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मनी लॉन्ड्रिंग मामला: ईडी ने विक्रमादित्य के खिलाफ दाखिल की सप्लीमेंट्री चार्जशीट

शिमलाः मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जूझ रहे हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। शनिवार को ईडी ने अदालत में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है। इस चार्जशीट में उसने वीरभद्र के बेटे विक्रमादित्य को आरोपी बनाया है। अदालत इस अनुपूरक चार्जशीट पर 24 जुलाई को विचार करेगी। मामले में इससे पहले 25 अप्रैल को वीरभद्र पटियाला हाउस कोर्ट में पेश हुए थे। उस दिन ही कोर्ट ने दस्तावेजों का परीक्षण किया था। वहीं, 22 मार्च को कोर्ट ने वीरभद्र और उनकी पत्नी समेत सभी नौ आरोपियों को 50-50 हजार रुपए के मुचलके पर जमानत दी थी। हालांकि कोर्ट ने दोनों को कहा था कि वे आरोप तय होने के बाद कोर्ट में पेश हों।

पटियाला हाउस कोर्ट के विशेष न्यायाधीश अरविंद कुमार ने इस मामले को 24 जुलाई को विचार करने के लिए तय किया, जब वह फैसला करेंगे कि अंतिम रिपोर्ट की संज्ञान लेना है या नहीं।

उल्लेखनीय है कि आनंद चौहान को ईडी ने 8 जुलाई 2017 को चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया था। मनी लॉन्ड्रिंग केस में जांच एजेंसी ने वीरभद्र सिंह, पत्नी प्रतिभा सिंह के अलावा यूनिर्वसल एप्पल एसोसिएट के मालिक चुन्नी लाल चौहान, प्रेम राज और लवण कुमार रोच को आरोप पत्र में नामजद किया है। इन पर मनी लांड्रिंग रोकथाम अधिनियम की धाराएं लगाई गई हैं।

ईडी का आरोप है कि वीरभद्र ने 28 मई 2009 से 18 जनवरी 2011 और 19 जनवरी 2011 से 26 जून 2012 के दौरान केंद्रीय मंत्री रहते हुए आय से अधिक संपत्ति बनाई है जो कि पूरी तरह अवैध है। इतना ही नहीं, उनके आरोप के मुताबिक काले धन को उन्होंने अन्य आरोपियों व आनंद सिंह की मदद से बीमा में निवेश किया। सीबीआई की शुरुआती जांच में पाया गया कि वीरभद्र ने 6.3 करोड़ रुपए की संपत्ति बनाई है और अपने पद का दुरुपयोग किया।

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