राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा विकास खण्ड चम्बा में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित

राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा विकास खण्ड चम्बा में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित

  • ग्रामीण क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए नए विचारों को उत्पन्न करने की आवश्यकता : हंसराज

चंबा : हिमाचल प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड (एच.पी.एस.बी.बी) द्वारा विकास खण्ड चम्बा में सोमवार (11 जून) को एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें जैव विविधता और इसके संरक्षण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। इस कार्यशाला का आयोजन कुकरेजा पैलेस, खजियार रोड, मोहल्ला सुल्तानपुर में किया गया। जिसमें विकास खण्ड चम्बा के जिला परिषद के सदस्यों, पंचायत समिति के सदस्यों, जिला चम्बा के पंचायत प्रधान और सम्बंधित विभाग के अधिकारी मुख्य रूप से वन, कृषि, बागवानी, मत्स्य पालन, शिक्षा, पशुपालन, आयुर्वेद आदि के प्रतिनिधि और संबंधित हितधारकों ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य “जैव विविधता को मुख्यधारा में लाना, स्थानीय लोग और उनकी आजीविका को कायम रखना है।

इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश विधानसभा के उप सभापति हंसराज मुख्य अतिथि रहे। इस दौरान हंसराज ने कहा कि जैव विविधिता संरक्षण के लिए जैव विविधता अधिनियम 2002 और नियम 2004 महत्वपूर्ण मापदंड प्रदान कराते है। हंसराज ने ग्रामीण क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए नए विचारों को उत्पन्न करने की आवश्यकता पर भी ज़ोर डाला और राज्य जैव विविधता की सभी अनूठी विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए इसके संरक्षण के प्रति सभी हितधारकों को जैविक विविधता अधिनियम 2002 और नियम 2004 के प्रति जागरूक रहने की हिदायत दी।

जैवविविधता के महत्व और संबंधित मुद्दों के बारे में जैव विविधता प्रबंधन समितियों (बी.एम.सी) की भूमिका और जागरूकता बढ़ाने के लिए इस एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। राज्य में जैव-संसाधनों के संरक्षण और स्थायी उपयोग के बारे में जानकारी भी प्रदान की गयी। स्थानीय स्तर पर जैव विविधता प्रबंधन समितियों (बी.एम.सी) के गठन की प्रक्रिया, जैव विविधता प्रबंधन समितियों की भूमिका, जन जैव विविधता रजिस्टर (पी.बी.आर) की तैयारी और जिला चम्बा के जैव संसाधनों का लाभ साझाकरण (ए.बी.एस) प्रक्रिया को भी इस कार्यशाला में संबोधित किया गया।

जिला चंबा के ग्रामीण कारीगरों को वाणिज्यिक अवसर प्रदान करने और ग्रामीण कारीगरों के सामाजिक आर्थिक विकास करने के लिए हिमाचल प्रदेश काउंसिल फॉर साइंस, टेक्नोलॉजी एंड एनवायरनमेंट (हिमकोस्ट) के हिमाचल प्रदेश पेटेंट सूचना केंद्र (एच.पी.पी.आई.सी) के अधिकारियों ने भौगोलिक संकेत अधिनियम के बारे में प्रतिभागियों को शिक्षित करने के लिए भाग लिया। हिमकोस्ट ने जी.आई पंजीकरण प्राप्त करने की योजना बनाई है। इस उद्देश्य के लिए  उनके मूल, विशिष्टता और उत्पादन की विधि और कारीगरों/उत्पादकों की सूची का समर्थन करने वाले दस्तावेज एकत्र किए जा रहे हैं।

कार्यशाला का आयोजन कुणाल सत्यार्थी, सदस्य सचिव, हिमाचल प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड, शिमला की देख-रेख में किया गया। कुणाल सत्यार्थी ने प्रेस को जानकारी दी कि हिमाचल प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड (एच.पी.एस.बी.बी) ने चम्बा जिले में ग्राम पंचायत स्तर पर गठित 72 जैव विविधता प्रबंधन समितियों (बी.एम.सी) को अभी तक उन्नतीस लाख अस्सी हज़ार रूपए (रू. 29, 80,000/-) की राशी स्थानीय जैव विविधता फण्ड के रूप में जैव विविधता प्रबंधन समितियों (बी.एम.सी) के गठन और उनमें बनाने वाले जन जैव विविधता रजिस्टर (पी.बी.आर) की तैयारी के लिये विस्तृत कर दी है। डॉ. मोनिका, पुलिस अधीक्षक, चंबा, दीप्ति मंडोत्रा, एस.डी.एम, चंबा, निशांत मंडोत्रा, डी.एफ.ओ, वन्यजीव चंबा और संजीव कुमार डी.एफ.ओ चंबा कार्यशाला के दौरान उपस्थित रहे। हिमाचल प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड के अधिकारियों ने भी इस प्रशिक्षण कार्यशाला में भाग लिया।

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