सरकार शिक्षण संस्थानों में ललित कला कक्षाएं शुरु करने पर करेगी विचारः सीएम

सरकार शिक्षण संस्थानों में ललित कला कक्षाएं शुरु करने पर करेगी विचारः सीएम

हिमाचल प्रदेश में पारम्परिक कलाओं, हस्तलिपियों, चित्रकलाओं का खजाना

 

शिमला: मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य में ललित कलाओं को बढ़ावा देने के लिए कुछ महाविद्यालयों के साथ-साथ जिला मुख्यालयों पर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाओं में ललित कला कक्षाएं आरम्भ करने पर विचार करेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने राज्य में ललित कला महाविद्यालय स्थापित करने की घोषणा की है, जिसे शीघ्र ही खोला जाएगा।

मुख्यमंत्री आज यहां शिमला कला उत्सव में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि कांगड़ा कलम को पुनः प्रचलित बनाने एवं इसे अधिक सुदृढ़ करने के लिए बहुत से कलाकारों को गुरू शिष्य परम्पराओं के अनुरूप इस विधा से जोड़ा जा रहा है। वीरभद्र सिंह ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पारम्परिक कलाओं, हस्तलिपियों, चित्रकलाओं का खजाना है। उन्होंने कहा कि प्रसिद्ध कांगड़ा लघु चित्रकारी के साथ-साथ राजाओं के समय में प्रदेश में चित्रकारी की पहाड़ी और गुलेर शैली के अतिरिक्त अन्य शैलियां फली-फूलीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि परम्परागत कलाओं के पुनः प्रचलन के दृष्टिगत प्रदेश में ललित कला महाविद्यालय खोलने की घोषणा की गई है। वीरभद्र सिंह ने कहा कि संगीत एवं कला एक-दूसरे से जुड़े रहे हैं और दोनों एक साथ चमत्कारिक प्रभाव उत्पन्न करने में समर्थ हैं। उन्होंने कहा कि गेयटी थियेटर की कला की विभिन्न विधाओं को बढ़ावा देने के साथ-साथ प्रदेश की संस्कृति एवं रीति-रिवाजों को बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका है। उन्होंने कहा कि गेयटी थियेटर का जीर्णोद्धार किया गया है तथा प्रदेश सरकार राज्य के सभी प्राचीन ऐतिहासिक भवनों के जीर्णोद्धार एवं प्राचीन वास्तुशिल्प के अनुरूप उनका स्वरूप बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि कला की विभिन्न विधाओं को बढ़ावा देने में आगे बढ़कर सहयोग करने वाली संस्थाओं को प्रदेश सरकार पूरी मदद करेगी।

मुख्यमंत्री ने कला उत्सव में भाग ले रहे राष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजे गए कलाकारों सहित अन्य प्रतिष्ठित कलाकारों को सम्मानित भी किया। वीरभद्र सिंह ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के विजुअल आर्टस विभाग, ललित कला महाविद्यालय नई दिल्ली, ख्याति आर्ट राजकोट तथा ललित कला महाविद्यालय जालन्धर द्वारा लगाई गई कला एवं चित्रकारी प्रदर्शनी और कांगड़ा चित्रकला प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस अवसर पर सैक्रेड हर्ट और लॉरेटो कान्वेंट के विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया।

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के दृश्य एवं ललित कला विभाग के प्राध्यापक प्रो. हिम चैटर्जी ने कहा कि प्रदेश की एकांत पहाड़ियों और वेगवान नदियों की सुन्दरता बहुत से कलाकारों को अपनी ओर आकर्षित करती रही हैं। यहां तक कि महान लेखक रूडयार्ड किपलिंग भी शिमला की पहाड़ियों की सुन्दरता पर मुग्ध थे। इसके अतिरिक्त अमृता शेरगिल, शोभा सिंह, सतीश गुजराल तथा कृष्ण खन्ना उन चुनिंदा कलाकारों में से थे, जिन्होंने अपने विचारों को चित्रकला के माध्यम से कैनवास पर उकेरा और ललित कला को बढ़ावा दिया। उन्होंने शिमला कला उत्सव को प्रतिवर्ष आयोजित करने और प्रदेश के विश्वविद्यालयों में ललित कला विषय आरम्भ करने का आग्रह किया। उन्होंने इस अवसर पर संगीत की स्वर लहरियों के साथ कैनवास पर कूची से चित्रकला कौशल का बेहतरीन प्रदर्शन किया। उनकी इस शानदार प्रस्तुति पर सभागार में उपस्थित सभी दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका हौंसला बढ़ाया।

इस तीन दिवसीय कला उत्सव के दौरान छः राज्यों के बहुत से उम्दा चित्रकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे, जिनमें जम्मू-कश्मीर के के.के.गांधी, ललित कला महाविद्यालय चण्डीगढ़ से डा. आनन्द शर्मा, ललित कला महाविद्यालय दिल्ली के प्रधानाचार्य प्रो. एस.एन. लहरी, कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के ललित कला विभाग के अध्यक्ष राम विरंजन, सूरत से चन्द्रकांत प्रजापति और अमृतसर के बलदेव गम्भीर शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त पड़ोसी राज्यों के ललित कला महाविद्यालयों के विद्यार्थी और शिमला के 20 छात्र अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह, मुख्य संसदीय सचिव नन्द लाल, महापौर शिमला संजय चौहान, विधायक अनिरूद्ध सिंह, उप-महापौर टिकेन्द्र पंवर, हिमफैड के अध्यक्ष अजय बहादुर, उपायुक्त शिमला दिनेश मल्होत्रा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

सम्बंधित समाचार

अपने सुझाव दें

Your email address will not be published. Required fields are marked *