"शिमला" के दर्शनीय स्थल

“शिमला” के दर्शनीय स्थल….

  • “मालरोड़ शिमला”  लंदन के मालरोड़ से कम नहीं

शिमला जहाँ खूबसूरती हरी वादियों से जाना जाता है वहीं इसकी गोद में शिमला की कई अनमोल धरोहरें व विरासतों की खुबसूरती भी “शिमला” के दर्शनीय

शिमला मॉल रोड

शिमला मॉल रोड

स्थलों के रूप में जानी जाती है। जिसे देखने के लिए न केवल पड़ोसी राज्य के लोग यहाँ का रुख करते हैं अपितु विदेशों से भी काफी पर्यटक पहुँचते हैं। आज हम शिमला के ऐसे ही कुछ दर्शनीय स्थलों की आपको जानकारी देने जा रहे हैं ।  

चलिए पहले बात करते हैं शिमला का “मालरोड़” की, जो लंदन के मालरोड़ से कम नहीं। बाहरी राज्यों व विदेशों से आने वाले पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र विशेष रूप से शिमला का “मालरोड़” रहता ही रहता है। कहा जाता है कि मॉलरोड़ की तुलना लंदन के मालरोड़ से की जाती है। यह मालरोड़ सैलानियों एवं पर्यटक यात्रियों से खचाखच भरा रहता है। यहां कई बड़े बड़े शो रूम, क्लब, थिएटर, रेस्टोरेंट और बार हैं। नए-नए फैशन की चीजें खरीदने के लिए कई दुकानें हैं, यहां आर्मी और नेवी के स्टोर भी हैं। मालरोड से नीचे उतराई पर मिडल और लोअर बाजार हैं। यहां जाने के लिए मालरोड पर सीढ़ियां भी बनी हुई हैं। कार्टरोड से लिफ्ट द्वारा भी इन बाजारों में जाया जा सकता है।

  • उतरी भारत का पुराना चर्च “क्राइस्ट चर्च”
  • रिज पर उतरी भारत का पुराना चर्च है। चर्च की सुन्दरता इसके रंगीन शीशों से नजर आती है।

    "शिमला" के दर्शनीय स्थल

    “शिमला” के दर्शनीय स्थल

  • जाखू हिल : हनुमान जी का मन्दिर

शिमला की जाखू पहाड़ी लगभग 8000 फुट की ऊंचाई पर है। इस पहाड़ी से शिमला का सारा दृश्य देखा जा सकता है, इस पहाड़ी पर हनुमान जी का मन्दिर है, सैलानी एवं पर्यटक लोग इस मंदिर के दर्शन करते हैं। सर्दियों में इलाके की पहाड़ियां और शिमला में गिरी बर्फ को देखने के लिए देश तथा विदेशों के यात्री आते हैं। दो मील के रास्ते में बंदर खाने-पीने की चीजों की ताक में रहते हैं जो यात्रियों की जेबें भी टटोल लेते हैं।

  • म्यूजियम (हिमाचल राज्य संग्रहालय)
  • राज्य की पहाड़ी कलाकृतियों का भण्डार

यहां हिमाचल राज्य की पहाड़ी कलाकृतियों का भण्डार है। जो इस म्यूजियम में देखा जा सकता है। यह म्यूजियम 1974 ई. में बनाया गया था। यहां दो हजार के करीब कलाकृतियां संभाली हुई हैं। म्यूजियम हफ्ते में पांच दिन मंगलवार से शनिवार तक खुला रहता है।

  • उच्च साहित्य संस्थान अध्ययन

1884-88 ई. में बनवाई गई थी वाईस रीगल लॉज इमारत

वाईस रीगल लॉज इमारत 1884-88 ई. में बनवाई गई थी। इस इमारत में उपरोक्त संस्थान उपलब्ध है। इन इमारत के बाग और सुंदर वृक्ष इनकी सुंदरता में चार चांद लगा रहे हैं। यहां विभिन्न देशों से आए विद्वानों के सम्मेलन होते रहते हैं।

  • अनाडेल ग्राउंड : हेलीकॉप्टर की सेवा उपलब्ध

    अनाडेल ग्राउंड :

    अनाडेल ग्राउंड :

यह मैदान उतना ही नीचा है जितनी कि ऊंची जाखू की चोटी है। यह समुद्र तल से 1864 मीटर ऊंचाई पर स्थित है। यह रिज मैदान से सवा दो किलोमीटर की दूरी पर है। इस मैदान से हेलीकॉप्टर की सेवा उपलब्ध है। यह मैदान पोलो, क्रिकेट आदि खेलने के लिए प्रयोग में लाया जाता है।

  • छोटा शिमला

छोटा शिमला में हिमाचल सरकार के प्रमुख विभाग हैं। यहां राजभवन (सचिवालय) स्थित है। राजनीति की सारी सरगर्मियां यहां भी देखने को मिलती हैं। सारा क्षेत्र पहाड़ी और सुंदर वृक्षों से घिरा हुआ है।

  • समरहिल

समरहिल समुद्र तल से 1982 मीटर (6200 फुट) की ऊंचाई पर है। यहां राजकुमारी अमृत कौर जो महाराजा दलीप सिंह की लडक़ी थी, उसका रिहाइशी महल था। इस जगह कुछ दिन महात्मा गांधी जी रहे थे। समरहिल में ही हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी है। जिसमें लगभग 30 विभाग चल रहे हैं।

  • चाडविकफॉल

रिज से उत्तरी दिशा में सात किलोमीटर की दूरी पर पहाडिय़ों पर चाडविकफॉल है, जहां पर 220 फुट की ऊंचाई से पानी नीचे गिरता है। इसका नजारा देखने योगय होता है, यह फॉल मानसून के दिनों में देखने योगय होता है। इसकी ऊंचाई समुद्र तल से लगभग 5200 फुट है।

  • प्रोस्पैक्ट हिल

शिमला से बिलासपुर मार्ग पर स्थित प्रोस्पैक्ट हिल है। सह अति सुंदर एवं पिकनिक स्थल है। इसकी चोटी से शिमला समरहिल और सोलन की पहाडिय़ों का आनंद लिया जा सकता है। इस पहाड़ी पर कामना देवी का मंदिर है। यह चोटी समुद्र तल से 2175 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

  • तारादेवी मंदिर- शिमला से 11 किलोमीटर दूर तारादेवी का मंदिर है। यह मंदिर पहाड़ की चोटी पर बना हुआ है। तीर्थ-यात्री तारादेवी मंदिर के दर्शनों के लिए प्रतिदिन आते रहते हैं और अपनी श्रद्धा के फूल भेंट करते हैं। इन पहाड़ी पर मिलट्री का डेरी फार्म भी है। यहां स्काउट्स का मुख्य केन्द्र है।
  • संजौली : संजौली का स्थान दुर्गा देवी के मंदिर और बौद्ध मठ की मोनेष्ट्री के कारण बहुत प्रसिद्ध है। यह स्थान रिज से सात किलोमीटर की दूरी पर है। यह शिमला की एकमात्र ऐसी जगह है जहां साइकिल से आया जा सकता है। यह स्थान 2257 मीटर की ऊंचाई पर है। यह सम्पूर्ण क्षेत्र घने जंगलों और चीड़ के वृक्षों से घिरा हुआ है। अब यहां पर बहुत आरामदेय होटल हैं। यहां आकर यात्री प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लेते हैं।

    संजौली

    संजौली

मशोबरा और नालदेहरा के प्राकृतिक नज़ारे:  मशोबरा में फलों के अनुसंधान का मुख्य केन्द्र है और यह केन्द्र उत्तर भारत का सबसे बड़ा केन्द्र है। मशोबरा घाटी चीड़, ओक, देवदार के वृक्षों से घिरी हुई है। शिमला से 22 किलोमीटर दूर नालदेहरा नाम की जगह पर गोल्फ खेलने का बड़ा मैदान है। मशोबरा घाटी को हिमाचल की सुंदरता का खजाना कहा जा सकता है।

कुफरी : शिमला से 16 किलोमीटर की दूरी पर कुफरी है जो कि शीतकालीन खेलों के लिए प्रसिद्ध है। पर्यटक अक्सर यहां आते रहते हैं। यह स्थान समुद्र तल से 2622 मीटर अथवा 8600 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां स्केटिंग की विशेष व्यवस्था है। यहां लोगों के मनोरंजन के लिए कुछ दूरी पर चिडिय़ाघर भी है। फागू घाटी को जाने के लिए यहां किराए पर घोड़े मिलते हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए बहुत सुंदर होटल, कॉफी हॉऊस और कांंफ्रेस हॉल की व्यवस्था भी है। कुफरी से फागू घाटी तक शूटिंग स्थान, स्काईरन प्वाईंट, माहेश्वरी मंदिर, गरीन घाटी, सेबों की घाटी, महाशूपीक और फागू घाटी देखने योगय स्थान हैं। फागू में पर्यटक टैलीस्कोव द्वारा सीता माता का मंदिर, बर्फानी पहाडिय़ां और दुर्गा माता का मंदिर देखते हैं। इनके अलावा टैलीस्कोव से दिखाने वाले बर्फानी चोटियों पर एक काला पत्थर दिखाते हैं और बताते हैं कि यह चीन की दीवार का बिंदु है। इनके अलावा बद्रीनाथ प्वाइंट भी दिखाते हैं।

कुफरी

कुफरी

नारकंडा: समुद्र तल से 8850 फुट की ऊंचाई पर बसा हुआ है नारकंडा। शिमला से लगभग 64 किलोमीटर दूर है। यह आलू और सेब पैदा करने वाली धरती है। नारकंडा के प्राकृतिक दृश्य, ठंडी हवा, शांत वातावरण, बर्फानी चोटियों का दृश्य और हरियाली मन को शांत कर देते हैं। यहां एचपीटीडीसी और पीडब्ल्यूडी रेस्ट-हाऊस और अन्य कई निजी होटल हैं जहां पर्यटक रह सकते हैं। ट्रैकर इस क्षेत्र में अपना ट्रैक पूरा करने का आनंद उठाते हैं। ट्रैकिंग और स्कीईंग करने के लिए माऊंटेन सुपरविज़न हाई एटीटूयूड ट्रैकिंग एण्ड स्कीईंग सेंटर, नारकण्डा से संपर्क किया जा सकता है।

स्नोडन: स्नोडन यानि IGMC प्रदेश का सबसे बड़ा अस्पताल, यह भवन सन् 1873-74 ई. को लॉर्ड रॉबर्ट ने जनरल पीटर इन्नस से खरीदा। इससे पूर्व इसमें एक डिस्पेंसरी चलाई जाती थी। लॉर्ड रॉबर्ट ने इस सम्पत्ति का बढिय़ा ढंग से विकास किया। सन् 1887 ई. को ब्रिटेन की महारानी के जयन्ती वर्ष के उपलक्ष्य पर स्नोडन के नए मनोरंजन कक्ष का उद्घाटन किया गया। सन् 1881 ई. को लॉर्ड रॉबर्ट के इंगलैंड जाने पर यह सम्पत्ति

स्नोडन:

स्नोडन:

ब्रिटिश-इण्डिया सरकार ने 79,187 रूपए में खरीदकर इसे भारत के कमाण्डर-इन-चीफ का सरकारी आवास बनाया। सन् 1881 ई. से सन् 1925 ई. तक चौदह कमाण्डर-इन-चीफ ने स्नोडन में आवास किया। सन् 1947 ई. के बाद यह सम्पत्ति राज्य सरकार को हस्तांतरित हुई। इस भवन में राज्य सरकार ने अस्पताल खोला। स्नोडन अस्पताल का नाम अब आई.जी.एम.सी. (इन्दिरा गांधी चिकित्सा अनुसन्धान केन्द्र) रखा गया।

स्ट्राबरी हिल:  यह भूसम्पदा छोटा शिमला बाजार से नीचे कुसुम्पटी मार्ग पर है। इसका अधिग्रहण सबसे पहले ब्रिटिश सैन्य अधिकारी कर्नल ताप्प ने किया जो बाद में बार्नस कोर्ट चला गया था। तदोपरांत इस स्थल को एडवर्ड बार्नस के सैन्य सचिव कर्नल चर्चिल ने विकसित करवाया। सन् 1849 ई. को कैप्टन पेनग्री ने यहां लार्ड डलहौजी के लिए आवास बनाया।

इसके पश्चात् यह भवन अनेक व्यवसायियों के हाथों क्रय-विक्रय होता रहा। आखिर स्ट्राबरी हिल को स्टेट कौंसिल कश्मीर के अध्यक्ष राजा सर दलजीत सिंह ने 1,50,000 में खरीदा। यह सम्पत्ति आजादी के बाद राज्य सरकार को हस्तांतरित की गई।

  • लेडी रीडिंग: कमला नेहरू अस्पताल शिमला का मूल नाम लेडी रीडिंग था। ब्रिटिश-इण्डिया काल में यह एक….

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