हिमाचल के सभी ज़िला अस्पताल बनेंगे ई-अस्पताल: केन्द्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद

हिमाचल के सभी ज़िला अस्पताल बनेंगे ई-अस्पताल: केन्द्रीय मंत्री रवि शंकर

  • शिमला में एसटीपीआई इंक्यूबेशन सेंटर की आधारशिला रखी गई
  • 50 गांवों को डिजिटल गांवों के रूप में किया जाएगा विकसित

शिमला: मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आज यहां केन्द्रीय इलेक्ट्रानिक्स, सूचना एवं प्रोद्यौगिकी और कानून एवं न्याय मंत्री रवि शंकर प्रसाद के साथ शिमला इंक्यूबेशन सेंटर ऑफ सॉफ्टवेयर टेक्नालॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) की आधारशिला रखी। यह केन्द्र शिमला के समीप मेहली में स्थापित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने इस अवसर पर कहा कि प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने के उद्देश्य से हिमाचल सरकार ने लोगों को सूचना प्रोद्यौगिकी आधारित सेवाएं प्रदान करने के लिए कई कदम उठाए हैं। जय राम ठाकुर ने कहा कि इंक्यूबेशन की सुविधा सहित इस पार्क को 14000 वर्गमीटर क्षेत्र में विकसित किया जाएगा, जिस पर 10 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत आएगी। इस पार्क में लगभग 15 से 20 स्टार्टअप कम्पनियों को स्थान उपलब्ध होगा और पांच वर्षों की अवधि में प्रत्यक्ष रूप से 300 से 400 आईटी व्यवसायियों को रोज़गार मिलने के साथ-साथ इससे लगभग चार गुना रोज़गार अप्रत्यक्ष रूप से प्रदान किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के कांगड़ा ज़िला में गगल हवाई अड्डे के समीप एक अन्य एसटीपीआई स्थापित करने का भी प्रस्ताव है, जिसके लिए भूमि का चयन कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने अपने प्रारम्भिक सौ दिनों के लिए दस लक्ष्य निर्धारित किए थे, जिनमें से नौ पहले ही हासिल कर लिए गए हैं और दसवां लक्ष्य इस केन्द्र की आधारशिला रखे जाने के बाद पूरा हो गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पार्क नए सूचना प्रोद्यौगिकी और सूचना प्रोद्यौगिकी आधारित सेवा क्षेत्र में उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ रोज़गार के अवसर सृजित करने की दिशा में कारगर साबित होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 2858 लोकमित्र केन्द्रों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में 113 सरकारी सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। भारत नेट परियोजनाओं के प्रथम चरण में 251 पंचायतों में से 221 पंचायतों को हाई स्पीड इंटरनेट सुविधा प्रदान की गई है जबकि शेष 2785 पंचायतों को परियोजना के दूसरे चरण के अंतर्गत शामिल करने का कार्य प्रगति पर है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में डिजिटल अधोसरंचना को सुदृढ़ बनाने के लिए  सूचना प्रोद्यौगिकी विभाग में हिम-स्वान नेटवर्क और राज्य डाटा केन्द्र स्थापित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि डाटा सेंटर के विस्तार के लिए केन्द्र सरकार से 32.86 करोड़ रुपये की धनराशि की आवश्यकता है। राज्य के दूर-दराज और जनजातीय क्षेत्रों में इंटरनेट क्नेक्टिविटी में सुधार की आवश्यकता है तथा इन क्षेत्रों के सामरिक महत्व को देखते हुए केन्द्र सरकार को यहां विभिन्न परियोजनाओं के कार्यान्वयन को विशेष प्राथमिकता देनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दूर-दराज क्षेत्रों में रह रहे लोगों को विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से कम से कम सभी ज़िला अस्पतालों में ई-अस्पताल की सुविधाएं प्रदान करना आवश्यक है। उन्होंने केन्द्रीय मंत्री से इस दिशा में सहायता प्रदान करने का आग्रह किया। उन्होंने प्रदेश के सभी छः राजकीय मेडिकल कॉलेजों में भी इसी प्रकार की सुविधाएं देने का अनुरोध किया।

जय राम ठाकुर ने कहा कि ई-डिस्ट्रीक्ट परियोजना के अंतर्गत 52 सेवाएं ऑनलाईन उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इस परियोजना के अंतर्गत केन्द्र सरकार से 9.23 करोड़ रुपये के हिस्से की तुरन्त आवश्यकता है। राज्य सरकार डिजिटल लेन-देन को विशेष तौर पर प्रोत्साहित कर रही है, जिसके लिए 8.26 लाख रूपे कार्ड जारी किए गए हैं। सरकार का अधिकतम लेन-देन जैसे बस टिकट, होटल बुकिंग, बिजली बिलों का भुगतान, राज्य कोषागार में समस्त लेन-देन और कर की अदायगी आदि ऑनलाईन किया जा रहा है।

इस अवसर पर अपने सम्बोधन में केन्द्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि एसटीपीआई इकाईयों ने निर्यात में उल्लेखनीय विकास किया है। देश में आईटी निर्यात वर्ष 1992-93 में 52 करोड़ रुपये था जो वर्ष 2016-17 में बढ़कर 3,50,680 करोड़ रुपये हो गया है, इससे यह साबित होता है कि एसटीपीआई ने ब्रांड इंडिया बनाने और देश को विश्व का सर्वाधिक पसंदीदा गंतव्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके अलावा एसटीपीआई ने देश के टीयर 2 व 3 शहरों में आईटी उद्योग को बढ़ावा देने में भी निर्णायक भूमिका निभाई है।

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि वर्तमान केन्द्र सरकार ने जब सत्ता संभाली थी उस समय देश में केवल दो मोबाइल उत्पादक फैक्ट्रियां थीं, जिनकी संख्या बढ़ कर अब 120 हो गई है। उन्होंने कहा कि हिमाचल की जलवायु इलेक्ट्रानिक्स के लिए अनुकूल है और राज्य को देश के प्रमुख इलेक्ट्रानिक उत्पादक केन्द्र के रूप में विकसित किया जा सकता है।

उन्होंने घोषणा की कि हिमाचल प्रदेश के सभी ज़िला अस्पतालों को ई-अस्पताल बनाया जाएगा। उन्होंने एनआईसी को इस दिशा में तुरन्त कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी घोषणा की कि मंडी में शीघ्र ही नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रानिक्स एण्ड इंफारमेशन टैक्नालॉजी स्थापित किया जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि प्रदेश के 50 गांवों को डिजिटल गांव बनाया जाएगा।

रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि शिमला में एसटीपीआई इंक्यूबेशन सुविधा होने से यह आईटी/आईटीईएस/ईएसडीएम इकाईयों के लिए संसाधन केन्द्र के रूप में कार्य करेगा। इससे इंक्यूबेशन स्पेस, हाई स्पीड डाटा कम्युनिकेशन, निर्बाध डेटा क्नेक्टिविटी और निर्यात के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे सूचना प्रोद्यौगिकी के क्षेत्र में युवाओं को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर भी प्राप्त होंगे। इसके अलावा इस सुविधा के मिलने से क्षेत्र को देश के पंसदीदा सूचना प्रोद्यौगिकी गंतव्य के रूप में भी उभारा जा सकेगा।

कृषि एवं सूचना प्रोद्यौगिकी मंत्री डॉ. रामलाल मारकण्डा ने इस अवसर पर कहा कि रवि शंकर प्रसाद के प्रयासों से शिमला में इस पार्क की आधारशिला रखी गई है। यह प्रदेश का ऐसा दूसरा पार्क होगा। उन्होंने केन्द्रीय मंत्री से कांगड़ा ज़िला में भी एक पार्क स्थापित करने की मांग की।

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