नौणी विवि के पोस्ट हार्वेस्ट इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी केंद्र को “सर्वश्रेष्ठ केंद्र का अवार्ड”

नौणी विवि के पोस्ट हार्वेस्ट इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी केंद्र को “सर्वश्रेष्ठ केंद्र का अवार्ड”

विश्वविद्यालय के लिए दो सप्ताह में यह दूसरा अवार्ड

सोलन : डॉ. वाईएस परमार औदयानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के पोस्ट हार्वेस्ट इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (पीएचईटी) केंद्र को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा वर्ष 201819 के लिए “सर्वश्रेष्ठ केंद्र” चुना गया है। पिछले दो सप्ताह में यह इस तरह का दूसरा अवार्ड है, जो इस यह जीत को विश्वविद्यालय के लिए और भी खास बना देता है। विश्वविद्यालय के खाद्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत पीएचईटी पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (एआईसीआरपी) का यह सोलन केंद्र आता है। इस केंद्र को भारत के 31 एआईसीआरपी केंद्रों में पहले स्थान पर आँका गया है। विश्वविद्यालय के एपिकल्चर केंद्र ने भी हाल ही में “सर्वश्रेष्ठ अनुसंधान केंद्र” का पुरस्कार जीता था। पोस्ट हार्वेस्ट इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी का केंद्र वर्ष 2004 से कार्य कर रहा है। यह केंद्र विशेष रूप से सेब, नाशपती, कीवी, मशरूम, अदरक और राज्य के कुछ कम उपयोग में लाए जाने वाले अनाज पर काम कर रहा है।

विश्वविद्यालय के लिए दो सप्ताह में यह दूसरा अवार्ड

विश्वविद्यालय के लिए दो सप्ताह में यह दूसरा अवार्ड

यह पुरस्कार हाल ही में तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय, कोयंबटूर में आयोजित पीएचईटी पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना की 34वीं वार्षिक कार्यशाला के दौरान प्रदान किया गया। देश के पीएचईटी के 31 केंद्रों के अनुसंधान इंजीनियरों और वैज्ञानिकों ने कार्यशाला में भाग लिया और अपनी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। सोलन केंद्र के तीन वैज्ञानिक, डॉ. देविना वैद्य, डॉ. मनीषा कौशल और डॉ. अनिल गुप्ता ने कार्यशाला के दौरान अपनी प्रगति रिपोर्ट, नए प्रोजेक्ट प्रस्ताव और मशीनरी/प्रक्रिया प्रोटोकॉल प्रस्तुत किए। इस केंद्र की प्रधान अन्वेषक डॉ. देविना वैद्य ने बताया कि इस पुरस्कार के लिए मूल्यांकन विभिन्न केंद्रों द्वारा पीएचईटी पर किए गए कार्यों के आधार पर किया गया जैसे कि प्रक्रिया प्रोटोकॉल का विकास, मशीनरी, विकसित प्रौद्योगिकी के पायलट परीक्षण, उद्यमिता विकास और किसानों और वैज्ञानिक समुदाय के बीच विकसित प्रौद्योगिकियों का प्रसार।

इस कार्यशाला में केन्द्रों का मूल्यांकन डॉ. के. अलागुसुंदरम, आईसीएआर के उप महानिदेशक (एग्रिकल्चर इंजीन्यरिंग), डॉ. एसएन झा, सहायक महानिदेशक आईसीएआर (एग्रिकल्चर इंजीन्यरिंग), डॉ. एस.के.त्यागी, परियोजना समन्वयक पीएचईटी, अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना ने किया। इस मूल्यांकन में डॉ. एस.एम. इलियास (पूर्व निदेशक, एनएएआरएम), डॉ. बीएस बिष्ट (पूर्व निदेशक, सीआईपीएचईटी लुधियाना) और डॉ. बी. रंगन्ना, एमेरिटस साइंटिस्ट बतौर विशेषज्ञ शामिल हुए।

 इस उपलब्धि पर वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए नौणी विवि के कुलपति डॉ. एचसी शर्मा ने कहा कि किसानों और उद्यमियों को विकसित तकनीकों के हस्तांतरण में विभाग और केंद्र काफी प्रयास कर रहा है। इस दिशा में पिछले कुछ महीनों में विभाग द्वारा विकसित पांच तकनीकों को उद्यमियों और किसानों को दिया गया है। विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक डॉ. जेएन शर्मा, औद्यानिकी महाविद्यालय के डीन डॉ. राकेश गुप्ता और अन्य संकाय ने भी वैज्ञानिकों को विश्वविद्यालय को इस अवसर पर बधाई दी।

 विश्वविद्यालय के खाद्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अंजू धीमान ने बताया कि केंद्र ने सेब, अदरक और एलोवेरा के लिए पूरी वैल्यू चैन विकसित की है। इसके अलावा सेब कोरर, सेब के बीज निकालने जैसे कई मशीनरी, सेब से पेक्टिन निष्कर्षण और आसमाटिक निर्जलीकरण के लिए पायलट प्लांट भी डिज़ाइन और विकसित किया गया है। उन्होनें बताया कि केंद्र ने बड़ी संख्या में अदरक-आधारित, मशरूम फोर्टीफाइड उत्पादों और कम उपयोग में लाए जाने वाले अनाज से मिश्रित आटे के विकास के लिए प्रक्रिया प्रोटोकॉल विकसित किए हैं।

 

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