शिमला: हिमकोस्ट द्वारा 3 दिवसीय हिमाचली उत्पादों की प्रदर्शनी व बिक्री शुरू

शिमला: हिमकोस्ट द्वारा 3 दिवसीय हिमाचली उत्पादों की प्रदर्शनी व बिक्री शुरू

शिमला : शिमला के इंदिरा गांधी खेल परिसर में हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पर्यावरण परिषद (हिमकोस्ट) द्वारा 3 दिवसीय हिमाचली उत्पादों की प्रदर्शनी व बिक्री का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें कांगड़ा चाय, कुल्लू शॉल, टोपी, किन्नौरी शॉल, कांगड़ा नमक, चम्बा रुमाल स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों को खूब भा रहे हैं। 
प्रदर्शनी का शुभारम्भ अतिरिक्त मुख्य सचिव पर्यावरण विज्ञान एवं तकनीकी हिमाचल प्रदेश आर.डी. धीमान ने किया। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनी आयोजित करवाने का उद्देश्य राज्य के मूल उत्पादों की बिक्री को प्रोत्साहित करने के साथ डुपलिकेसी को रोकना है। इससे जहां कृषकों की सामाजिक व आर्थिक स्थिति का उत्थान होगा, वहीं लोगों तक असली उत्पाद पहुंचाना सरकार का मकसद है। इसके अलावा इन उत्पादों को बढ़ावा देना और विपणन के लिए एक मंच प्रदान करना भी सरकार का उद्देश्य है।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने इन मूल्यवान उत्पादों के महत्व को समझते हुए, भौगोलिक संकेतों (ज्योग्राफिकल इंडिकेशन) के पंजीकरण और संरक्षण के लिए नीति अधिसूचित की है। हिमाचल प्रदेश  पेटेंट सूचना  केंद्र, हिमकोस्ट ने कुल्लू शाल, कंगड़ा चाय, किन्नौरी शाल, कंगड़ा चित्रकारी, चंबा रुमाल के लिए ज्योग्राफिकल इंडिकेशन टैग प्राप्त किया है। हिमाचल प्रदेश पेटेंट सूचना केंद्र उपरोक्त भौगोलिक संकेत (ज्योग्राफिकल इंडिकेशन) के लगभग 200 स्थानीय कारीगरों / उत्पादकों के लिए भौगोलिक संकेत अधिकृत उपयोगकर्ता प्रमाण पत्र प्राप्त करने में सफल हुआ। काला ज़ीरा, चुली ऑयल का जीआई पंजीकरण अंतिम चरण में है।

औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से, पेटेंट सूचना केंद्र, हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पर्यावरण परिषद (हिमकोस्ट)  5 से 7 जनवरी तक इंदिरा गांधी राज्य खेल परिसर शिमला में तीन दिवसीय प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (Env, Science & Technology) आर. डी. धीमान तथा औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग, भारत सरकार के निदेशक सुशील सतपुते ने इस प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। HIMCOSTE की ओर से कुणाल सत्यार्थी, सदस्य सचिव, उद्घाटन समारोह के दौरान मौजूद रहें।

प्रदर्शक हिमाचल प्रदेश के भौगोलिक संकेत (ज्योग्राफिकल इंडिकेशन ) और ग्रामीण इलाकों के स्थानीय उत्पादकों / कारीगरों के अधिकृत उपयोगकर्ता हैं। प्रदर्शनी 5 से 7 जनवरी सुबह 11.30am से शाम 8 तक जनता के लिए खुली रहेगी। इस प्रदर्शनी-सह-बिक्री का उद्देश्य राज्य के मूल उत्पादों की बिक्री को प्रोत्साहित करने के माध्यम से इन पारंपरिक उत्पादों के ग्रामीण कारीगरों / उत्पादकों / कृषकों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का उत्थान करना है जो कई शताब्दियों में विकसित हुए हैं। इसके अलावा इन उत्पादों को बढ़ावा देना और विपणन के लिए एक मंच प्रदान करना है।

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