आग में सुलगती “हिमाचल की वन संपदा”

हर वर्ष आग से राख हो रही “हिमाचल की करोड़ों की वन संपदा”

बढ़ते तापमान के साथ-साथ दहक रहे जंगल

बढ़ते तापमान के साथ-साथ दहक रहे जंग

(विशेष लेख)

हिमाचल प्रदेश की पहचान हरी-भरी वादियों ऊंचे-ऊंचे पर्वतों और हरे-भरे पेड़ पौधों से यानि हरियाली से है। ये हरे भरे पेड़-पौधे जहां हमारे पर्यावरण को दूषित होने से बचाते हैं। तो वहीं अगर बात की जाए वनों में रहने वाले वन्य जीव-जंतुओं की तो जाने कितनी प्रकार की प्रजातियां हमारे प्रदेश के वनों में पाई जाती हैं। इसके साथ ही बहुमूल्य जड़ी बूटियों की भी हमारे हिमाचल के वनों में कोई कमी नहीं है। लेकिन अफ़सोस! हमारी वन संपदा आए दिन खत्म होती जा रही है। कुछ स्वार्थ में अंधे होकर लोग वन संपदा को काट-काटकर छलनी करने पर तुले हुए हैं तो कुछ शातिर फूंक कर नष्ट कर देने पर। प्रदेश के ज्यादातर जिलों में आग बिलासपुर, काँगड़ा, मंडी, धर्मशाला व शिमला के जंगलों में लगती है। हालांकि  पिछले वर्ष 30 अपै्रल, 2018 तक 122 वनों की आग के मामले सामने आए थे जबकि इस वर्ष 8 मई तक वनों की आग के केवल 27 मामले दर्ज किए गए हैं। 

  • हरे-भरे वनों की शुद्ध हवा व शुद्ध वातावरण सबको खींच लाता है हिमाचल

हिमाचल की हरियाली को हिमाचल की शान समझा जाता है। दुनिया भर से लोग भारी तादाद में देवभूमि हिमाचल की हरी-भरी वादियों का दीदार करने पहुंचते हैं। हर व्यक्ति के लिए हरे भरे वनों की शुद्ध हवा सबको शुद्ध वातावरण प्रदान करती है। आपाधापी भरी दुनिया की दौड़ से दूर रहकर हर व्यक्ति कुछ सुकून भरी जिंदगी के शांति भरे पल बिताना चाहता है इसलिए वो हरी-भरी वादियों का रुख करता है और हिमाचल प्रदेश की पहचान हरी भरी वादियों ऊंचे-ऊंचे पर्वतों और हरे-भरे पेड़ पौधों व पहाड़ों से है। इसीलिए यहां की खूबसूरत वादियों को निहारने लोग देश-विदेशों से पहुंचते हैं। वहीं जलस्रोतों के संरक्षण और शुद्धिकरण में वन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे प्रदूषण करने वाले तत्वों को नदियों तक पहुँचने से रोकते हैं, बाढ़ रोकते हैं और भूमिगत जल के पुनर्भरण में वृद्धि करते हैं।

  • बढ़ते तापमान के साथ-साथ दहक रहे जंगल
  • हजारों वन्य जीव जन्तु, पशु-पक्षी भी सुलगते हुए जंगलों में चढ़ रहे मौत की बलि

हर वर्ष गर्मियों में हमारी वन संपदा पर गहरा घात किया जाता है। जहां आजकल प्रदेश में भारी गर्मी का प्रकोप है वहीं बढ़ते तापमान के साथ-साथ जंगल भी दहकते हैं। जो गर्मी को बढ़ाने में आग में घी डालने का काम करते  हैं। आग लगने से न केवल जंगल आग से धधकने लगते हैं अपितु जंगलों में आग लगने से हरे-भरे पेड़-पौधों के साथ-साथ हजारों वन्य जीव जन्तु, पशु-पक्षी भी सुलगते हुए जंगलों में मौत की बलि चढ़ जाते हैं। हमारे प्रदेश के वनों में बहुमूल्य जड़ी-बूटियां बहुतायत संख्या में पाई जाती हैं जिनकी औषधि बनाकर कई प्रकार की बीमारियों का इलाज किया जाता है। हरे-भरे बड़े-बड़े पेड़, छोटे-छोटे पौधे और जड़ी-बूटियां जहां हमारे पर्यावरण को दूषित होने से बचाते हैं वहीं आग से लाखों करोड़ों की वन संपदा को जो भारी नुकसान पहुंचता है वो अलग। कभी-कभी तो जंगल में रौद्र रूप धारण करने वाली आग से लोगों के मकानों को भी खतरा बढ़ने लग जाता है।

  • हरे-भरे वन वृक्ष हैं तो हम हैं, ये पृथ्वी है ये संसार है

लोगों दवारा जंगलों में आग लगाने का कृत्य किया जाता है बावजूद यह जानते हुए भी कि हरे-भरे वन वृक्ष हैं तो हम हैं, ये पृथ्वी है ये संसार है। फिर भी अपने स्वार्थ में अंधे लोग वन संपदा को नष्ट करने से बाज नहीं आते। वन संपदा पर वार-वार कर घात करते हैं। कहीं बेहतर पैदावार की चाह में  कुछ ग्रामीण  जंगलों में आग लगा रहे हैं, तो कुछ स्वार्थी जो पशुओं के चारे के लिए हरी-भरी घास की चाह के चलते जंगलों में आग लगा देते हैं, वहीं कुछ नशा करने वाले व कुछ शरारती तत्वों द्वारा भी वनों में आग लगा दी जाती है। जिसका खामियाजा  जंगलों के आसपास बसे लोगों, बेबस और बेजुबान वन्यजीवों व सालों से खड़े खामोश उन दरख्तों को भी भुगतना पड़ रहा है  जिनका कोई कसूर नहीं।

यह आवश्यक है और सबका कर्तव्य भी कि अपनी वन संपदा की हिफाजत करें उसका संरक्षण करें। वनों के संरक्षण हेतु हर वर्ष लाखों करोड़ों रूपये व्यय किए जाते हैं विभिन्न विभागों द्वारा काफी संख्या में प्रदेशभर में पेड़-पौधों को लगाने का अभियान छेड़ा जाता है। लोगों को वन संपदा बचाने हेतु जागरूक करने के लिए भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। लेकिन इसके बावजूद भी कुछ शरारती तत्वों द्वारा जंगलों में आग लगा दी जाती है। ऐसे लोगों को पकड़ा जाना चाहिए और उनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही अमल में लाई जानी चाहिए। यह तभी संभव है जब इसके लिए प्रदेश का हर व्यक्ति सहयोग करें।

  • टोल फ्री नंबर पर दें वनों में आग लगने की सूचना
  • जंगलों को आग से बचाने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया दल बनाया जाएगाः मुख्य सचिव

    हरे-भरे वनों की शुद्ध हवा व शुद्ध वातावरण सबको खींच लाता है हिमाचल

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मुख्य सचिव बी.के.अग्रवाल ने हाल ही में प्रदेश में वनों को आग से बचाने के लिए किए जा रहे उपायों की समीक्षा बारे आयोजित बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में वनों को आग से निपटने के लिए ‘त्वरित रिसपांस टीम’ (क्विक रिंस्पांस टीम) का गठन किया जाएगा जो गृह रक्षकों की मदद से वनों की आग को बुझाएगी।  उन्होंने बताया कि प्रदेश के 80 संवेदनशील वन डिवीजनों में चौबीस घंटे फॉरेस्ट स्टॉफ के अतिरिक्त विभाग के कर्मचारी वनों की सुरक्षा के लिए तैनात किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि त्वरित रिसपांस टीम बिना किसी विलम्ब के आपातकाल में वनों की आग से सुरक्षा के लिए जिम्मेवार होगी। मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश में 196 फॉरेस्ट रेंज हैं जिनमें से 80 वन परिक्षेत्र आग की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील हैं। उन्होंने कहा कि सड़कों के साथ लगने वाले वन क्षेत्रों में फायर ब्रिगेड को हमेशा तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। होमगार्ड को अग्निशमन किट तथा अग्नि प्रतिरोधक वर्दी को हमेशा तैयार रखने को कहा गया है। बी.के.अग्रवाल ने वन अधिकारियों को नई तकनीक तथा तरीकों के साथ जंगल की आग बुझाने के लिए स्थानीय लोगों के पारम्परिक तरीकों का भी पता लगाने को कहा। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों द्वारा आग बुझाने में मदद करने पर उन्हें जिला स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने वन नियंत्रण कक्ष के दूरभाष नम्बर क्रमशः 1077 तथा 1070 को प्रदेश तथा जिला आपदा प्रबन्धन के नियंत्रण कक्ष के दूरभाष नम्बर के साथ जोड़ने के निर्देश दिए। यह दूरभाष नम्बर वनों में लगने वाली आग की सूचना सम्बन्धित अधिकारियों को शीघ्र जानकारी उपलब्ध करवाने के लिए प्रयोग में लाए जाएंगे।

अतिरिक्त मुख्य सचिव (वन) राम सुभग सिंह ने इस अवसर पर कहा कि वन इस प्रदेश की अमूल्य धरोहर हैं, जिसकी सुरक्षा तथा संरक्षण करना हमारा कर्तव्य है। त्वरित रिसपांस टीम (क्विक रिंस्पांस टीम) का गठन तथा अन्तर विभागीय सहयोग प्रदेश के जंगलों की सुरक्षा तथा संरक्षण के लिए अह्म भूमिका निभाएगा।  उन्होंने कहा कि 28 अग्नि संवेदनशील वन मण्डलों में इस मौसम में एक वाहन पानी की टंकियो, लिफ्टिंग मोटर तथा पाइप के साथ उपलब्ध करवाया गया है तथा दूसरा वाहन अतिशीघ्र उपलब्ध करवाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि वनों की आग से सुरक्षा बारे लोगों को जागरूक करने के लिए चार वाहन प्रयोग में लाए जा रहे हैं। प्रदेश आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण के सहयोग से प्रदेश के 11 जिलों के 68 क्षेत्रों में वनों की आग से सुरक्षा बारे इस वर्ष 22 मार्च से 30 मार्च, 2019 तक जनजागरण अभियान चलाया गया।

पीसीसीएफ अजय शर्मा ने बताया कि फोरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया के साथ रैपिड फोरेस्ट फायर फोर्स को पंजीकृत किया गया है, जिसके माध्यम से 11000 से अधिक स्वयंसेवक, गैर सरकारी संगठन तथा पीआरआई के सदस्य अपने-अपने क्षेत्रों में जंगल की आग बारे अलर्ट का एसएमएस प्राप्त करते हैं। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा देश में सबसे अधिक है तथा निकट भविष्य में इसकी संख्या 20 हजार से अधिक होने की सम्भावना है।  

  • आइये हम सब अपने वनों की हिफ़ाजत करें। मिलकर वन सरंक्षण का दायित्व निभाएं। क्योंकि “वन” सिर्फ हिमाचल की खूबसूरती को ही खराब नहीं करते, अपितु वनों के साथ साथ कीमती जडी-बूटियां और जंगली पशु पक्षियों की भी भारी क्षति होती है।

 

 

 

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