“उत्कर्ष सहोदया” ने की शिमला में राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला आयोजित,हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल ने की मुख्यातिथि के रूप में शिरकत

“उत्कर्ष सहोदया” ने की शिमला में राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला आयोजित, हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल ने की मुख्यातिथि के रूप में शिरकत

  • न्यायमूर्ति संजय करोल बोले: वे इस कार्यशाला में एक न्यायाधीश की हैसियत से नहीं, बल्कि एक विद्यार्थी की तरह आए हैं
  • अभिभावकों को अपने बच्चों की मदद करनी चाहिए और उन्हें जिम्मेदार बनाना चाहिए : न्यायमूर्ति संजय करोल
  • हिमाचल के सीबीएसई के करीब 18 स्कूलों के प्रधानाचार्यों-उप-प्रधानाचार्यों ने लिया कार्यशाला में हिस्सा
  • कार्यशाला में उपस्थित सभी प्रधानाचार्यों के लिए विभिन्न गतिविधियां करवाई गई जिसके जरिये उन्होंने अपने स्थानीय प्रशासन के मुद्दों पर मंथन किया और एक दूसरे के साथ अपने विचार सांझा किये। 

 शिमला: “उत्कर्ष सहोदया” की तरफ से शिमला में आज (शनिवार को) द्वितीय राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया। इससे पहले पिछले वर्ष पहली कार्यशाला कुल्लू में आयोजित गई थी, वहीं इस बार शिमला में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में पूरे हिमाचल से सीबीएसई के करीब 18 स्कूलों के  प्रधानाचार्यों-उप-प्रधानाचार्यों, स्कूलों के कॉर्डिनेटर्स, उत्कर्ष सहोदया के सदस्यों ने हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम का थीम ब्रेकिंग बैरियर्स, बिल्डिंग ब्रिजेस (breaking barriers, building bridges) रखा गया। कार्यशाला का शुभारंभ सेंट थॉमस की प्रधानाचार्या विधुप्रिया चकर्वर्ती, सेंट एडवर्ड स्कूल के प्रधानाचार्य फादर अनिल सीकवेरा व लोरेट स्कूल की प्रधानाचार्या मीरा वालिया ने दीप प्रज्वलित कर किया।

हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल ने की मुख्यातिथि के रूप में शिरकत

हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल ने की मुख्यातिथि के रूप में शिरकत

कार्यक्रम में मुख्यातिथि के रूप में हिमाचल हाईकोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश संजय करोल ने शिरकत की। कार्यशाला में विशेषतौर पर गौरव ओबेरॉय, पायल मल्होत्रा, मनदीप राणा प्रधानाचार्य सरस्वती पैराडाइस शिमला, ललिता कंवर ला मोंटेसरी स्कूल कुल्लू की प्रधानाचार्या, सेंट थॉमस की प्रधानाचार्या विधुप्रिया चक्रवर्ती, दयानंद पब्लिक स्कूल शिमला की प्रधानाचार्या अनुपम, सेंट एडवर्ड स्कूल के प्रधानाचार्य फादर अनिल सीकवेरा, 18 विद्यालयों के प्रधानाचार्यों उप-प्रधानाचार्यों व स्कूलों के कॉर्डिनेटर्स व अन्य गणमान्य अतिथियों ने विशेष रूप से शिरकत की।

इस अवसर पर न्यायमूर्ति संजय करोल ने कहा कि वे इस कार्यशाला में एक न्यायाधीश की हैसियत से नहीं बल्कि एक विद्यार्थी की तरह आए हैं। इस दौरान उन्होंने अपने बचपन की कुछ बातों को सांझा करते हुए कहा कि उन्हें भी बचपन से नैतिक शिक्षा का पाठ पढ़ाया गया और स्कूल ही नहीं अपितु उन्हें उनके घर से भी मोरल एजुकेशन  मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि अभिभावकों को अपने बच्चों की मदद करनी चाहिए और उन्हें जिम्मेदार बनाना चाहिए।

  • न्यायमूर्ति संजय करोल ने ड्रग्स के बढ़ते प्रभाव पर जताई चिंता

न्यायमूर्ति संजय करोल ने ड्रग्स के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई और उन्होंने कहा कि इस समस्या से डील करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि आज परिजन यह बात मानने को तैयार नहीं है कि उनके बच्चे इस ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक में यह काबिलियत है कि जो इस समस्या को जड़ से मिटा सकता है। अध्यापक परिजनों को सूचित करके इस समस्या से अवगत करवा सकता है।

  • कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य : इस तरह की कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य संयुक्त रूप से सभी स्कूलों को आजकल के विद्यार्थियों में पढ़ाई को लेकर आ रही परेशानियों से अवगत करवाना तथा उसका समाधान पाना,  स्कूल के अध्यापकों और छात्रों के बीच आ रहे अंतर, आज की शिक्षा पद्धति में आ रहे बदलावों को किस तरह से आसानी से काबू पाना है, मानसिक तौर पर बच्चों को केवल शिक्षा ही नहीं बल्कि भविष्य में भी उन्हें सफलता की और अग्रसर करना है।
  • कई गंभीर मुद्दों पर भी की गई चर्चा: इसके अलावा तकनीक के सही इस्तेमाल से बच्चों को शिक्षित करना, बच्चों के बीच बढ़ती ट्यूशन की लोकप्रियता में बढ़ोतरी, नशे जैसे गंभीर मुद्दों पर भी विशेष रूप से चर्चा की गई।

इस कार्यशाला में यह भी बताया गया कि बच्चों को कक्षाओं से बहार निकालकर उनको वास्तविकता का आभास करवाना जरुरी है। पढ़ाने की तकनीक, मनोवैज्ञानिक तत्वों, रचनात्मक ढंग से पढ़ना, विद्यार्थियों में शिक्षा व विषय के प्रति जागरूकता उत्पन करना जैसे महत्वूर्ण टिप्स दिए गए। वक्ताओं द्वारा भिन्न-भिन्न स्कूलों से आये  प्रधानाचार्यों को बताया गया कि विशेषतर उन अध्यापकों को स्कूल में भर्ती करें जो अपने विषय में बहुत प्रोफेशनल हो और छात्रों में विषय को लेकर रूचि जगाये। प्रधानाचार्यों को बताया गया कि ऐसे शिक्षकों को अधिक से अधिक अध्यापन कार्य में जगह देनी चाहिए।

कार्यशाला में उपस्थित सभी प्रधानाचार्यों के लिए विभिन्न गतिविधियां करवाई गई जिसके जरिये उन्होंने अपने स्थानीय प्रशासन के मुद्दों पर मंथन किया और एक दूसरे के साथ अपने विचार सांझा किये।

  • सभी प्रधानाचार्य एक मंच पर इक्क्ठे हुए और अपने विचार सांझा किए यह बहुत बड़ी बात : खांडेराव
  • खांडेराव बोले आज के समय में कोचिंग क्लासेज एक लोकल इशू नहीं बल्कि सोशल इशू है

कार्यशाला के दूसरे भाग में सीबीएसई पंचकूला के रीजनल अफसर खांडेराव ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने उत्कर्ष सहोदया का लोगो भी लांच किया। उन्होंने कहा कि सभी प्रधानाचार्य एक मंच पर इक्क्ठे हुए और अपने विचार सांझा किए यह बहुत बड़ी बात है। आज के समय में कोचिंग क्लासेज एक लोकल इशू नहीं सोशल इशू है। कोचिंग क्लासेज की बात पर खांडेराव ने ज़ोर डालते हुए कहा कि स्कूल के अध्यापकों और अभिभावकों को यह समझाना चाहिए कि कोचिंग सेण्टर से ज्ञान की बजाए अपने ही स्कूल से ज्ञान ले। अध्यापक एक्स्ट्रा क्लासेज लगाकर बच्चों को ओर अधिक समय दे सकते हैं। इसके अलावा उन्होंने सीबीएसई से जुड़ी बातों से भी प्रधानाचार्यों को अवगत करवाया।

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