आग में सुलगती “हिमाचल की वन संपदा”

आग में सुलगती “हिमाचल की वन संपदा”

बढ़ते तापमान के साथ-साथ दहक रहे जंगल

बढ़ते तापमान के साथ-साथ दहक रहे जंगल

(विशेष लेख)

हिमाचल प्रदेश की पहचान हरी-भरी वादियों ऊंचे-ऊंचे पर्वतों और हरे-भरे पेड़ पौधों से यानि हरियाली से है। ये हरे भरे पेड़-पौधे जहां हमारे पर्यावरण को दूषित होने से बचाते हैं। तो वहीं अगर बात की जाए वनों में रहने वाले वन्य जीव-जंतुओं की तो जाने कितनी प्रकार की प्रजातियां हमारे प्रदेश के वनों में पाई जाती हैं। इसके साथ ही बहुमूल्य जड़ी बूटियों की भी हमारे हिमाचल के वनों में कोई कमी नहीं है। लेकिन अफ़सोस! हमारी वन संपदा आए दिन खत्म होती जा रही है। कुछ स्वार्थ में अंधे होकर लोग वन संपदा को काट-काटकर छलनी करने पर तुले हुए हैं तो कुछ शातिर फूंक कर नष्ट कर देने पर। प्रदेश के ज्यादातर जिलों में आग बिलासपुर, काँगड़ा, मंडी, धर्मशाला व शिमला के जंगलों में लग रही है। रोजाना 100 से अधिक जगह जंगल जल रहे हैं। मार्च से अब तक प्रदेश में करीब 641 जगहों पर आग लग चुकी है। वहीं बीते चार दिनों में राज्य में आगज़नी के 300 से भी ज़्यादा मामले सामने आए हैं।

  • हरे-भरे वनों की शुद्ध हवा व शुद्ध वातावरण सबको खींच लाता है हिमाचल

हिमाचल की हरियाली को हिमाचल की शान समझा जाता है। दुनिया भर से लोग भारी तादाद में देवभूमि हिमाचल की हरी-भरी वादियों का दीदार करने पहुंचते हैं। हर व्यक्ति के लिए हरे भरे वनों की शुद्ध हवा सबको शुद्ध वातावरण प्रदान करती है। आपाधापी भरी दुनिया की दौड़ से दूर रहकर हर व्यक्ति कुछ सुकून भरी जिंदगी के शांति भरे पल बिताना चाहता है इसलिए वो हरी-भरी वादियों का रुख करता है और हिमाचल प्रदेश की पहचान हरी भरी वादियों ऊंचे-ऊंचे पर्वतों और हरे-भरे पेड़ पौधों व पहाड़ों से है। इसीलिए यहां की खूबसूरत वादियों को निहारने लोग देश-विदेशों से पहुंचते हैं। वहीं जलस्रोतों के संरक्षण और शुद्धिकरण में वन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे प्रदूषण करने वाले तत्वों को नदियों तक पहुँचने से रोकते हैं, बाढ़ रोकते हैं और भूमिगत जल के पुनर्भरण में वृद्धि करते हैं।

  • बढ़ते तापमान के साथ-साथ दहक रहे जंगल
  • हजारों वन्य जीव जन्तु, पशु-पक्षी भी सुलगते हुए जंगलों में चढ़ रहे मौत की बलि
टोल फ्री नंबर पर दें वनों में आग लगने की सूचना

टोल फ्री नंबर पर दें वनों में आग लगने की सूचना

हर वर्ष गर्मियों में हमारी वन संपदा पर गहरा घात किया जाता है। जहां आजकल प्रदेश में भारी गर्मी का प्रकोप है वहीं बढ़ते तापमान के साथ-साथ जंगल भी दहक रहे हैं। जो गर्मी को बढ़ाने में आग में घी डालने का काम कर रहे हैं। आग लगने से न केवल जंगल आग से धधकने लगते हैं अपितु जंगलों में आग लगने से हरे-भरे पेड़-पौधों के साथ-साथ हजारों वन्य जीव जन्तु, पशु-पक्षी भी सुलगते हुए जंगलों में मौत की बलि चढ़ जाते हैं। हमारे प्रदेश के वनों में बहुमूल्य जड़ी-बूटियां बहुतायत संख्या में पाई जाती हैं जिनकी औषधि बनाकर कई प्रकार की बीमारियों का इलाज किया जाता है। हरे-भरे बड़े-बड़े पेड़, छोटे-छोटे पौधे और जड़ी-बूटियां जहां हमारे पर्यावरण को दूषित होने से बचाते हैं वहीं आग से लाखों करोड़ों की वन संपदा को जो भारी नुकसान पहुंचता है वो अलग। कभी-कभी तो जंगल में रौद्र रूप धारण करने वाली आग से लोगों के मकानों को भी खतरा बढ़ने लग जाता है।

  • हरे-भरे वन वृक्ष हैं तो हम हैं, ये पृथ्वी है ये संसार है

लोगों दवारा जंगलों में आग लगाने का कृत्य किया जाता है बावजूद यह जानते हुए भी कि हरे-भरे वन वृक्ष हैं तो हम हैं, ये पृथ्वी है ये संसार है। फिर भी अपने स्वार्थ में अंधे लोग वन संपदा को नष्ट करने से बाज नहीं आते। वन संपदा पर वार-वार कर घात करते हैं। कहीं बेहतर पैदावार की चाह में  कुछ ग्रामीण  जंगलों में आग लगा रहे हैं, तो कुछ स्वार्थी जो पशुओं के चारे के लिए हरी-भरी घास की चाह के चलते जंगलों में आग लगा देते हैं, वहीं कुछ नशा करने वाले व कुछ शरारती तत्वों द्वारा भी वनों में आग लगा दी जाती है। जिसका खामियाजा  जंगलों के आसपास बसे लोगों, बेबस और बेजुबान वन्यजीवों व सालों से खड़े खामोश उन दरख्तों को भी भुगतना पड़ रहा है  जिनका कोई कसूर नहीं।

यह आवश्यक है और सबका कर्तव्य भी कि अपनी वन संपदा की हिफाजत करें उसका संरक्षण करें। वनों के संरक्षण हेतु हर वर्ष लाखों करोड़ों रूपये व्यय किए जाते हैं विभिन्न विभागों द्वारा काफी संख्या में प्रदेशभर में पेड़-पौधों को लगाने का अभियान छेड़ा जाता है। लोगों को वन संपदा बचाने हेतु जागरूक करने के लिए भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। लेकिन इसके बावजूद भी कुछ शरारती तत्वों द्वारा जंगलों में आग लगा दी जाती है। ऐसे लोगों को पकड़ा जाना चाहिए और उनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही अमल में लाई जानी चाहिए। यह तभी संभव है जब इसके लिए प्रदेश का हर व्यक्ति सहयोग करें।

  • टोल फ्री नंबर पर दें वनों में आग लगने की सूचना
  • सरकार वन अग्नि के प्रति संवेदनशील : वन मंत्री गोविन्द ठाकुर

वन मंत्री गोविन्द ठाकुर ने हाल ही में पर्यावरणीय पर्यटन की समीक्षा बैठक की। जिसमें वनों में आगजनी की घटनाएं रोकने पर भी विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। इस संबंध में मंत्री ने एक ठोस योजना तैयार करने के निर्देश दिए ताकि वनों को आगजनी से बचाया जा सके। उन्होंने अधिकारियों से वनों को आग से बचाने के लिए हर संभव कदम उठाने को कहा।

सरकार वन अग्नि के प्रति संवेदनशील : वन मंत्री गोविन्द ठाकुर

सरकार वन अग्नि के प्रति संवेदनशील : वन मंत्री गोविन्द ठाकुर

वहीं जंगलों में लगने वाली आग पर नजर रखने के लिए 400 फायर वॉचर तैनात किए गए हैं। वन मंत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि इस साल वन विभाग ने मार्च में वन अग्नि को लेकर प्रदेश भर में जागरूकता अभियान चलाया था, जिसके कारण इस वर्ष लोगों से वनों की आग बुझाने जैसे कामों में सहयोग मिला है। इस वर्ष लगभग साढ़े नौ हजा़र व्यक्ति भारतीय वन सर्वेक्षण संस्थान देहरादून की वेबसाइट से जुड़ चुके हैं, जिन्हें उनके क्षेत्र में वन अग्नि की घटनाओं की सूचना मिल रही है। वन विभाग ने वनों में आग लगने की सूचना देने के लिए एक टोल फ्री नंबर भी शुरू किया है। सूचना मिलने के कारण आग को जल्दी काबू किया जा रहा है। गोविंद ठाकुर ने कहा कि भारतीय वन सर्वेक्षण संस्थान जंगल में लगने वाली आग से संबंधित पूर्व-चेतावनियां भी दे रहा है। उन्होंने कहा कि वन कर्मियों को सूचना के आदान-प्रदान हेतु अप्रैल से जून माह तक के मोबाईल फोन भत्ता दिया जा रहा है और कर्मचारियों को आग बुझाने वाले क्षेत्र में जल्द पहुंचने के लिये टैक्सी का खर्चा अथवा निजी वाहन प्रयोग करने पर भी भत्ता दिया जा रहा है। गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि सरकार वन अग्नि के प्रति संवेदनशील है तथा ऐसी घटनाओं के कारण कम से कम क्षति हो, इसके लिए वन अधिकारियों को हर संभव कोशिश करने के निर्देश दिए हैं।

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