कृषि निदेशक का किसानों से आहवान: अपनी फसलों का करवायें बीमा

चालू रबी मौसम में “प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना” जारी : कृषि निदेशक डॉ. देसराज

  • गेहूं व जौ की फसलों पर बीमा करवाने की अन्तिम तिथि 31 दिसम्बर

शिमला: प्राकृतिक आपदाओं से फसलों को होने वाले नुकसान की भरपाई हेतु प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना चालू रबी मौसम में भी जारी रहेगी। इस योजना के अंतगर्त किसानों को गेहूं व जौ की फसलों पर बीमा आवरण मिलेगा। जिसकी जानकारी देते हुए कृषि निदेशक डॉ. देसराज ने बताया कि चालू रबी में जिन किसानों ने गेहूं व जौ की फसलों पर ऋण लेना हो उनके लिए बीमा करवाने की अन्तिम तिथि 31 दिसम्बर, 2018 निर्धारित की गई है तथा उनके लिए यह योजना अनिवार्य है । गैर ऋणी किसानों के लिए यह योजना स्वैच्छिक है तथा उनके लिए भी बीमा करवाने की अन्तिम तिथि 31 दिसम्बर, 2018 है।

डॉ. देसराज ने कहा कि प्रतिकूल मौसम से किसानों की फसलों को काफी नुकसान पहुंचता है तथा आर्थिक हानि होती है। इस योजना का उदेश्य किसानों की फसलों को बुवाई से लेकर कटाई तक प्राकृतिक आपदाओं जैसे कि आग, आसमानी बिजली, सूखा, शुष्क अवधि, आँधी, ओलावृष्टि,  चक्रवात,  तूफान, कीट व रोगों आदि से हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति करना है। इसके अलावा अगर किसान कम वर्षा या प्रतिकूल मौसमी व्यवहार के कारण समय पर बुवाई नहीं कर पाता है तो भी उसे बीमा आवरण मिलेगा। इसके साथ साथ इस योजना में कटाई के उपरांत खेत में सुखाने हेतु रखी फसल यदि 14 दिन के भीतर चक्रवाती बारिश व बेमौसमी बारिश के कारण खराब हो जाती है तो क्षतिपूर्ति का आंकलन खेत स्तर पर ही किया जाएगा। गेहूं के लिए यह योजना लाहौल व स्पीती को छोड़कर सभी 11 जिलों के लिए है। इसी प्रकार जौ के लिए यह योजना हमीरपुर, बिलासपुर, ऊना व लाहौल व स्पीती को छोड़कर सभी 8 जिलों के लिए है। इन जिलों को दो वर्गो में बांटा गया है। चम्बा, हमीरपुर, काँगड़ा व ऊना वर्ग-1 में शामिल है तथा वर्ग-2 में बिलासपुर, मंडी, कुल्लू, शिमला, सोलन, किन्नौर और सिरमौर शमिल है। वर्ग-1 में आने वाले जिलों का बीमा करेगी और वर्ग-2 में आने वाले जिलों का बीमा करेगी। गेहूँ की फसल हेतु सामान्य कवरेज पर बीमित राशि 30,000 रूपये प्रति हैक्टेयर व जौ हेतु बीमित राशि 25,000/-रूपये है। प्रीमियम की दर बीमित राशि के अनुसार दोनो फसलों हेतु 1.50 प्रतिशत रखी गई है।

उन्होंने किसानों का आहवान किया कि फसलों को होने वाले नुकसान की क्षतिपूर्ति करने हेतु अपनी फसलों का बीमा करवायें। इसके लिए वे अपने नजदीक की प्राथमिक कृषि सहकारी सभाओं, ग्रामीण बैंकों तथा वाणिज्यिकी बैंकों से सम्पर्क करें व इस बारे में अपने नजदीक के कृषि प्रसार अधिकारी, कृषि विकास अधिकारी व खण्ड स्तर पर तैनात कृषि अधिकारी का भी सहयोग ले सकते हैं।

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