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20 जुलाई से होगी सेबों की खरीद

  • मंडी मध्यस्थता योजना के तहत
  • 20 जुलाई से होगी सेबों की खरीद
  • योजना 1,06,887 मीट्रिक टन सेबों की खरीद के लिए की जाएगी क्रियान्वित
  • 6.50 रुपये प्रति किलो होगा खरीद मूल्य 
  • फल उत्पादकों की मांग के अनुरूप 275 प्रापण केन्द्र जाएंगे खोले
  • अत्यधिक पोलिश किए सेबों को नहीं जाएगा खरीदा
  • 51 मी.मी. परिधि वाले सेबों का ही किया जाएगा प्रापण

शिमला: प्रदेश सरकार ने राज्य में सेब की खरीद के लिए 20 जुलाई से 31 अक्तूबर, 2015 तक मंडी मध्यस्थता योजना क्रियान्वित करने का निर्णय लिया है।

बागवानी विभाग के एक प्रवक्ता ने आज यहां कहा कि योजना 1,06,887 मीट्रिक टन सेबों की खरीद के लिए क्रियान्वित की जाएगी और योजना के तहत खरीद मूल्य 6.50 रुपये प्रति किलो होगा। हैंडलिंग चार्जिज 2.20 रुपये प्रतिकिलो तय किये गए हैं। मंडी मध्यस्थता योजना के तहत सेबों को प्रापण केन्द्रों के समीप बेचने का प्रबन्ध विभाग द्वारा किया जाएगा ताकि परिवहन एवं अन्य खर्चों को कम किया जा सके। विभाग द्वारा परिवहन खर्चों को कम करने के लिए सेब बाहुल्य क्षेत्रों में फल विधायन सुविधाएं क्रियाशील बनाने के लिए समय निश्चित करेगा। योजना के अन्तर्गत फल उत्पादकों की मांग के अनुरूप 275 प्रापण केन्द्र खोले जाएंगे जिनमें से 159 केन्द्र एच.पी.एम.सी. और 116 केन्द्र हिमफैड द्वारा खोले जाएंगे। इन केन्द्रों में सम्बन्धित प्रापण एजेसियों के कर्मचारी तैनात होंगे तथा इस व्यवस्था के लिए 256.38 लाख रुपये प्रदान किए जाएंगे।

प्रवक्ता ने कहा कि फलों की खरीद 40 किलोग्राम की टाट की बोरियों में की जायेगी तथा इनमें वाष्प उत्सर्जन और अन्य नुकसान को ध्यान में रखते 2.5 प्रतिशत अधिक फल भरे जाएंगे। उन्होंने कहा कि योजना के अन्तर्गत केवल 51 मी.मी. परिधि वाले सेबों का ही प्रापण किया जाएगा और पक्षियों द्वारा क्षतिग्रस्त एवं अन्य कटे-फटे फलों की खरीद नहीं की जाएगी। इसके अतिरिक्त, आकार में छोटे, कच्चे अथवा अधिक पके, फफूंदीयुक्त व अन्य किसी बीमारी से ग्रस्त फलों की खरीद भी नहीं की जाएगी। इसी तरह अत्यधिक पोलिश किए हुए फलों को भी नहीं खरीदा जाएगा। हालांकि, ओला वृष्टि के कारण हल्के नुकसान वाले एवं कम विकृत फलों को खरीद के लिए स्वीकार किया जाएगा।

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