उपायुक्त कार्यालय शिमला की स्थापना के 200 वर्ष पूरे होने पर जश्न

उपायुक्त कार्यालय शिमला की स्थापना के 200 वर्ष पूरे होने पर जश्न

  • मुख्यमंत्री का प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर बल
  • मुख्यमंत्री ने किया ‘उपायुक्त शिमला, संस्थान की दो शताब्दियां’ 1815-2015, का विमोचन
  • प्रदेश सरकार शिमला सहित प्रदेश के अन्य भागों में स्थित पुराने ऐतिहासिक भवनों के जीर्णोद्धार के लिए प्रतिबद्ध
उपायुक्त कार्यालय शिमला की स्थापना के 200 वर्ष पूरे होने पर जश्न

उपायुक्त कार्यालय शिमला की स्थापना के 200 वर्ष पूरे होने पर जश्न

शिमला: मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने उपायुक्त कार्यालय शिमला की स्थापना के 200 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य पर आयोजित समारोह के दौरान अपने सम्बोधन में कहा कि शिमला शहर की अन्तर्राष्ट्रीय पहचान है और विश्व मानचित्र पर शिमला विशेष स्थान रखता है। अंग्रेजों की ग्रीष्मकालीन राजधानी से लेकर स्वतंत्रता संग्राम और उसके बाद विभिन्न ऐतिहासिक मौकों की यादें शिमला से जुड़ी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि परम्परागत धरोहर एवं इतिहास का हम सभी के जीवन में अत्याधिक मूल्य है और हमें विकास के पथ पर आगे बढ़ने के साथ-साथ इनका संरक्षण एवं संवर्धन करना है। वीरभद्र सिंह ने कहा कि केवल वही सभ्यताएं समृद्ध होती हैं, जो अपने रीति-रिवाजों और संस्कृति को जिंदा रखती हैं तथा युवा पीढ़ियों को इससे परिचित करवाती है। उन्होंने कहा कि जीवन में आगे बढ़ते हुए हमें कभी अपनी भाषा, रीति-रिवाजों, परम्पराओं और संस्कृति को नहीं भुलाना चाहिए।

उपायुक्त कार्यालय शिमला की स्थापना के 200 वर्ष पूरे होने पर जश्न

उपायुक्त कार्यालय शिमला की स्थापना के 200 वर्ष पूरे होने पर जश्न

पुराने समय की स्मृतियों का स्मरण करते हुए वीरभद्र सिंह ने कहा कि उन्होंने अपने बचपन में सुविधाओं के अभाव और मौसम की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद लोगों को कठिन परिश्रम करते देखा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश को प्रगति एवं समृद्धि के पथ पर आगे ले जाने के लिए युवाओं को भी इसी तरह के समर्पण भाव से कार्य करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक शहर का अपना ऐतिहासिक महत्व होता है। हिमाचल का समृद्ध परम्पराओं और रीति-रिवाजों पर हम सभी को गर्व है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार शिमला सहित प्रदेश के अन्य भागों में स्थित पुराने ऐतिहासिक भवनों के जीर्णोद्धार के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि नगर निगम शिमला कार्यालय भवन, जो प्राचीन वास्तुशिल्प का जीवंत उदाहरण है, का जीर्णोद्वार किया जा रहा है ताकि परम्परागत वास्तुशिल्प को बनाए रखते हुए इसे नया स्वरूप दिया जा सके।

शहरी एवं ग्रामीण तहसील शिमला के लिए अभिलेख कक्ष और आदर्श तहसील का लोकार्पण करते हुए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह

शहरी एवं ग्रामीण तहसील शिमला के लिए अभिलेख कक्ष और आदर्श तहसील का लोकार्पण करते हुए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह

वीरभद्र सिंह ने उपायुक्त कार्यालय शिमला के प्रशासनिक इतिहास को संजोए एक पुस्तक ‘उपायुक्त शिमला, संस्थान की दो शताब्दियां’ 1815-2015, का विमोचन किया। उन्होंने उपायुक्त कार्यालय पट्टिका, स्टैम्प व कवर का अनावरण भी किया। इससे पूर्व, मुख्यमंत्री ने पैशनर्ज सुविधा केन्द्र, राष्ट्रीय भू-अभिलेख अधुनिकीकरण परियोजना के अन्तर्गत शहरी एवं ग्रामीण तहसील शिमला के लिए अभिलेख कक्ष और आदर्श तहसील का लोकार्पण किया।

भारतीय प्रशासनिक सेवा से सेवा निवृत अधिकारी  एस.एन. जोशी ने इस अवसर पर बोलते हुए उपायुक्त के रूप में अपने संस्मरणों को सांझा किया। उन्होंने कांगड़ा में उपायुक्त के तौर पर रहते हुए अपने अनुभवों के बारे में भी बताया। युवा स्थानीय लेखक एवं मुख्यमंत्री द्वारा आज विमोचित की गई पुस्तक के सम्पादक राजा भसीन ने पुस्तक की विषय वस्तु पर प्रकाश डालने के साथ-साथ शिमला के औपनिवेशक इतिहास की भी जानकारी दी।

उपायुक्त शिमला दिनेश मल्होत्रा ने शिमला के औपनिवेशक प्रशासनिक इतिहास के बारे में विस्तुत जानकारी दी। उन्होंने स्वतंत्र भारत के प्रथम उपायुक्त केहर सिंह चौधरी, आईसीएस, जिन्होंने 5 जुलाई, 1947 से 17 अप्रैल, 1948 तक उपायुक्त का पदभार संभाला था, के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शिमला के उपायुक्त का पदभार संभालने वाले अधिकारियों की सूची भावी पीढ़ी के ज्ञान के लिए इस पुस्तक में उल्लिखित है।

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