पदमश्री पालेकर ने प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन शून्य लागत प्राकृतिक खेती पर दी किसानों को जानकारी

प्रदेश में विभिन्न योजनाओं के तहत कृषि मशीनीकरण के लिए 38.23 करोड़ के बजट प्रावधान : कृषि निदेशक

  • कृषि निदेशक का किसानों से आग्रह: कृषि योजनाओं का लाभ लेने हेतु अपने निकटतम कृषि अधिकारी से करें सम्पर्क
  • विभाग द्वारा किसानों को बड़े स्तर पर ट्रैक्टर, पावर टिलर व पावर वीडर इत्यादि उपदान पर उपलब्ध
  • गेहूँ व धान की फसलों हेतू उपयोग आने वाले उपकरण रीपर कम वाइंडर पर 50 भी प्रतिशत या अधिकतम 1.25 लाख रूपये की सहायता उपलब्ध
  • गेहूँ व धान की फसलों हेतू उपयोग आने वाले उपकरण रीपर कम वाइंडर पर 50 भी प्रतिशत या अधिकतम 1.25 लाख रूपये की सहायता उपलब्ध
  • प्रदेश सरकार द्वारा किए जाएंगे इस वर्ष से कृषि उपकरण सुविधा केंद्र (कस्टम हायरिंग सेन्टर) स्थापित
  • केन्द्रों की स्थापना के लिये प्रदेश सरकार द्वारा किसानों/युवा उद्यमियों को 25 लाख रूपये की राशि तक की मशीनरी पर 40 प्रतिशत उपदान दिया जाएगा

मशीनीकरण आधुनिक कृषि का एक महत्वपूर्ण अंग है। बहुफसली सघन खेती की सफलता के लिए यह आवश्यक है कि सभी  कृषि कार्यों को समय पर तथा कुशलता से निपटाया जाये। इस कार्य को कुशल तथा आसानी से चलाई जा सकने वाली मशीनों तथा उपकरणों से ही किया जा सकता है। मशीनों तथा उपकरणों से कृषि कार्यों को करने में आसानी होती है, कार्य शीघ्रता से निपटाया जाता है तथा कार्य के लिये किया जा रहा अनावश्यक श्रम भी कम होता है। मशीनों से किसानों की कार्य क्षमता तथा आमदनी बढ़ती है। खेती की लागत कम होती है तथा उत्पाद की गुणवत्ता बढ़ती है। कृषि विभाग द्धारा निरन्तर प्रयत्न किया जा रहा है कि किसानों को नयी नयी सुधरी हुई आधुनिक मशीनें तथा उपकरण उपलब्ध करवाये जायें।  प्रदेश की भौगोलिक स्थिति तथा खेतों के छोटे आकार के कारण अधिक भारी मशीनरी का प्रयोग नहीं किया जा सकता।

कृषि निदेशक का किसानों से आग्रह: कृषि योजनाओं का लाभ लेने को अपने निकटतम कृषि अधिकारी से करें सम्पर्क

कृषि निदेशक का किसानों से आग्रह: कृषि योजनाओं का लाभ लेने को अपने निकटतम कृषि अधिकारी से करें सम्पर्क

यह जानकारी देते हुये कृषि निदेशक डॉ. देस राज ने बताया कि इस वर्ष विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं के अर्न्तगत कृषि मशीनीकरण कार्यक्रम पर कुल 38.23 करोड़ रुपये व्यय किये जायेंगे। कृषि अभियान्त्रिकी के अर्न्तगत सरकार द्वारा पहाड़ी खेती के मशीनीकरण हेतु प्रदेश के किसानों में नये विकसित उपकरण तथा आधुनिक मशीनरी को प्रचलित किया जा रहा है। विभाग द्वारा किसानों को बड़े स्तर पर ट्रैक्टर, पावर टिलर व पावर वीडर इत्यादि उपदान पर उपलब्ध करवायें जा रहे है। वर्ष 2018-19 में प्रदेश के किसानों को  ट्रैक्टर 8-20 हार्स पावर 50 प्रतिशत उपदान अधिकतम सीमा 2.25 लाख रूपये, 20-40 हार्स पावर 50 प्रतिशत उपदान अधिकतम सीमा 3.00 लाख रूपये, 40-70हार्स पावर 50 प्रतिशत उपदान अधिकतम सीमा 5.00 लाख रूपये, पावर टिलर 8 हार्स पावर तक 50 प्रतिशत उपदान अधिकतम सीमा 65 हजार रूपये व 8 हार्स पावर से अधिक क्षमता के पावर टिलर पर 50 प्रतिशत उपदान अधिकतम सीमा 85 हजार रूपये तथा पावर वीडर 2 बी एच पी ईंजन क्षमता तक पर 50 प्रतिशत उपदान अधिकतम सीमा 25 हजार रूपये के आधार पर उपलब्ध कराये जा रहे हैं। गेहूँ व धान की फसलों हेतू उपयोग आने वाले उपकरण रीपर कम वाइंडर पर 50 भी प्रतिशत या अधिकतम 1.25 लाख रूपये की सहायता उपलब्ध है।

हस्तचलित व ऊर्जा चलित स्प्रे पम्पों पर भी 50 प्रतिशत उपदान उपलब्ध है। सीड ड्रिल (20 वीएचपी से 35 वीएचपी तक) पर 50 प्रतिशत या अधिकतम 15000 से 44000 रूपये तक की सहायता का प्रावधान है। पंप सेट पर 50 प्रतिशत या अधिकतम 10 हजार रूपये की सहायता का प्रावधान है। रोटावेटर (20 वीएचपी से 35 वीएचपी तक) पर 50 प्रतिषत या अधिकतम 35000 से 63000 रूपये तक की सहायता का प्रावधान है। मल्टी क्राप थ्रैशर  (20 वीएचपी से 35 वीएचपी तक) पर 50 प्रतिषत या अधिकतम 20000 से 63000 रूपये तक की सहायता का प्रावधान है।

उन्होंने आगे बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा इस वर्ष से कृषि उपकरण सुविधा केंद्र (कस्टम हायरिंग सेन्टर) स्थापित किये जायेगें जिनके माध्यम से गरीब किसान/ बागवान किराये पर उपकरण प्राप्त कर सकेगें। इन केन्द्रों की स्थापना के लिये प्रदेश सरकार द्वारा किसानों/युवा उद्यमियों को 25 लाख रूपये की राशि तक की मशीनरी पर 40 प्रतिशत उपदान दिया जाएगा। डॉ. देस राज ने बताया कि उपरोक्त के अतिरिक्त इस वर्ष 1,00,000 से अधिक सुधरे औजार किसानों में बांटे जायेगें। खरीफ, 2018 के लिए 60,000 सुधरे औजारों का प्रबन्ध कर लिया गया है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे कृषि योजनाओं का लाभ उठाने के लिये अपने निकटतम कृषि अधिकारी से सम्पर्क करें।

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