शिमला: अब डीडीयू अस्पताल में होंगे डायलिसिस, डायलिसिस केंद्र का लोकार्पण

  • राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम के तहत यह प्रदेश का 7वां केंद्र होगा

शिमला: शिमला के दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में आज शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज और स्वास्थ्य एंव परिवार कल्याण मंत्री विपिन सिंह परमार ने डायलिसिस केंद्र का लोकार्पण किया। यह प्रदेश का 7वां डायलिसिस केंद्र होगा। इससे पहले सोलन, मंडी, कुल्लू, ऊना, बिलासपुर और धर्मशाला में डायलिसिस केंद्र खोले जा चुके हैं।

इस अवसर पर शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि शिमला में डायलिसिस केंद्र खोलने की लोगों की पुरानी मांग थी, जिसे आज पूरा कर दिया गया है। इससे क्षेत्रीय अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले सैंकड़ों रोगियों को सुविधा मिलेगी। उन्होंने कहा कि शिमला की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान है और यहां पर विदेशों से भी पर्यटक आते हैं, इसलिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं होना जरूरी है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह अस्पताल अंग्रेजों के समय का और बहुत पुराना है, इसलिए इसकी महत्ता और भी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने से मेडिकल कॉलेजों पर दबाव कम होगा।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से दो दिन पहले ही जय राम ठाकुर ने डीडीयू अस्पताल में एक कार्यक्रम के दौरान डिजिटल एक्स-रे मशीन स्थापित करने की घोषणा की थी। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से इसे शीघ्र स्थापित करने का आग्रह किया। साथ ही अस्पताल के आर्थो विभाग को भी सुदृढ़ करने की बात कही।

इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री विपिन सिंह परमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न के तहत ‘राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम’ शुरू किया गया है, जिसके अंतर्गत आज प्रदेश को 7वां डायलिसिस केंद्र मिला है। उन्होंने कहा कि इस केंद्र में बीपीएल परिवारों को निःशुल्क जबकि एपीएल परिवारों को न्यूनतम 1169 रुपए में डायलिसिस की सुविधा मिलेगी।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर के नेतृत्व में प्रदेश सरकार इस सुविधा को सभी जिला अस्पतालों के साथ-साथ उपमंडलीय अस्पतालों तक पहुंचाना चाहती है। उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में चंबा, नूरपुर, पालमपुर एवं पांवटा साहिब में भी डायलिसिस केंद्र खोले जाएंगे। विपिन सिंह परमार ने कहा कि प्रदेश में अब तक इस योजना के अंतर्गत 4709 लोगों का डायलिसिस हुआ है और 30,000 से अधिक सेशन किए जा चुके हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रदेश में जब डायलिसिस की सुविधा नही थी तो लोगों को बाहरी प्रदेश में इलाज के लिए भटकना पड़ता था, जिससे समय के साथ-साथ धन का भी नुकसान होता था।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। अस्पतालों से स्टॉफ की कमी को दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके तहत शीघ्र ही 732 स्टाफ नर्सों की नियुक्ति की जाएगी। इनमें से 50 प्रतिशत पद बैच-वाइज भरे जाएंगे और भर्ती प्रक्रिया चार माह में पूरी कर ली जाएगी। इसी प्रकार, रेडियोग्राफर, ओटी सहायक, एएनएम व अन्य तकनीकी कर्मचारियों के पदों का भी सृजन किया गया है और अधीनस्थ सेवाएं आयोग के माध्यम से इन्हें भरा जा रहा है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों के 300 पद वॉक-इन-इंटरव्यू के माध्यम से भरे जा चुके हैं और जल्द ही 200 नियमित डॉक्टरों के पद हि.प्र. लोक सेवा आयोग के माध्यम से भरे जाएंगे।

विपिन सिंह परमार ने आश्वासन दिया कि डीडीयू में डिजिटल एक्स-रे मशीन दो महीने में स्थापित कर दी जाएगी। इसके लिए निविदाएं आमंत्रित की जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि डीडीयू अस्पताल एक ऐतिहासिक भवन है, ऐसे में इसकी अधिक छेड़छाड़ किए बगैर जीर्णोद्धार किया जाएगा। इसके लिए उन्होंने प्रारूप तैयार करने की बात कही जिसे मुख्यमंत्री की संस्तुति के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि हम प्रदेश के सभी अस्पतालों में कम से कम क्रियाशील पद सुनिश्चित करना चाहते हैं ताकि लोगों को अस्पताल से बिना इलाज के न लौटना पड़े। उन्होंने कहा हालांकि प्रदेश के स्वास्थ्य मानक बहुत से राज्यों की तुलना में काफी अच्छे हैं, लेकिन हम प्रदेश को स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश का आदर्श राज्य बनाना चाहते हैं और इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने चिकित्सकों व पैरा मेडिकल स्टॉफ से समर्पण, निष्ठा व इमानदारी के साथ कार्य करने को कहा।

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