" शहीदों को शत-शत नमन"......शहीद जवान जब तिरंगे में लिपटा अपने घर के आँगन पहुंचा

” शहीदों को शत-शत नमन”……शहीद जवान जब तिरंगे में लिपटा अपने घर के आँगन पहुंचा

  •  मेरी ओर से है चंद पंक्तियां श्रद्धांजलि स्वरूप उन शहीदों के लिए जो देश के लिए वीरगति को प्राप्त हुए…

“शहीद जवान जब तिरंगे में लिपटा अपने घर के आँगन पहुंचा, ताबूत में सोये बेटे से मां दरवाजे की दहलीज़ लांघकर बेसुध होते-होते बोली; मेरे लाल तू बिना बताए ऐसे कैसे आज घर पहुंचा”…।

“पिता रोते रोते बोले: बेटा मुझे काँधा देना था तुझको, तू मुझ बूढ़े अपने बाबा का काँधा लेने ऐसे कैसे घर पहुंचा”…।

“बहन रोती बिलखती भाई का जला हाथ देखकर चीखते बोली; देखो मेरा भाई देश के लिए आज शहीद हो गया…। नन्हीं बेटी पापा की जो कबसे खामोश खड़ी थी, ताबूत में सोए पापा से बोली…उठो पापा तुमको मुझसे प्यारा कैसे कोई और हो गया”…।

बेटा मुझे काँधा देना था तुझको, तू मुझ बूढ़े पिता का काँधा लेने ऐसे कैसे घर पहुंचा

बेटा मुझे काँधा देना था तुझको, तू मुझ बूढ़े पिता का काँधा लेने ऐसे कैसे घर पहुंचा

“शहीद की पत्नी होश में जब घण्टों बाद आई तो रोते-बिलखते बोली; देश का सब कर्ज तुम चुका गए, पर कैसे घर के सारे फर्ज भूला गए”….।

“भाई अपने शहीद भाई से आंख से आसूं पोंछते बोला; तू छोटा होकर भी मेरे भाई बड़ा हो गया, मैं अकेला और पूरा देश देख तेरे साथ खड़ा हो गया”…।
“मासूम बेटे से जब शहीद पिता की चिता को आग दिलाई, नन्हा बोला मेरे पापा को क्यों मुझसे जला रहे हो, वो सोकर उठ जाएंगे अभी, हमें क्यों रुला रहे हो”…।
“शहीद की अंतिम विदाई पर साथी सैल्यूट देते बोले; व्यर्थ नहीं जाएगी मेरे दोस्त तेरी ये शहादत, जब तक हम जिंदा हैं करेंगे अपने देश की हिफाज़त”…।

  • जय हिंद, जय भारत

 

 

 

 

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