बीपीएल सूची में पारर्शिता लाने के लिए दिशा निर्देशों में संशोधन

बीपीएल सूची में पारर्शिता लाने के लिए दिशा निर्देशों में संशोधन

शिमला: प्रदेश सरकार द्वारा गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन कर रहे परिवारों ‘बीपीएल’ के चयन की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों में संशोधन किया है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के एक प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि अब प्रत्येक बीपीएल परिवार के मुखिया को ग्राम पंचायत के पास एक घोषणा पत्र देना होगा जिसमें स्पष्ट रूप से यह दर्शाना होगा कि उनके परिवार के पास दो हैक्टेयर से ज्यादा असिंचित भूमि या एक हैक्टेयर से ज्यादा सिंचित भूमि नहीं है और उसका परिवार आयकर नहीं देता है। उसके परिवार की वेतन पेंशन, भत्ते, मानदेय, मजदूरी तथा व्यवसाय आदि से नियमित मासिक आय 2500 रुपये से अधिक नहीं है और परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी अथवा गैर सरकारी नौकरी में नियमित या अनुबन्ध आधार पर कार्यरत नहीं है।

प्रवक्ता ने बताया कि ‘बीपीएल’ के कम से कम एक परिवार के सदस्य (दिव्यांग व 70 वर्ष की आयु से अधिक सदस्यों के सिवाय) मनरेगा में एक वर्ष में कम से 20 दिन कार्य करना अनिवार्य बनाया गया है। यदि कोई परिवार इस शर्त को पूर्ण नहीं कर पाता है तो ग्रामसभा द्वारा ऐसे परिवार का नाम बीपीएल सूची से काट दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बीपीएल परिवार के कम से कम एक पात्र सदस्य को दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशलय योजना या राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में स्थानीय स्तर पर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी।

प्रवक्ता ने बताया कि यदि बीपीएल परिवार का कोई सदस्य अलग परिवार के रूप में अपना नाम दर्ज करने के लिए ग्राम पंचायत में आवेदन करता है तो उस स्थिति में ऐसे नए परिवार को आगामी तीन वर्षों तक बीपीएल सूची में शामिल नहीं किया जाएगा तथा अविवाहित लोगों का परिवार बीपीएल के लिए अलग परिवार नहीं माना जाएगा।

प्रवक्ता ने कहा कि ऐसी ग्राम पंचायतें जहां अब एक भी परिवार बीपीएल में नहीं है, उन ग्राम पंचायतों के बीपीएल परिवारों के लक्ष्यों को सम्बन्धित उपायुक्तों द्वारा उसी विकास खण्ड की अन्य ग्राम पंचायतों में पूर्व आंबटित लक्ष्य के समानुपात बांटा जाएगा तथा विकास खण्ड व जिले का बीपीएल लक्ष्य पूर्ववत ही रहेगा। उन्होंने बताया कि बीपीएल मुक्त ग्राम पंचायतों को प्रोत्साहन के लिए विभाग द्वारा विशेष अनुदान/योजना का प्रावधान किया जाएगा।

प्रवक्ता ने बताया कि विभाग द्वारा प्रदेश में हर वर्ष अपै्रल माह में होने वाली ग्रामसभा की प्रथम बैठक में ग्राम पंचायत की बीपीएल सूची की समीक्षा की जाएगी।

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