कूड़े-कचरे से बनाया जाएगा बिजली, पानी व ईंधन

कूड़े-कचरे से बनाया जाएगा बिजली, पानी व ईंधन

  •  जर्मनी की कंपनी और नगर परिषद ऊना के बीच एमओयू साईन

ऊना : ऊना के लोगों को जल्द कूड़े-कचरे की समस्या से तो निजात मिलने ही वाली है लेकिन बड़ी बात यह है कि इस कूड़े-कचरे से बिजली, पानी और ईधन बनाया जाएगा। ग्रीन ऊना-क्लीन ऊना के नारे को मूर्तरूप देने तथा जिला को कचरामुक्त बनाने के लिए नगर परिषद ऊना व जिला प्रशासन ने एजी डॉटर्स कंपनी के साथ करार किया है। यूएसए के बाद ऊना में ऐसी तकनीक से कूड़े को रि-साइकिल करने का यह देश का पहला प्लांट होगा,जिससे कूड़े से एक नही बल्कि तीन-तीन जरूरतें पूरी होंगी।

अब ऊना पूरी तरह से कूड़ामुक्त होगा। इसमें भी खास बात यह है कि इसके लिए सारा इन्वेस्टमेंट एफडीआई (फौरन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट) के माध्यम से होगा। 160 करोड़ से लगने वाले इस प्लांट का सारा खर्च कंपनी स्वयं वहन करेगी। प्रदेश सरकार को इसके लिए केवल कंपनी को जमीन उपलब्ध करवानी होगी। कंपनी स्वयं ही लोगों के घरद्वार से जाकर कूड़ा-कचरा उठाएगी। पहले चरण में शहर व इसके पास-पास के क्षेत्रों को कूड़े-कचरे से मुक्त किया जाएगा, जिसके बाद दूसरे चरण में इसे ग्रामीण स्तर पर लागू किया जाएगा और पंचायत समितियों के माध्यम से कपंनी को गांवों से कूड़ा लाकर दिया जाएगा। कंपनी का दावा है कि वे अपनी तकनीक से ऊना के गार्बेज से जिलावासियों को पानी, बिजली और ईंधन उपलब्ध करवाएगी। कंपनी जिला के 20 मीट्रिक टन कूड़े से दस मेगावाट बिजली बनाएगी। कंपनी ने यह भी दावा किया है इस तकनीक से कोई भी धुआं नही निकलेगा और न ही किसी तरह की राख बनेगी। जिससे ऊना की आबोहवा को बिना प्रदूषित किए ही कचरामुक्त किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए डीसी ऊना की अध्यक्षता में एक विशेष बैठक कंपनी के एमडी अजय गिरोत्रा, नप अध्यक्ष बाबा अमरजोत तथा भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सत्ती की मौजूदगी में हुई। बैठक के दौरान कंपनी व नगर परिषद में लिखित रूप से कूड़ा निष्पादन का करार हुआ है।

अब जिला प्रशासन ने इस प्लांट के लिए जमीन की तलाश भी शुरू कर दी है। वहीं नगर परिषद अध्यक्ष बावा अमरजोत सिंह बेदी का कहना है कि गार्बेज को रि-साइकिल करने के लिए एजी कंपनी के साथ करार हुआ है, जिसकी सभी औपचारिकताएं पूर्ण कर ली गई हैं। अब जमीन मिलते ही इस पर कार्य शुरू होगा।  जिला में इस प्लांट को लगाने के लिए करीब तीन एकड़ जमीन की आवश्यकता है, जिसके लिए कंपनी ने नगर परिषद ऊना व प्रदेश सरकार से मांग की है। अगर प्रदेश सरकार कंपनी को जमीन उपलब्ध करवाती है तो नौ महीनों में ही यह प्लांट बनकर तैयार हो जाएगा।

 

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