पालमपुर : सीएसआईआर-आईएचबीटी ने मनाया गया “राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस”

पालमपुर : सीएसआईआर-आईएचबीटी में मनाया गया “राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस”

  • राज्य के 3 जिलों से करीब 400 विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय प्रौद्यागिकी दिवस में लिया हिस्सा
  • प्रश्नपरिपूर्ण मस्तिष्क प्रौद्योगिक नवाचार की नीव है: डॉ. संजय कुमार

पालमपुर : सीएसआईआर- हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान, पालमपुर में आज राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाया गया। जिसमें अपनी शोध एवं विकास गतिविधियों के बारे में छात्रों को जागरुक करने के लिए इसे जनदिवस के रूप में मनाया गया। राज्य के 3 जिलों से लगभग 400 विद्यार्थियों ने इस राष्ट्रीय प्रौद्यागिकी दिवस में अपनी उपस्थिति दर्ज की। यह विद्यालय इस प्रकार हैं- केन्द्रीय विद्यालय, डलहौजी-बनीखेत एवं बकलोह जिला चम्बा, राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, जोगिन्द्रनगर जिला मंडी, जवाहर नवोदय विद्यालय, पपरोला, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, भवारना एवं चचियां। इसमें से 150 छात्र आकांक्षात्मक जिला चम्बा से थे। छात्रों में वैज्ञानिक अभिरुचि को बढ़ाने  हेतु संस्थान की विभिन्न प्रयोगशालाओं एवं परीक्षण प्रक्षेत्रों का भ्रमण करवाया। केन्द्रीय विद्यालयों के विद्यार्थियों ने जिज्ञासा कार्यक्रम के अन्तर्गत इसमें प्रतिभागिता भी आयोजित की गई।

         

राज्य के 3 जिलों से करीब 400 विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय प्रौद्यागिकी दिवस में लिया हिस्सा

राज्य के 3 जिलों से करीब 400 विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय प्रौद्यागिकी दिवस में लिया हिस्सा

       संस्थान के निदेशक डॉ. संजय कुमार ने छापालमपुर : सीएसआईआर-आईएचबीटी ने मनाया गया “राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस”त्रों में वैज्ञानिक जिज्ञासा बढ़ाने के लिए बहुत ही प्रेरणादायक संभाषण दिया। उन्होंने जनसामान्य के जीवन में उपयुक्तता लाने में प्रसिद्ध वैज्ञानिकों की महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धियों एवं योगदान पर प्रकाश डाला। इनोवेटिव प्रौद्योगिकी विकसित करने की जानकारी देते हुए उन्होंने छात्रों से सामान्य ऑबजरवेशन पर प्रश्न करने का आग्रह किया कि यह कैसे होता है?, इसे कैसे बेहतर बनाएं?, इसे प्राप्त करने का कम लागतयुक्त वैकल्पिक उपाय क्या है?, इसका वैकल्पिक अनुप्रयोग क्या है? व अगर उनमें ऐसी जिज्ञासा प्रकट होती है तो वे कुछ नयी प्रौद्योगिकी विकसित करके देश के विकास में योगदान कर सकते है।

इस अवसर पर स्कूल के छात्रों तथा अध्यापकों के लिए संस्थान की वैज्ञानिक गतिविधियों को प्रदर्शित किया गया। जिसका उदेश्य वैज्ञानिक तथा छात्रों के संपर्क और युवाओं में वैज्ञानिक प्रवृति को बढ़ावा देना था। संस्थान द्वारा विकसित उत्पादों और प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित करने के लिए एक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। उन्हें जैविक और रसायनिक विज्ञान पर व्यवहारिक ज्ञान दिया गया जिनमें उतक संवर्धन तकनीक, जैवप्रौद्योगिकी, सूक्ष्मजीव संसार, परम्परागत एवं कार्यात्मक खाद्य, जैवविविधता एवं जैवसंपदा, प्राकृतिक पादप रसायनिकी, फसलों से बचे शेष सामग्री से जैव ईंधन, नेनो सामग्री का संश्लेषण और जैविक उपयोग और कीट संसार आदि प्रमुख हैं।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ समाज और उद्योग के एकीकरण के लिए प्रौद्योगिक रचनात्मकता और वैज्ञानिक सशक्तिकरण की खोज के प्रतीक के रूप में राष्ट्र प्रत्येक वर्ष 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाता है। यह दिवस 1998 में पोखरण में सफलतापूर्वक किए गये परमाणु परीक्षण तथा विश्व का छठा परमाणु देश बनने के उपलक्ष में मनाया जाता है।

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