किसानों ने मौसमी फूलों की नर्सरी तकनीक, फूलों की कटाई, व कारनेशन पौध की संवर्धन तकनीक पर लिया प्रशिक्षण

किसानों ने मौसमी फूलों की नर्सरी तकनीक, फूलों की कटाई, व कारनेशन पौध की संवर्धन तकनीक पर लिया प्रशिक्षण

  • आजीविका के लिए फूलों की व्यावसायिक खेती”  पर तीन दिवसीय कौशल विकास कार्यक्रम सपंन्न
  • पालमपुर में फूलों की खेती पर तीन दिवसीय कौशल विकास कार्यक्रम

पालमपुर : वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर में उद्यान विभाग, हिमाचल प्रदेश के सौजन्य से “आजीविका के लिए फूलों की व्यावसायिक खेती” विषय पर तीन दिवसीय कौशल विकास कार्यक्रम का समापन 20 दिसम्बर को किया गया। संस्थान पिछले दो दशकों से ज़्यादा समय से व्यावसायिक फूलों की खेती करने की वैज्ञानिक तकनीकों को विकसित करने पर शोध कार्य कर रहा है। यहाँ व्यावसायिक फूलों जैसे लिलियम, कैला लिली, गुलदाऊदी, कार्नेशन, आर्किड, बर्ड ऑफ पैराडाइज़, एल्स्ट्रोमेरिया, ग्लैडियोलस एवं गैंदा की खेती की तकनीकों को लगातार प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन के माध्यम से किसानों तक पहुँचाने का कार्य किया जा रहा है।

इस प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन कार्यक्रम के लिए संस्थान के निदेशक डॉ. संजय कुमार ने आशा व्यक्त की कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम, जिला कांगड़ा के धर्मशाला ब्लॉक से आए हुए 25 प्रतिभागियों के लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध होगा। प्रशिक्षण के संयोजक डॉ. भव्य भार्गव ने बताया की इस प्रशिक्षण में कारनेशन, जरबेरा, ग्लेडियोलस, गैंदा और कैलालिली पुष्पों की संरक्षित खेती की तकनीक एवं रखरखाव, उत्तम किस्मों, बाज़ार की माँग, शुष्क फूलों व मौनपालन पर विस्तार से प्रदर्शन एवं व्याख्यान द्वारा चर्चा की गई। किसानों ने मौसमी फूलों की नर्सरी तकनीक, फूलों की कटाई,  उनके वर्गीकरण व कारनेशन पौध की संवर्धन तकनीक को व्यावहारिक तौर पर प्रशिक्षण लिया। इस कार्यक्रम में फूलों की हाईड्रोपोनिक खेती व इसके फायदे पर भी किसानों ने बहुत रुचि दिखाई। प्रतिभागियों ने प्रगतिशील किसानों के प्रक्षेत्र का भ्रमण भी किया तथा उनसे खेती के गुर सीखे। डॉ. आशु गुलाटी ने विभिन्न पंचायतों से आए किसानों का आभार व्यक्त कहा कि किसानों को  बाज़ार की माँग के अनुरूप फूलों की खेती करनी चाहिए। उद्यान विभाग, हि. प्र. से उप निदेशक डॉ. डी आर वर्मा, विषय विशेषज्ञ डॉ. सुभोध चंद्र व डॉ. संजय गुप्ता, बागवानी विकास अधिकारी डॉ. हितेन्दर पटियाल व डॉ. नीरज जी भी उपस्थित थे।

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