113 साल पुराने भाप इंजन ने शिमला से कैथलीघाट तक किया 22 कि.मी.का सफर तय, विदेशी पर्यटकों ने उठाया लुत्फ़

113 साल पुराने भाप इंजन ने शिमला से कैथलीघाट तक किया 22 कि.मी.का सफर तय, विदेशी पर्यटकों ने उठाया लुत्फ़

शिमला: शिमला कालका-शिमला हेरिटेज रेल ट्रैक पर एक बार फिर 113 साल पुराना भाप इंजन चला। इस भाप इंजन को ब्रिटिश से आए 23 पर्यटकों के दल की बुकिंग पर उत्तर रेलवे ने चलाया। रेलवे पर्यटकों को बुकिंग पर ही इस स्टीम इंजन की यात्रा करवा रहा है। स्टीम इंजन को चलाने के लिए तीन कर्मचारियों की तैनाती की गई थी। स्टीम इंजन ने शिमला से कैथलीघाट तक 22 किलोमीटर का सफर तय किया। शिमला-कालका रेल लाइन विश्व धरोहर का दर्जा पाने वाली तीसरी रेल लाइन है। 8 जुलाई 2008 को यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर का दर्जा दिया है। दार्जिलिंग रेलवे और नीलगिरि रेलवे को भी विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त है।

शिमला में पहली ट्रेन 9 नवंबर 1903 को पहुंची थी। उक्त इंजन इस ट्रैक पर 1907 में आया था। इस ट्रैक पर वर्ष 1970 तक भाप इंजन ही चलते थे। इसके बाद डीजल इंजन आने पर भाप इंजन बंद हो गए। लेकिन धरोहर के रूप में अब भी उत्तर रेलवे ने कुछ भाप इंजनों को संभाल कर रखा हुआ है। इनमें कुछ इंजनों को पर्यटकों की बुकिंग पर इस ट्रैक पर चलाया जा रहा है। ये इंजन अब सिर्फ शिमला से कैथलीघाट तक चलाया जा रहा है।

वहीं शिमला से कैथलीघाट तक स्टीम इंजन के टूअर का आयोजन ‘ट्रेवल पलज इंडिया’ की ओर से किया गया। टूअर को ‘ग्लोरिअस ट्रेनज ऑफ इंडिया’ का नाम दिया गया है। स्टीम इंजन के रवाना होने से पहले सैलानियों ने शिमला रेलवे स्टेशन की खूबसूरती को अपने मोबाईल व कैमरों में कैद किया।

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