सौंफ खाना स्वास्‍थ्‍य के लिए कितना फायदेमंद

सौंफ खाना स्वास्‍थ्‍य के लिए कितना फायदेमंद…

 घरों में साधारणतः सौंफ का इस्तेमाल खाना खाने के अंत में किया जाता है, क्योंकि इसको खाने से मुँह की बदबू दूर होती है। सौंफ में ताँबा (copper), आयरन, कैल्सियम, पोटाशियम, मैंगनीस, सिलीनीअम, ज़िन्क और मैग्नेशियम जैसे मिनरल्स पाये जाते हैं। सौंफ में कई औषधीय गुण मौजूद होते हैं, जिनका सेवन करने से स्वास्‍थ्‍य को फायदा होता है। सौंफ हर उम्र के लोगों के लिए फायदेमंद होती है। सौंफ में कैल्शियम, सोडियम, आयरन, पोटैशियम जैसे तत्व पाये जाते हैं। सौंफ का फल बीज के रूप में होता है और इसके बीज को प्रयोग किया जाता है। पेट की समस्याओं के लिए सौंफ बहुत फायदेमंद होती है। आइए जानते हैं सौंफ खाना स्वास्‍थ्‍य के लिए कितना फायदेमंद हो सकता है।

साँस की बदबू को दूर करता है सौंफ माउथ फ्रेशनर का काम करती है। इसमें कई तरह के सुगंधित तेल होते हैं जो मुँह से बदबू को दूर करता है। इसको चबाने से आपके मुँह में लार का उत्पादन बढ़ता है जो मुँह में छिपे हुए खाद्द पदार्थों को निकालकर हजम करने की क्रिया को शुरू करवाती है। एन्टी-बैक्टिरीअल और एन्टी इन्फ्लैमटोरी गुणों के अलावा ये साँसों के बदबू और मसूड़ों को संक्रमित करने वाले जीवों को नष्ट करती है।

खाना खाने के बाद साँस की बदबू को दूर करने के लिए सौंफ खायें। अगर आपके मसूड़ों में संक्रमण हैं तो सौंफ के कुछ दानों को पानी में डालकर उबाल लें और उस काढ़े से गार्गल करें। इस काढ़े से नियमित रूप से गरारा करने पर साँस की बदबू दूर होती है।

बदहजमी, कब्ज़, और ब्लोटिंग से राहत दिलाती है सौंफ बदहजमी को दूर करती है। जैसे ही आप सौंफ को चबाना शुरू करते हैं इसमें जो ज़रूरी तत्व होते हैं वे पाचन क्रिया का काम करना शुरू कर देते हैं। साथ ही इसमें जो फाइबर होता है वह मल को नरम करके कब्ज़ की समस्या को दूर करती है।

मासिक धर्म (periods): मासिक धर्म के दर्द से राहत दिलाता है- सौंफ श्रोणि (pelvic) और गर्भाशय के जगह (uterine area) में रक्त को नियमित और संतुलित रूप से प्रवाह करवाकर मासिक धर्म के दौरान दर्द से राहत दिलाती है। जर्नल ऑफ रिसर्च इन आयुर्वेद के अनुसार जो महिलायें मासिक धर्म के दौरान सौंफ का सेवन करती हैं, उनको दर्द का कष्ट कम सहना पड़ता है।

एक पैन में ज़रूरत के अनुसार पानी लें और उसमें एक बड़ा चम्मच सौंफ डालकर उसको तब तक उबालें जब तक कि पानी का रंग न बदल जाये। उसके बाद काढ़े को छान लें। मासिक धर्म के दौरान गुनगुना गर्म काढ़े का सेवन करने से दर्द से राहत मिलती है।

कैंसर की संभावना को कम करता है- सौंफ मैंगगनीस के अच्छे स्रोतों में एक है। शरीर जब इस मिनरल का इस्तेमाल करता है तब एक शक्तिशाली एन्टी-ऑक्सिडेंट एन्जाइम सूपरऑक्साइड डिस्म्यूटेस (superoxide dismutase) का उत्पादन होता है जो कैंसर की संभावना को कम करता है। सौंफ चबाने से त्वचा, पेट और स्तन कैंसर की संभावना कुछ हद तक कम होती है।

अनिमिआ से रक्षा करती है सौंफ में आयरन, ताँबा और हिस्टिडाइन तीनों भरपूर मात्रा में पाये जाते हैं, जिससे शरीर में लाल रक्त कण (red blood cells) का उत्पादन अच्छी तरह से हो पाता है। सौंफ का सेवन करने से शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ने लगती है जिसके फलस्वरूप हिमोग्लोबेन की मात्रा भी बढ़ जाती है। रोजाना सौंफ खाना गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष रूप से लाभदायक होता है क्योंकि ये अनिमिआ के बूरे प्रभाव से बचाती है।

वाटर रिटेनशन को कम करता है- सौंफ में मूत्रवर्द्धक (diuretic) गुण होने के कारण यह इडीमा होने से शरीर की रक्षा करती है। इसी गुण के कारण इसके नियमित सेवन से वज़न भी घटता है। इडीमा होने के बहुत से कारण होते हैं, इसलिए सौंफ का इस्तेमाल करने के पहले सही वजह का पता पहले लगा लेना अच्छा होता है।

ब्लड-प्रेशर को नियंत्रित करती है- जर्नल ऑफ फूड साइन्स के अध्ययन के अनुसार सौंफ में नाइट्राइट और नाइट्रेट प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं। ये दोनों यौगिक नए रक्त कोशिकाओं के बनने और संख्या को बढ़ाने में सहायता करती है। अध्ययन से यह पता चला है कि ये लार में नाइट्राइट की मात्रा को बढ़ाकर नैचरल तरीके से ब्लड-प्रेशर को नियंत्रित करती है। इसके अलावा सौंफ में जो पोटाशियम की उच्च मात्रा होती है, ये कोशिका और बॉडी फ्लूइड की ज़रूरी तत्व में से एक है। ये तत्व हृदय की गति और ब्लड-प्रेशर को नियंत्रित करने में भी सहायता करती है।

खाने के तुरन्त बाद सौंफ को चबाकर खायें। इससे न सिर्फ ब्लड-प्रेशर नियंत्रित रहता है बल्कि हजम करने की शक्ति बढ़ती है।

मुँहासों को आने से रोकती है और त्वचा को स्वस्थ रखती है- एन्टी-बैक्टिरीअल और एन्टी-ऑक्सिडेंट गुणों के कारण यह त्वचा के लिए बहुत ही लाभदायक होती है। इसके बीज से बनाया हुआ सोल्युशन लगाने से मुँहासों का आना तो कम होता ही है साथ ही स्किन टोन्ड, हेल्दी और रिंकल-फ्री भी होता है। यह बढ़ते उम्र के लक्षणों को भी कम करती है।

सौंफ के कुछ दानों को पानी में रंग बदलने तक उबाल लें। अब इस मिश्रण को ठंडा करके टोनर के रूप में इसका इस्तेमाल करें। चेहरे पर इसको लगाकर 15 मिनट के लिए छोड़ दें और सूखने के बाद पानी से धो लें।

सौंफ खाने से पेट और कब्ज की शिकायत नहीं होती। सौंफ को मिश्री या चीनी के साथ पीसकर चूर्ण बना लीजिए, रात को सोते वक्त लगभग 5 ग्राम चूर्ण को हल्केस गुनगने पानी के साथ सेवन कीजिए। पेट की समस्या नहीं होगी व गैस व कब्ज दूर होगा। वज़न घटाएगा- सौंफ में मूत्रवर्द्धक गुण होता है। इसी कारण जब आप इसको अपने डायट में शामिल करेंगे तब यह आपके हजम शक्ति को सुधारने के साथ-साथ शरीर के चयापचय(metabolism) के रेट को बढ़ाकर वज़न को घटाती है। जर्नल ऑफ डाइबीटिज एण्ड मेटाबॉलिक सिन्ड्रोम के अध्ययन के अनुसार सौंफ और काले मिर्च के मिश्रण का सेवन करने से इन्सुलिन की संवेदनशीलता बढ़ती है और वज़न घटता है। साथ ही ये कोलेस्ट्रोल के स्तर को कम करती है और मेटाबॉलिक सिन्ड्रोम और डाइबीटिज से बचाती है।

ज़रूरत के अनुसार सौंफ को भूनकर पीस लें। इसके पावडर को गर्म पानी में मिलाकर काढ़ा बना लें। अब इस काढ़े को दिन में दो बार खाली पेट खाने से बहुत ही अच्छा फल मिलता है।

आंखों की रोशनी सौंफ का सेवन करके बढ़ाया जा सकता है। सौंफ और मिश्री समान भाग लेकर पीस लें। इसकी एक चम्मच मात्रा सुबह-शाम पानी के साथ दो माह तक लीजिए। इससे आंखों की रोशनी बढती है।

डायरिया होने पर सौंफ खाना चाहिए। सौंफ को बेल के गूदे के साथ सुबह-शाम चबाने से अजीर्ण समाप्त होता है और अतिसार में फायदा होता है।

खाने के बाद सौंफ का सेवन करने से खाना अच्छे से पचता है। सौंफ, जीरा व काला नमक मिलाकर चूर्ण बना लीजिए। खाने के बाद हल्के गुनगुने पानी के साथ इस चूर्ण को लीजिए, यह उत्तम पाचक चूर्ण है।

खांसी होने पर सौंफ बहुत फायदा करता है। सौंफ के 10 ग्राम अर्क को शहद में मिलाकर लीजिए, इससे खांसी आना बंद हो जाएगा।

यदि आपको पेट में दर्द होता है तो भुनी हुई सौंफ चबाइए इससे आपको आराम मिलेगा। सौंफ की ठंडाई बनाकर पीजिए। इससे गर्मी शांत होगी और जी मिचलाना बंद हो जाएगा।

यदि आपको खट्टी डकारें आ रही हों तो थोड़ी सी सौंफ पानी में उबालकर मिश्री डालकर पीजिए। दो-तीन बार प्रयोग करने से आराम मिल जाएगा।

हाथ-पांव में जलन होने की शिकायत होने पर सौंफ के साथ बराबर मात्रा में धनिया कूट-छानकर, मिश्री मिलाकर खाना खाने के पश्चात 5 से 6 ग्राम मात्रा में लेने से कुछ ही दिनों में आराम हो जाता है।

अगर गले में खराश हो जाए तो सौंफ चबाना चाहिए। सौंफ चबाने से बैठा हुआ गला भी साफ हो जाता है।

रोजाना सुबह-शाम खाली सौंफ खाने से खून साफ होता है जो कि त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होता है, इससे त्वचा में चमक आती है।

सौंफ और मिश्री समान भाग लेकर पीस लें। इसकी एक चम्मच मात्रा सुबह-शाम पानी के साथ दो माह तक लें। इससे आँखों की कमजोरी दूर होती है तथा नेत्र ज्योति में वृद्धि होती है।

सौंफ का अर्क दस ग्राम शहद मिलाकर लें। खाँसी में तत्काल आराम मिलेगा।बेल का गूदा 10 ग्राम और 5 ग्राम सौंफ सुबह-शाम चबाकर खाने से अजीर्ण मिटता है और अतिसार में लाभ होता है।  यदि आपको पेटदर्द होता है, तो भुनी हुई सौंफ चबाइए, तुरंत आराम मिलेगा। सौंफ की ठंडाई बनाकर पीजिए, इससे गर्मी शांत होगी और जी मिचलाना बंद हो जाएगा।  हाथ-पाँव में जलन की शिकायत होने पर सौंफ के साथ बराबर मात्रा में धनिया कूट-छानकर मिश्री मिलाकर खाना खाने के पश्चात 5-6 ग्राम मात्रा में लेने से कुछ ही दिनों में आराम हो जाता है।  सौंफ रक्त को साफ करने वाली एवं चर्मरोग नाशक है।

मस्तिष्क संबंधी रोगों में सौंफ अत्यंत गुणकारी है। यह मस्तिष्क की कमजोरी के अतिरिक्त दृष्टि-दुर्बलता, चक्कर आना एवं पाचनशक्ति बढ़ाने में भी लाभकारी है। इसके निरंतर सेवन से दृष्टि कमजोर नहीं होती तथा मोतियाबिंद से रक्षा होती है।

उलटी, प्यास, जी मिचलाना, पित्त-विकार, जलन, पेटदर्द, अग्निमांद्य, पेचिश, मरोड़ आदि व्याधियों में यह लाभप्रद है।

सौंफ, धनिया व मिश्री का समभाग चूर्ण 6 ग्राम की मात्रा में भोजन के बाद लेने से हाथ-पाँव तथा पेशाब की जलन, अम्लपित्त (एसिडिटी) व सिरदर्द में आराम मिलता है।

सौंफ और मिश्री का समभाग चूर्ण मिलाकर रखें। दो चम्मच मिश्रण दोनों समय भोजन के बाद एक से दो माह तक खाने से मस्तिष्क की कमजोरी दूर होती है तथा जठराग्नि तीव्र होती है।

बच्चों के पेट के रोगों में दो चम्मच सौंफ का चूर्ण दो कप पानी में अच्छी तरह उबाल लें। एक चौथाई पानी शेष रहने पर छानकर ठण्डा कर लें। इसे एक-एक चम्मच की मात्रा में दिन में तीन-चार बार पिलाने से पेट का अफरा, अपच, उलटी (दूध फेंकना), मरोड़ आदि शिकायतें दूर होती हैं।

आधी कच्ची सौंफ का चूर्ण और आधी भुनी सौंफ के चूर्ण में हींग और काला नमक मिलाकर 2 से 6 ग्राम मात्रा में दिन में तीन-चार बार प्रयोग कराएं इससे गैस और अपच दूर हो जाती है।

भूनी हुई सौंफ और मिश्री समान मात्रा में पीसकर हर दो घंटे बाद ठंडे पानी के साथ फँकी लेने से मरोड़दार दस्त, आँव और पेचिश में लाभ होता है। यह कब्ज को दूर करती है।

बादाम, सौंफ और मिश्री तीनों बराबर भागों में लेकर पीसकर भर दें और रोज दोनों टाइम भोजन के बाद 1 टी स्पून लें। इससे स्मरणशक्ति बढ़ती है।

5-6 ग्राम सौंफ लेने से लीवर ठीक रहता है और आंखों की ज्योति बढ़ती है।(सभी प्रकार के यकृत, खून की कमी, पीलिया, रक्त- विकार, कमजोरी, भूख न लगना, अरुचि, कब्ज, पेट दर्द तथा गैस में ‘ अच्युतायलिवर टोनिक सिरप ,अत्याधिक लाभप्रद है।

तवे पर भुनी हुई सौंफ के मिक्स्चर से अपच के मामले में बहुत लाभ होता है। दो कप पानी में उबली हुई एक चम्मच सौंफ को दो या तीन बार लेने से अपच और कफ की समस्या समाप्त होती है।

सौंफ की ठंडाई बनाकर पीएं। इससे गर्मी शांत होगी। हाथ-पाव में जलन होने की शिकायत होने पर सौंफ के साथ बराबर मात्रा में धनिया कूट-छानकर, मिश्री मिलाकर खाना खाने के बाद 5 से 6 ग्राम मात्रा में लेने से कुछ ही दिनों में आराम हो जाता है।

अगर गले में खराश हो गई है तो सौंफ चबाना फायदेमंद होता है।

सौंफ चबाने से बैठा हुआ गला भी साफ हो जाता है। रोजाना सुबह-शाम खाली सौंफ खाने से खून साफ होता है जो कि त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होता है, इससे त्वचा चमकती है। वैसे तो सौंफ का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। इससे कई प्रकार के छोटे-मोटे रोगों से निजात मिलती है।

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