इस बार 13 बैठकों तक सीमित हुआ हिमाचल विधानसभा का बजट सत्र

भाखड़ा बांध विस्थापितों के मुद्दे पर गर्माया सदन

  • पौंग बांध विस्थापितों के मामले को जल्द सुलझाया जाएगा : मुख्यमंत्री
  • ऐसी पॉलिसी बने, जो जहां बस गए उन्हें वहीं पर मिले जमीन : रामलाल

शिमला : हिमाचल विधानसभा बजट सत्र के तीसरे दिन आज सदन में अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। जिसमें नूरपुर के विधायक राकेश पठानिया ने अनुपूरक प्रश्न में मुख्यमंत्री से पूछा कि पौंग डैम के विस्थापित को कब तक पुनर्वास करेंगे। पैसा किसी के लिए और खर्च कहीं और हुआ है? प्रभावित लोगों को हमीरपुर, ऊना व धर्मशाला शिफ्ट होना पड़ा?

जिस पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने पौंग बांध विस्थापितों के मामले को लेकर कहा कि पौंग बांध बनने से कांगड़ा जिले में 75 हजार जमीन का अधिग्रहण किया गया और 339 गांव तबाह हो गए। यह मामला उस समय का है जब हम यहां नहीं थे। लोगों के साथ पहले जो हुआ, अब ऐसा नहीं होगा। हम लोगों को जहां पहुंचना चाहिए था, उस समय वहां नहीं पहुंच पाए। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले दिल्ली में राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे से विस्तार से चर्चा की है और इसके समाधान को लेकर बात हुई है। जयराम ने कहा कि पौंग डेम का मामला बहुत पुराना है, पौंग बांध विस्थापितों के मामले को जल्द सुलझाया जाएगा।

वहीं भाखड़ा बांध विस्थापितों के मुद्दे पर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष में चर्चा हुई साथ ही कुछ इस को लेकर पक्ष और विपक्ष में गहमागहमी का माहौल भी बन गया। ठाकुर राम लाल द्वारा भाखड़ा बांध विस्थापित परिवारों ने जहां-जहां सरकारी भूमि पर कब्जे किए हैं, उन्हें यथावत नियमित करने को नीति बनाने संबंधी पेश किया गया संकल्प सदन में गिर गया। कांग्रेस सदस्य ठाकुर रामलाल ने गैर सरकारी सदस्य संकल्प प्रस्तुत करते हुए विस्थापित परिवारों ने जहां-जहां सरकारी भूमि पर कब्जे किए हैं, उन्हें यथावत नियमित करने को नीति बनाने की मांग की थी। ठाकुर ने कहा कि यदि राज्य सरकार बिलासपुर को उजड़ते देखना चाहती है तो मूक दर्शक बनी रहे। यदि नहीं तो वह हाईकोर्ट में आवेदन दे और कोई भी ऐसा कोई कदम न उठाने दे, जिसे वहां के लोगों को परेशानी हो। ऐसी पॉलिसी बने, जो जहां पर बस गए, उन्हें वहीं पर जमीन मिले।

पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने इस पर कहा कि विस्थापितों को स्थापित करने के लिए गंभीर प्रयास करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पंजाब, हरियाणा, राज्यस्थान जैसे राज्यों को इस परियोजना से फायदा मिला है। उनका कहना था कि दूसरे राज्यों के लोग दिखावे के लिए हमदर्दी दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी पॉलिसी बनाई जाए, इसके तहत जो जहां पर बस गए हैं, उन्हें वहीं पर जमीन मिले। उन्होंने कहा कि जो भी विस्थापित हैं, उन्हें न्याय मिलना चाहिए। वहीं इस मुद्दे को लेकर विधायक सुभाष ठाकुर, कांग्रेस सदस्य लखविंद्र व राकेश सिंघा ने भी चर्चा में हिस्सा लिया।

मुख्यमंत्री की गैर मौजूदगी में सिंचाई मंत्री ठाकुर महेंद्र सिंह ने इसका जवाब दिया और कहा कि यह सारा मामला कोर्ट के विचाराधीन है। कोर्ट में मामला होने के बीच इस मसले पर कुछ नहीं कर सकते। महेंद्र सिंह ने कहा कि इस बांध के बनने से 256 गांव प्रभावित हुए थे और 31191.26 एकड़ सरकारी और 10676.16 निजी भूमि इसमें आई थी और 11277 किसान प्रभावित हुए थे। इससे प्रभावित लोगों के पुर्नवास (ग्रांट आफ लैंड) को 1971 में नीति बनाई थी और फिर मुआवजा दिया। लेकिन आज स्थिति और भिन्न है। उन्होंने कहा कि जिन प्रभावित परिवारों को उक्त नीति के तहत बिलासपुर शहर में प्लाट आवंटित किए हैं, उन लोगों ने सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे किए गए थे और सरकार से अवैध कब्जे को नियमित करने की मांग की थी। इसके बाद हाईकोर्ट में मामला गया। उन्होंने दोहराया कि भाखड़ा बांध विस्थापितों का मामला कोर्ट में विचाराधीन है और उसके फैसले के बाद ही इस पर कोई फैसला लिया जा सकेगा।

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