मणिपुर में उग्रवादियों के हमले में सेना के 20 जवान शहीद, शहीदों में 7 हिमाचल के

  • मणिपुर के चंदेल जिले में उग्रवादियों के हमले में सेना के 20 जवान शहीद
  • आतंकी हमले में हिमाचल के सात जवान शहीद

इंफाल, शिमला: मणिपुर के चंदेल जिले में गुरुवार को उग्रवादियों के हमले में सेना के 20 जवान शहीद हो गए। शहीद हुए जवानों में 7 जवान हिमाचल से थे। वहीं 6 डोगरा रेजिमेंट के सुबेदार मेजर अर्जुन सिंह से प्राप्त सूचना के अनुसार प्रदेश के शहीद हुए जवानों में मंडी जिले की जोगिन्द्रनगर तहसील के सवैण गांव के हवलदार प्रकाश चंद, बिलासपुर जिले की घुमारवीं तहसील के गांव हीरापुर के हवलदार राजेश कुमार, सिरमौर जिले के संगड़ाह तहसील के गांव रसकाना के नायब अशोक कुमार, मंडी जिले के पधर तहसील के गांव मसरान के सिपाही मनोज कुमार, मंडी जिले के लड़भड़ोल तहसील के पौंट गांव के सिपाही विकास भारद्वाज और सिरमौर जिले के पांवटा साहिब तहसील के गांव मेनपुर धेबड़ा के सिपाही सोहन सिंह हैं।

यह मणिपुर में बीते 33 साल में सेना पर हुआ सबसे खतरनाक हमला है। 1982 में राज्य में इसी तरह के हमले में 20 जवान शहीद हुए थे। उस वक्त उग्रवाद चरम पर था। इसके अलावा, यह भी पहली बार हुआ है कि उग्रवादियों ने आरपीजी यानी रॉकेट लॉन्चर्स का इस्तेमाल किया। गृह मंत्रालय शुक्रवार को इस मामले में होने वाली इमरजेंसी मीटिंग में राज्य के हालात की समीक्षा करेगा। उधर, आर्मी चीफ दलबीर सिंह सुहाग शुक्रवार को इम्फाल पहुंचे। यहां उन्होंने हालात का जायजा लिया।

12 जवान हुए घायल

ताजा हमले में 12 जवान घायल हो गए। दो उग्रवादी संगठनों-उल्फा (आई) और एनएससीएन (के) ने इस हमले की साझा जिम्मेदारी ली है। हमला असम राइफल्स की टुकड़ी द्वारा कथित तौर पर एक महिला की हत्या के विरोध में बुधवार को चंदेल में बुलाए गए बंद के एक दिन बाद हुआ है। केंद्र सरकार ने इस मामले की जांच का जिम्मा नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) को सौंपा है। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बारे में ट्वीट किया, “मणिपुर में हुआ हमला बहुत दुखद है। देश के लिए अपना जीवन न्योछावर करने वाले हर एक सैनिक के आगे मैं सिर झुकाता हूं।”

दिल्‍ली में बैठक

हमले के बाद केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने दिल्‍ली में बैठक की। इस मीटिंग में राजनाथ के अलावा रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और सेना प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग शामिल हुए। बताया जा रहा है कि इसी बैठक में पूरे मामले की जांच का जिम्मा एनआईए को सौंपने का फैसला हुआ।

कौन हैं हमले की जिम्मेदारी लेने वाले दोनों संगठन?

 

  • नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (खपलांग) : यह संगठन पूर्वोत्तर के बाकी उग्रवादी गुटों के साथ मिलकर पहले भी हिंसा कर चुका है। यह नगा समुदाय की ज्यादा आबादी वाले पूर्वोत्तरी राज्यों को मिलाकर ग्रेटर नगालैंड बनाना चाहता है। इस संगठन के साथ करीब 2000 उग्रवादी जुड़े हैं। मणिपुर के चंदेल सहित पहाड़ी इलाकों में भी इस संगठन की पैठ है। इसकी केंद्र सरकार के साथ शांति वार्ता विफल हो चुकी है। अप्रैल में ही इस संगठन ने केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ संघर्ष विराम खत्म करने का फैसला किया था। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने गुरुवार को ही इस बारे में कहा कि संघर्ष विराम अचानक खत्म करने के इस संगठन के फैसले से हमें अाश्चर्य हुआ। संगठन की गतिविधियां चिंताजनक हैं, क्योंकि यह फिर हिंसक गतिविधियों और अवैध वसूली में लिप्त हो रहा है।

 

  • उल्फा (आई) : यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम का यह धड़ा सरकार से बातचीत करने का विरोधी है। इसके म्यांमार, गारो हिल्स ऑफ मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड में कैंप बताए जाते हैं। बताया जाता है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई भी इस संगठन की मदद करती है। उल्फा के बातचीत समर्थक धड़े की सरकार के साथ वार्ता हाल ही में अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी। इसके बाद से विरोधी धड़ा और सक्रिय हो गया।

कैसे हुआ हमला?

उग्रवादियों ने सुबह साढ़े आठ बजे के करीब IGAR दक्षिण इंफाल के 26वें सेक्टर की 6 डोगरा रेजिमेंट के जवानों पर घात लगाकर हमला किया। सेना के प्रवक्‍ता कर्नल रोहन आनंद ने दिल्‍ली में बताया कि 6 डोगरा रेजिमेंट की टीम चार वाहनों में सवार होकर इंफाल से 80 किमी दूर तेंगनोपाल-न्‍यू समतल रोड पर गश्‍त के लिए निकली थी। इसी दौरान पहले आईईडी से हमला किया गया। इसके बाद सैनिकों के काफिले पर जबरदस्‍त फायरिंग की गई और रॉकेट प्रॉपेल्‍ड ग्रेनेड (आरपीजी) यानी रॉकेट के जरिए हथगोले भी फेंके गए। पुलिस का कहना है कि हमले में एक उग्रवादी भी मारा गया।

मारे गए जवानों में एक जेसीओ, सात अदर्स रैंक, एक सिग्नल कॉन्स्टेबल, एक आर्मी सर्विस कोर ड्राइवर शामिल हैं। घायल जवानों को हेलिकॉप्टरों के जरिए नगालैंड पहुंचाया गया। मौके पर अतिरिक्त सुरक्षाबल भेजा गया।

 

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