केंद्र सरकार ने एक साल में किया आम व गरीब जनता का अहित : सिंगला

केंद्र सरकार ने एक साल में किया आम व गरीब जनता का अहित : सिंगला

लोगों को सामाजिक सुरक्षा क्षेत्र में दिए जाने वाले बजट में की करोड़ों रुपये की कटौती

शिमला: एक साल के कार्यकाल में केंद्र सरकार ने भारतीय संविधान की समान विकास की मूल भावना व प्रस्तावना को तिलाजंलि देकर चुनिंदा औद्योगिक घरानों व व्यापारिक मित्रों के हित साधे हैं। केंद्र सरकार ने एक साल के भीतर आम व गरीब जनता का अहित किया है। लोगों को सामाजिक सुरक्षा क्षेत्र में दिए जाने वाले बजट में करोड़ों रुपये की कटौती की गई है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता एवं पंजाब के पूर्व सांसद विजय इंद्र सिंगला ने शिमला में ये आरोप लगाए। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 17 प्रतिशत का योगदान देने वाले कृषि क्षेत्र पर देश की 62.5 प्रतिशत जनसंख्या निर्भर है। देश की 67 प्रतिशत जनसंख्या को भोजन व पोषण की गारंटी उपलब्ध कराने वाले खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम के क्रियान्वयन को रोक कर 1,03,000 करोड़ रुपये की कटौती की गई है।

जनविरोधी नीतियों के कारण कृषि व सिंचाई, महिला व बाल विकास, अनुसूचित जाति एवं जनजाति, पंचायती राज, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, स्वच्छ भारत अभियान, पिछड़े क्षेत्र व खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र व वर्ग सबसे अधिक आहत होंगे।केंद्र सरकार के एक वर्ष के कार्यकाल में कृषि क्षेत्र में विकास दर 2013-14 में 4.7 प्रतिशत से घटकर बीते वित्त वर्ष में 1.1 प्रतिशत रह गई है। पिछली कांग्रेस सरकार के द्वारा पारित अनुसूचित जाति जनजाति कल्याण का एकमात्र अध्यादेश भी केंद्र सरकार ने निरस्त कर दिया। मोदी सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं को मात्र 94.75 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।

बीते वित्त वर्ष के लिए भी केंद्र सरकार ने मनरेगा में राज्यों को 6000 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान नहीं किया। सरकार ने देश भर में ब्लॉक स्तर पर 6000 मॉडल स्कूलों की स्थापना की केंद्रीय मदद के अनुदान की योजना को निरस्त कर दिया। स्वच्छ भारत अभियान, पेयजल व साफ -सफाई आदि के बजट में 9025 करोड़ रुपये कम कर दिए हैं। खाद्य सुरक्षा कानून के क्रियान्वयन के लिए छह-छह महीने की समयसीमा तीन बार बढ़ा दी गई। उन्होंने देशवासियों से आग्रह किया कि गरीब, किसान व जनविरोधी सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करें।

सबसे अधिक आहत करने व चौंकाने वाली कटौतियां इस प्रकार से हैं:-

1.कृषि एचं सिंचाई: देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 17 प्रतिशत का योगदान देने वाला कृषि क्षेत्रपर देश की62.5 प्रतिशत जनसंख्या निर्भर है। कृषि क्षेत्र ‘मोदीनोमिक्स’ के नए पूंजीवाद से सबसे अधिक बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। ‘राष्ट्रीय कृषि विकास योजना’ के फंड में 7426.50 करोड़ रु. तक की कटौती की गई है। पशुपालन और डेयरी विकास में 685 करोड़ रु. की कटौती की गई है। ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ के फंड में 8152.22 करोड़ रु. की कटौती की गई है। ‘राष्ट्रीय आजीविका मिशन’ के फंड में 1632.50 करोड़ रु. की कटौती की गई है।

बीजेपी सरकार के एक वर्ष के कार्यकाल में कृषि क्षेत्र में विकासदर 2013-14 में 4.7 प्रतिशत से घटकर 2014-15 में 1.1 प्रतिशत रह गई है (आर्थिक सर्वे 2015)। 2014-15 में खेती के अंतर्गत क्षेत्र 33.22 लाख हेक्टेयर घट गया है और अनाज का कुल उत्पादन 2013-14 में 2650 लाख मीट्रिक टन से घटकर 2014-15 में 2500 लाख मीट्रिक टन से भी कम होने की आशंका है। कांग्रेस शासन के दौरान वृद्धि दर्ज करने वाले कृषि निर्यात्, जो 2002-03 में अमेरीकी डॉलर 7.5 बिलियन से बढ़कर 2013-14 में अमेरीकी डॉलर42.6 बिलियन हो गया था, उसमें भी मोदी सरकार की कृषि विरोधी नीतियों के चलते 25 प्रतिशत तक गिरावट आई है।

  1. ‘अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों’ के कल्याण को लेकर मोदी सरकार की असंवेदनशील नीति जगजाहिर है। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि पिछली कांग्रेस की सरकार के द्वारा पारित अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण का एकमात्र अध्यादेश भी वर्तमान बीजेपी सरकार ने निरस्त कर दिया। ‘द शेड्यूल्ड कास्ट एण्ड शेड्यूल्ड ट्राईब्स (प्रिवेंशन ऑफ एट्रोसिटीज़) अमेंडमेंट ऑर्डिनेंस 2014’ में प्रावधान किया गया था कि एससी/एसटी मुकदमों के जल्दी निर्णय के लिए जिला स्तर पर विशेष अदालत का गठन किया जाए व मुकदमे की पैरवी के लिए विशेष सरकारी वकील की नियुक्ति की जाए। दुर्भाग्य की बात यह भी है, कि ‘अनुसूचित जाति उप योजना निधि’ में भी 13,208 करोड़ रु. की कटौती कर दी गई है व ‘अनुसूचित जनजातीय उपयोजना’ में 7,714 करोड़ रु. की कटौती कर दी गई है।
  2. पंचायती राज संस्थाएं’ हमारे लोकतंत्र में सबसे अंतिम छोर तक प्रजातांत्रिक भागीदारी सुनिश्चित करती हैं। हैरानी की बात यह है, कि पंचायती राज संस्थाओं का बजट 3306 करोड़ रु. या 98.6 प्रतिशत काट दिया गया है। मोदी सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं का मजाक उड़ाते हुए मात्र 94.75 करोड़ रु. का तुच्छ आबंटन किया गया है। वर्ष 2014-15 के लिए भी भारत सरकार ने मनरेगा में राज्यों को 6000 करोड़ रु. से अधिक का भुगतान नहीं किया। इसके परिणामस्वरूप राज्य जारी वर्ष में नए प्रोजेक्ट चलाकर रोजगार प्रदान नहीं कर पा रहे हैं।
  3. महिला और बाल विकास विभाग’ में की गई कटौती मोदी सरकार का सबसे क्रूर कदम है। समेकित बाल विकास योजना (आईसीडीएस) का लक्ष्य लाखों बच्चों और गर्भवती माताओं के स्वास्थ्य और पोषण का ख्याल रखना है। इसमें मोदी सरकार द्वारा 9858 करोड़ रु. की कटौती की गई
  4. शिक्षा’ मोदी सरकार की अंतिम प्राथमिकता है। शिक्षा बजट में 14,088.99 करोड़ रु. की कटौती कर दी गई है (प्राथमिक शिक्षा में 10,186 करोड़ रु., माध्यमिक शिक्षा में 1422 करोड़ रु. व उच्च शिक्षा में 1479 करोड़ रु. की कटौती)। मोदी सरकार ने देशभर में ब्लॉक स्तर पर 6000 मॉडल स्कूलों की स्थापना की केंद्रीय मदद के अनुदान की योजना को निरस्त कर दिया है।
  5. स्वास्थ्य’ देश के विकास की पहली प्राथमिकता है। मोदी सरकार ने निर्दयता से इसका गला घोंटा है। ‘नेशनल हेल्थ मिशन’ में 3650 करोड़ रु. की कटौती कर दी गई है। ‘नेशनल एड्स और एसटीडी प्रोग्राम’ के लिए फंड में 392 करोड़ रु. की कटौती और आयुष के लिए 64 करोड़ रु. की कटौती कर दी गई है।
  6. आवास’ सरकारी अनुमानों के अनुसार वर्तमान में शहरी क्षेत्रों में लगभग 18.7 करोड़ घरों की कमी है, जो 2022 तक 30 करोड़ तक बढ़ जाने का अनुमान है। 11 जून, 2014 को नरेंद्र मोदी ने ‘2022 तक सभी को घर’ देने का वायदा किया था। अपने खुद के वायदे के विपरीत उन्होंने आवास क्षेत्र के लिए दी जाने वाली राशि में 4376 करोड़ रु. की भारी कटौती कर दी है।
  7. स्वच्छ भारत अभियान’ 02 अक्टूबर, 2014 को प्रधानमंत्री ने व्यापक प्रचार प्रसार, ढ़ेर सारे फोटो एवं अखबारी विज्ञापनों के बीच ‘स्वच्छ भारत अभियान’ का लॉन्च किया था। ‘पेयजलऔर साफ सफाई’ के लिए भी ऐसा ही किया गया। लेकिन मोदी सरकार ने ‘स्वच्छ भारत अभियान’ (पेयजल और साफ सफाई सहित) के लिए फंड में 9025 करोड़ रु. कम कर दिए हैं। स्वच्छ भारत अभियान अब मोदी सरकार का एक और राजनीतिक जुमला बन कर रह गया है।
  8. पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि’ का गठन न केवल पिछड़े जिलों में क्षेत्रीय असंतुलन को समाप्त करने के लिए किया गया था, बल्कि यह नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सीधे विकास भी सुनिश्चित करता था। मोदी सरकार ने इस योजना को पूर्णतया ताला लगा दिया है, और 5,900 करोड़ रु. का वार्षिक आबंटन निरस्त कर दिया है।
  9. खाद्य सुरक्षा पर प्रश्न चिन्ह’ कांग्रेस सरकार ने भारत की 67 प्रतिशत जनसंख्या के लिए प्रतिदिन हर व्यक्ति को 5 किलो अनाज प्रतिदिन 2 रु. प्रति किलोग्राम के मूल्य पर उपलब्ध करवाने के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून 2013 बनाया था।

 

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