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हिमाचल: राज्य विद्युत बोर्ड की एक वर्ष की उपलब्धियां

  • (1 जनवरी 2018 से वर्तमान तक)
  • राज्य में उपभोक्ताओं की विभिन्न श्रेणियों के लिए लगभग 41385 नये बिजली कनैक्शन किये जारी

शिमला : अतिरिक्त पूंजीगत व्यय और उदय योजना को पूरा करने के लिए हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड की उधार सीमा को 5 हजार करोड़ रूपये से 7 हजार करोड़ रूपये बढ़ाया गया। जल विद्युत उत्पादन में कमी के कारण विद्युत उपलब्धता में विशेषकर फरवरी माह से मई 2018 तक कमी के फलस्वरूप अतिरिक्त विद्युत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 200 से 300 मैगावॉट तक की अतिरिक्त बिजली का प्रबन्ध किया गया, जिसके परिणामस्वरूप राज्य में विशेष रूप से उद्योगों में कोई बिजली कटौती नहीं हुई। यह जानकारी बोर्ड लिमिटेड के संयुक्त निदेशक (लोक सम्पर्क) अनुराग पराशर ने वर्तमान सरकार के कार्यकाल के दौरान बोर्ड लिमिटेड द्वारा की गई एक वर्ष की उपलब्धियों के बारे में दी। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड द्वारा प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को सुनिश्चित विद्युत आपूर्ति की जा रही है।

राज्य में उपभोक्ताओं की विभिन्न श्रेणियों के लिए लगभग 41385 नये बिजली कनैक्शन जारी किये गये हैं। विद्युत आपूर्ति में दक्षता बढ़ाने के लिए प्रत्येक परिचालन वृत के आधार पर संचार एवं वितरण हानियों को कम करने के लिए संशोधित लक्ष्य तय किये गये थे ताकि सम्पूर्ण संचार एवं वितरण हानियों को जो 2017 के अंत में लगभग 11 प्रतिशत थीं, को मार्च 2019 के अंत तक 9 प्रतिशत लाया जा सके। दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना और आई.पी.डी.एस. योजनाओं के तहत राज्य में शेष बचे सभी जिलों के लिए कार्य अवार्ड कर दिये गये हैं और अधिकांश कार्यों को मार्च 2019 से पहले पूरा कर दिया जाएगा। 33 के.वी. के 10 विद्युत उपकेन्द्रों सहित 64 किलोमीटर सर्किट बनाये गये। जिसके परिणामस्वरूप विद्यमान नेटवर्क में 57 एम.वी.ए. क्षमता को जोड़ा गया, जिससे विद्युत वोल्टेज में सुधार हुआ है। राज्य के विभिन्न गांवों/शहरों में 405 विद्युत वितरण ट्रांसफार्मर स्थापित किए गये हैं। नई 35 किलोमीटर ईएचवी (अतिरिक्त उच्च वोल्टेज विद्युत) लाइनों को पूरा किया गया है और एक 9 किलोमीटर 66 के.वी. ई.एच.वी. (अतिरिक्त उच्च वोल्टेज विद्युत) लाईन का संवर्धन किया गया है। 220 के.वी., 200 एम.वी.ए. विद्युत उपकेन्द्र अंब-नेहरियां को पूरा किया गया और इसे शुरू किया गया। 220 के.वी. स्तर का एक ई.एच.वी. विद्युत उपकेन्द्र कोटला सवंर्धित किया गया। 122 विद्युत उपमंडलों के सैप के तहत बिलिंग डाटा को एक मानक प्लेटफॉर्म बिलिंग निवारण में स्थानान्तरित किया गया। ऑनलाईन बिलिंग भुगतान सुविधा के साथ ई-भुगतान को प्रोत्साहित करने और उपभोक्ताओं की अधिक सुविधा के लिए भारत बिल भुगतान प्रणाली, पे टीएम, नेट बैंकिंग और नैफ्ट प्रणाली को शुरू किया गया है। रूकती विद्युत गृह की 3 मशीनों को सुचारू बनाया गया। राज्य की 25 मेगावॉट तक विद्युत क्षमता की परियोजनाओं से हिमाचल प्रदेश स्टेट इलैक्ट्रीसिटी बोर्ड लिमिटेड बिजली खरीदेने सम्बन्धी निर्णय लिया गया। सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए हिमाचल सरकार की नीति को प्रोत्साहित किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप राज्य में कई सौर परियोजनाएं स्थापित की गई हैं। स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा अवधारणा को बढ़ावा देने के लिए बोर्ड द्वारा निर्णय लिया गया और तदानुसार राज्य में विक्रय की जा रही बिजली 90 प्रतिशत हरित ऊर्जा स्रोतों से है। राज्य में सभी के लिए 24×7, 365 दिन बिजली की उपलब्धता को सुनिश्चित किया गया है। लगभग 3600 लकड़ी के गले-सड़े खंभों को स्टील टयूबलर खंभों के साथ बदला गया है। केन्द्रीय संचालित “सौभाग्य योजना” के तहत 12874 विद्युत कनैक्शन जारी करने के लिए 100 प्रतिशत लक्ष्य समय से पहले ही हासिल किया गया है।

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