तहत जिला में 96 रैलियां आयोजित की गई, जिसमें महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, शिक्षा विभाग के साथ-साथ विभिन्न महिला मंडल, स्वयं सहायता समूह, आंगनबाड़ी तथा आशा कार्यकर्ताओं व विभिन्न स्तरों पर पंचायती राज संस्थाओं के सदस्य तथा स्कूली बच्चों द्वारा भाग लेकर अभियान को व्यापकता प्रदान की गई। 1565 बालिका दिवस, 1024 बेटी जन्मोत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें अभिभावकों को सम्मानित किया गया। 1016 बालिकाओं के अभिभावकों को सम्मानित किया गया। जिला में एक बूटा बेटी के नाम कार्यक्रम के तहत 242 पौधे रोपित किये गये। 955 मातृ जन्मोत्सव, 51 किशोरी मेला आयोजित किये गये। विभिन्न स्कूलों व काॅलेजों में 05 वाद-विवाद व चित्रकला प्रतियोगिता, नवजात बच्चियों को अन्न प्राशन अनुष्ठान कर अन्न खिलाया गया। इसके अतिरिक्त 71 सफल महिलाओं को चिन्हित किया गया, जबकि 23 सफल महिलाओं को सम्मानित भी किया गया।

499 शपथ कार्यक्रमों के माध्यम से हजारों लोगों की सहभागिता इस कार्यक्रम में सुनिश्चित की गई। इस दौरान जानकारी व जागरूकता को प्रभावी बनाने के लिए 233 ग्रामीण टास्क फोर्सों की बैठकें और 58 हस्ताक्षर अभियान कार्यक्रमों का आयोजन जिला में किया गया। इसके अतिरिक्त ऐतिहासिक रिज मैदान पर महानाटी आयोजित की गई, जिसमें लगभग 650 से अधिक महिलाओं ने भाग लेकर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश प्रेषित करते हुए सामुहिक तौर पर पारंपरिक नाटी प्रस्तुत की। 37 नुक्कड़-नाटक तथा फोक मीडिया शो के माध्यम से जिला के प्रत्येक खंड में लोगों को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के प्रति जागृति प्रदान की गई।

अनन्या योजना के तहत 180 कार्यशालाएं विभिन्न स्कूलों व काॅलेजों में आयोजित कर महिलाओं व बच्चियों को महावारी के प्रति जागरूकता प्रदान की गई। इस संबंध में 2438 वार्ताओं के माध्यम से समाज में इस विषय के प्रति फैले मिथक और अवधारणाओं के प्रति जागरूक किया गया। महिलाओं के स्वास्थ्य जांच के तहत 5627 एचबी टैस्ट जांच शिविर आयोजित किये गये। 16619 किशोरियों, 4553 महिलाओं अनिमिया की जांच की गई। 137 पोषाहार जागरूकता शिविर आयोजित कर पारंपरिक पोषक आहार की विधियां बताई गई। 5339 गर्भवती महिलाओं को चिन्हित व पंजीकृत किया गया, बालिका जन्म से संबंधित मार्गदर्शन और सहयोग के लिए अनन्य सारर्थियों द्वारा 394 बैठकों का आयोजन किया गया।

जिला की 08 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाओं में सैनिटरी नैपकिन वैंडिंग मशीन तथा इन्सिनिरेटर स्थापित किये गये। महिला सुरक्षा के प्रति जागरूकता प्रदान करती लघु वृत चित्र प्रत्येक जिला में वितरित कर जागरूकता व जानकारी दी गई।

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