“मुख्यमंत्री किसान एवं खेतीहर मजद़ूर जीवन सुरक्षा योजना’’ का लाभ उठाएं किसान

चालू रबी मौसम में 7.72 लाख टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य : कृषि निदेशक डॉ. देस राज

  • अच्छी उत्पादकता प्राप्त करने के लिये अच्छी गुणवत्ता का बीज अत्यन्त आवश्यक : कृषि निदेशक डा. देस राज
  • फसल की अच्छी पैदावार के लिये खेत को खरपतवारों, कीटों एवं रोगों से मुक्त रखना अति आवश्यक
  • किसानों से आह्वान; कृषि योजनाओं का विभाग के माध्यम से लें अधिक से अधिक लाभ  

शिमला : 7.72 लाख टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है जिसमें गेंहू 6.90 लाख टन, जौ 36 हजार टन व दलहन 46 हजार टन उत्पादन का लक्ष्य है। इसके अतिरिक्त आलू 36.70 हजार टन, सब्जी 6.35 लाख टन व तिलहन 2.75 हजार टन के उत्पादन लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।

कृषि निदेशक डा. देस राज ने कहा कि प्रदेश की बढ़ती हुई जनसंख्या को भोजन उपलब्ध करवाने के लिये यह आवश्यक है कि अधिक से अधिक खाद्यान्न उत्पादन किया जाए। प्रदेश में अधिकतर किसान लघु एवं सीमान्त है, जो कृषि से पर्याप्त उत्पादन व आय अर्जित करने में अक्षम है। यदि इन्हें कृषि क्षेत्र से पर्याप्त आय हो तभी ये अपने परिवार का सही ढंग से पालन-पोषण कर सकते है तथा अर्जित पूंजी पुनः कृषि कार्यों में जैसे खाद, अच्छे बीज व कृषि यन्त्र आदि खरीदने में लगा सकते हैं। अतः विभाग द्वारा निर्धारित उत्पादन सम्बन्धी लक्ष्यों को पूरा करने के प्रयास किये जा रहे हैं।

डॉ. देस राज ने बताया कि निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए कृषि सामग्री के समुचित व व्यापक प्रबन्ध किए गये हैं, जिनके अन्तर्गत 7650 मि. टन उन्नत बीज, 30500 मि. टन रासायनिक खादें, 10 मि. टन जैविक खादें, 55 मि. टन दवाईयां व 60000 सुधरे कृषि औजार किसानों को उपलब्ध करवाये जा रहे हैं। राज्य के किसानों को उच्च गुणवत्ता की कृषि सामग्री उपलब्ध करवाने के उदेश्य से चालू रबी मौसम में 1000 खाद के नमूने, 150 पौध संरक्षण दवाईयों के नमूने, 350 बीज के नमूने लिये जायेंगे व उनकी जांच की जायेगी। इसके अतिरिक्त जांच हेतु मिट्टी के 21970 नमूने लिये जायेंगे ताकि किसान परीक्षण के आधार पर खादों का प्रयोग करें। चालू रबी मौसम के लिए गेंहू व चारा बीजों और स्प्रेयर पर उपदान दिया जा रहा है। किसानों को सुधरे औजारों व मशीनरी जैसे कि चैफक्टर, मेज़शैलर, वॉटर टब, हल इत्यादि उपकरणों पर भी उपदान दिया जा  रहा है।

डा. देस राज ने कहा कि उचित फसल प्रबन्धन से रबी फसलों का अधिक उत्पादन लिया जा सकता है। इसके लिए खेत की तैयारी से लेकर फसल की कटाई तक विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। फसलों एवं किस्मों का चुनाव, क्षेत्र विशेष की जलवायु, मृदा की दशा, पानी की उपलब्धता आदि पर ध्यान रखते हुये किया जाना चाहिये। अच्छी उत्पादकता प्राप्त करने के लिये अच्छी गुणवत्ता का बीज अत्यन्त आवश्यक है। खाद एवं उर्वरकों का सही मात्रा में सही समय पर ठीक ढंग से प्रयोग करने पर अधिक उत्पादन प्राप्त किया जाता है। उर्वरकों के संतुलित प्रयोग हेतु मृदा का परीक्षण अति आवश्यक है। फसल की अच्छी पैदावार प्राप्त करने के लिये खेत को खरपतवारों, कीटों एवं रोगों से मुक्त रखना भी अति आवश्यक है।

कृषि निदेशक ने बताया कि चालू रबी मौसम में गेंहू व जौ की फसलों पर फसल बीमा योजना लागू रहेगी तथा चुने हुए खण्डों की सोलन जिले की टमाटर व शिमला मिर्च, मण्डी जिले की टमाटर, कांगड़ा जिले की आलू की फसल व कुल्लू और सिरमौर जिला की लहुसन की फसल को मौसम आधारित फसल बीमा योजना में शामिल किया गया है। उन्होंने किसानों का आह्वान किया कि वे कृषि सम्बन्धी जानकारी व सरकार द्वारा चलाई जा रही कृषि योजनाओं का विभाग के माध्यम से अधिक से अधिक लाभ लें।

सम्बंधित समाचार

अपने सुझाव दें

Your email address will not be published. Required fields are marked *