लोक साहित्य व लोक नाटक हमारे जीवन के अभिन्न अंग

लोक साहित्य व लोक नाटक हमारे जीवन के अभिन्न अंग

  • मुख्यमंत्री का राज्य की समृद्ध संस्कृति के संरक्षण पर बल
  • मुख्यमंत्री ने कहा: लोक साहित्य व लोक नाटक हमारे जीवन के अभिन्न अंग
  • समृ्द्ध संस्कृति व रीति-रिवाजों को तेजी से बदलते सामाजिक-आर्थिक परिदेश्य के दृष्टिगत संरक्षित करने की आवश्यकता

 

शिमला: मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक साहित्य व लोक नाटक हमारे जीवन के अभिन्न अंग हैं, जो क्षेत्र के समृद्ध इतिहास को परिलक्षित करते हैं। उन्होंने कहा कि इन पर अनुसंधान करने व इनके ज्ञाता लोगों से सीख कर पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि इतिहास गवाह है कि वही सभ्यताएं जीवित रहती हैं, जिन्होंने अपनी परम्पराओं व रीति-रिवाजों का संरक्षण व सम्मान किया है। मुख्यमंत्री आज यहां ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में लला मेमे फांउडेशन लाहौल-स्पीति द्वारा आयोजित संस्कृतिक कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे थे।

वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश की समृ्द्ध संस्कृति व रीति-रिवाजों को तेजी से बदलते सामाजिक-आर्थिक परिदेश्य के दृष्टिगत संरक्षित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह उचित है कि हम आधुनिक बदलाव के साथ चलें, परन्तु साथ ही हमारा यह दायित्व भी बनता है कि हमें अपनी समृद्ध रीति-रिवाज भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित करें।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर वादकों व गायकों को भी सम्मानित किया और लला मेमे फांउडेशन को इस विशेष पहल के लिए बधाई दी। वीरभद्र सिंह ने फांउडेशन को इस तरह की गतिविधियां संचालित करने के लिए 5 लाख रुपये देने की घोषणा की।

प्रो. चन्द्र मोहन परशेरा ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया और उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम को आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को लाहौल-स्पीति की प्राचीन परम्पराओं के बारे जानकारी प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का विषय ‘टर्निंग द बिल्ज ऑफ द म्यूजिकल लगेसी’ भी इसकी बानगी है।

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