सीएसआईआर-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर में “जिज्ञासा” कार्यक्रम आयोजित, 450 छात्रों व शिक्षकों ने लिया हिस्सा

सीएसआईआर-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर में “जिज्ञासा” कार्यक्रम आयोजित, 450 छात्रों व शिक्षकों ने लिया हिस्सा

  • जिज्ञासाका एकमात्र उद्देश्य कक्षा में सीखी गई बातों को योजनाबद्ध अनुसंधान प्रयोगशाला में जाकर देखना व समझना
  • मिसाइल साइंटिस्ट व वर्तमान में केयर फाउंडेशन  हैदराबाद के सचिव प्रो. तिवारी ने जीवन के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रेरणादायक व्याख्यान दिया
  • डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की टीम में सदस्य रह चुके हैं प्रो. तिवारी
  • प्रो. तिवारी ने छात्रों को बताए डॉ. कलाम द्वारा लिखी गई पुस्तकों के सार
  • छात्रों ने संस्थान में हो रहे विभिन्न अनुसंधान कार्यों व उत्पादों के बारे में लगी प्रदर्शनी से ली जानकारी
  • प्रो. तिवारी ने तैयार की थी भारत की पहली टाइटेनिअम एयर बॉटल, जिसका प्रयोग त्रिशूलऔर आकाशमिसाइलों में हुआ  
  • लक्ष्य को पहले ही निर्धारित कर पूरी तत्परता, लग्न व मेहनत के साथ जुट जाना चाहिए : निदेशक डॉ. संजय कुमार

शिमला : सीएसआईआर-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर में बुधवार को (3 अक्तूबर) “जिज्ञासा” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सीएसआईआर ने केन्द्रीय विद्यालय संगठन के सहयोग से एक छात्र-वैज्ञानिक संयोजक कार्यक्रम ‘जिज्ञासा’ शुरू किया है जिसका एकमात्र उद्देश्य कक्षा में सीखी गयी बातों को अच्छी तरह से योजनाबद्ध अनुसंधान प्रयोगशाला में जाकर देखना व समझना है, ताकि छात्रों को विज्ञान के

छात्रों ने संस्थान में हो रहे विभिन्न अनुसंधान कार्यों व उत्पादों के बारे में लगी प्रदर्शनी से ली जानकारी

छात्रों ने संस्थान में हो रहे विभिन्न अनुसंधान कार्यों व उत्पादों के बारे में लगी प्रदर्शनी से ली जानकारी

प्रति आकर्षित किया जा सके और वे विज्ञान को अपना कैरिअर बना सकें। इस कार्यक्रम में केंद्रीय विद्यालय मंडी के अलावा 9 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पालमपुर (कन्या), अवैरी, कंडवाडी, बिंद्रावन, राजपुर, खलेट, बंदला, चंदपुर तथा बनूरी के 450 छात्रों तथा शिक्षकों ने भाग लिया। राष्ट्रीय स्तर पर अपने वैज्ञानिक सामाजिक उत्तरदायित्व को आगे बढ़ाने और सुदृढ़ बनाने के लिए सीएसआईआर द्वारा उठाए गए प्रमुख पहलुओं में से एक “जिज्ञासा” है। इस उपलक्ष्य पर आए हुये छात्रों और शिक्षकों ने सीएसआइआर-आईएचबीटी की विभिन्न प्रयोगशालाओं का भ्रमण किया तथा वैज्ञानिकों और शोधार्थियों से विज्ञान संबंधित वार्तालाप किया। छात्रों ने संस्थान में हो रहे विभिन्न अनुसंधान कार्यों तथा उत्पादों के बारे में एक प्रदर्शनी के माध्यम से विस्तार से जानकारी हासिल की।

इस अवसर पर मिसाइल साइंटिस्ट व वर्तमान में केयर फाउंडेशन  हैदराबाद के सचिव प्रोफेसर अरुण तिवारी ने छात्रों व उनके शिक्षकों के साथ वार्तालाप किया और जीवन के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रेरणादायक व्याख्यान दिया। प्रोफेसर तिवारी डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की टीम में सदस्य रह चुके हैं। डीआरडीएल में कार्य करते हुये प्रोफेसर तिवारी ने भारत की पहली “टाइटेनिअम एयर बॉटल” तैयार की थी, जिसका प्रयोग “त्रिशूल” और “आकाश” मिसाइलों में हुआ है। तिवारी ने छात्रों को डॉ. कलाम द्वारा लिखी गयी पुस्तकों के सार बताए और जीवन में मूल्यों, आदर्शों, मेहनत और कर्तव्यनिष्ठा का महत्व समझाया। उन्होंने छात्रों से अपने जीवन के अनुभवों को भी साझा किया और सफलता के गूढ़ राज बताए।

'जिज्ञासा' का एकमात्र उद्देश्य कक्षा में सीखी गई बातों को योजनाबद्ध अनुसंधान प्रयोगशाला में जाकर देखना व समझना

‘जिज्ञासा’ का एकमात्र उद्देश्य कक्षा में सीखी गई बातों को योजनाबद्ध अनुसंधान प्रयोगशाला में जाकर देखना व समझना

इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. संजय कुमार ने छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा की हमें अपने लक्ष्य को पहले ही निर्धारित करके उसको हासिल करने के लिए पूरी तत्परता, लग्न व मेहनत के साथ जुट जाना चाहिए। प्रोफेसर तिवारी का धन्यवाद करते हुए उन्होंने कहा कि इन जैसे महान व्यक्तित्व से रूबरू होना हम सबके लिए एक सौभाग्य की बात है और इनका मार्गदर्शन बच्चों को लक्ष्य हासिल करने में सहायक होगा।

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