“नई राहें-नई मंजिलें” योजना से होंगे हिमाचल के अनछुए पर्यटन स्थल विकसित

“नई राहें-नई मंजिलें” योजना से होंगे हिमाचल के अनछुए पर्यटन स्थल विकसित

  • जंजैहली क्षेत्र में 16 करोड़ 70 लाख रुपए की लागत से विकसित हो रहा पर्यटन ढांचा

मंडी : हिमाचल प्रदेश को कुदरत ने दिल खोलकर मनोहारी वादियों से नवाजा है। यहां के प्राकृतिक सौंदर्य को बनाए रखने और इसके माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वर्तमान प्रदेश सरकार ने कई नई योजनाएं प्रारंभ की हैं। नई मंजिलें नई राहें योजना इन्हीं में से एक है जो प्रदेश के अनछुए पर्यटन स्थलों तक सैलानियों को आकर्षित करने में कारगर सिद्ध हो रही है। हिमाचल में पर्यटन एक प्रमुख उद्योग है जो विभिन्न हितधारकों को आजीविका प्रदान कर उनका आर्थिक उत्थान सुनिश्चित करता है। प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद में पर्यटन क्षेत्र का योगदान लगभग 6.6 प्रतिशत है। राज्य सरकार का उद्देश्य दीर्घकालिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करना है और इसमें पारिस्थितिकी और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना पर्यटन से जुड़े बुनियादी ढांचे को विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। पर्यटन की नई अवधारणाओं को बढ़ावा देकर रोजगार के अवसर पैदा करने पर भी विशेष बल दिया जा रहा है।

देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को प्रदेश के अनछुए मनोरम स्थलों की ओर आकर्षित करने के उद्देश्य से नई राहें-नई मंजिलें योजना प्रारम्भ की गयी है। चरणबद्ध ढंग से पूरे प्रदेश में लागू होने वाली इस योजना में 9 सर्किट (परिपथ) बनाए गए हैं। प्रथम चरण में इसमें तीन जिलों कांगड़ा, मंडी तथा शिमला के मनोहारी व अनछुए स्थल शामिल किए गए हैं। इन स्थलों में कांगड़ा जिले के बीड़-बिलिंग, मंडी के जंजैहली औऱ शिमला जिले के चांशल को विकसित किया जा रहा है और इसके लिए योजना के अंतर्गत इस वर्ष 50 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया है।

प्रदेश सरकार की इस नई पहल से मंडी जिला में भी पर्यटन व्यवसाय को एक नई दिशा व पहचान प्राप्त हो रही है। मंडी जिला की अधिकांश मनोहारी वादियां अभी पर्यटन की दृष्टि से अनछुई रही हैं और यह योजना विभिन्न चरणों में इन पर्यटक स्थलों को नई पहचान दिलाने की दिशा में सार्थक सिद्ध होगी। योजना के प्रथम चरण में शामिल जंजैहली क्षेत्र में लगभग 16 करोड़ 70 लाख रुपए की धनराशि पर्यटन विकास पर व्यय की जा रही है। इसके अंतर्गत जंजैहली क्षेत्र में ईको-पर्यटन, साहसिक पर्यटन गतिविधियां तथा ट्रैकिंग की व्यापक संभावनाओं के मद्देनजर सुविधाएं विकसित की जाएंगी। योजना के अंतर्गत वन विश्राम गृहों का सुधार भी किया जाएगा। इसके अतिरिक्त पैराग्लाईडिंग के लिए सुप्रसिद्ध कांगड़ा जिला के बीड़-बीलिंग में साहसिक पर्यटन की दृष्टि से अधोसंरचना के विकास पर इस योजना के अंतर्गत 14 करोड़ 62 लाख रुपए व्यय किए जा रहे हैं। इसी प्रकार शिमला जिला की चांशल घाटी में साहसिक खेलों विशेषतौर पर स्कीइंग इत्यादि की संभावनाएं विकसित कर इसे साहसिक पर्यटन से जोड़ने की पहल की गयी है। इन गतिविधियों पर योजना के अंतर्गत लगभग 15 करोड़ 12 लाख रुपए की राशि व्यय की जा रही है।

आंकड़ों के अनुसार हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष 128.83 लाख पर्यटक सैर-सपाटे के लिए आए, जिनमें 125.96 लाख स्वदेशी तथा दो लाख 87 हजार विदेशी पर्यटक शामिल हैं। प्रदेश सरकार की नई मंजिलें-नई राहें योजना अनछुए पर्यटन स्थलों तक और अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने में निश्चित रूप से सफल होगी और इस व्यवसाय से जुड़े उद्यमियों तथा अन्य हितधारकों की आर्थिक उन्नति में भी कारगर सिद्ध हो सकेगी।

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