किसानों को निर्माण-मरम्मत, फलों-सब्जियों व फसल उत्पादन तकनीक वाले ग्रीन हाउस के सभी पहलुओं से किया प्रशिक्षित

किसानों को निर्माण-मरम्मत, फलों-सब्जियों व फसल उत्पादन तकनीक वाले ग्रीन हाउस के सभी पहलुओं से किया प्रशिक्षित

  • ग्रीनहाउस प्रौद्योगिकी पर प्रशिक्षण का समापन
  • किसानों को फसल उत्पादन और आय बढ़ाने के लिए जल संरक्षण विधियों को लागू करने और स्वयं-सहायता समूहों के विकास करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया : डा. एच.सी. शर्मा
  • किसानों को विशेषज्ञों से नियमित रूप से बातचीत करने की सलाह, ताकि वैज्ञानिकों तक पहुँच सके उनकी समस्याएं
  • इसी साल विश्वविद्यालय में चार और प्रशिक्षण शिविर होंगे आयोजित
  • उम्मीदवारों को एएससीआई द्वारा प्रमाणित प्रमाण पत्र से किया सम्मानित
ग्रीनहाउस प्रौद्योगिकी पर प्रशिक्षण का समापन

ग्रीनहाउस प्रौद्योगिकी पर प्रशिक्षण का समापन

शिमला : किसानों के लिए आयोजित एक महीने के “कौशल विकास कार्यक्रम” का शनिवार को समापन हो गया। यह कार्यक्रम डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी व वानिकी विश्वविद्यालय नौणी में आयोजित किया गया। जिसका विषय था ‘ग्रीनहाउस ऑपरेटर की भूमिका’। जिसमें प्रदेश के दस जिलों के 27 किसानों ने भाग लिया। विश्वविद्यालय के मृदा विज्ञान और जल प्रबंधन विभाग के प्रीसीजन फ़ार्मिंग सेंटर ने इस कार्यक्रम का आयोजन किया।

समापन कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति डा. एच.सी. शर्मा बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए फसल उत्पादन और आय बढ़ाने के लिए जल संरक्षण विधियों को लागू करने और स्वयं-सहायता समूहों के विकास करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने किसानों को विशेषज्ञों से नियमित रूप से  बातचीत करने की सलाह दी ताकि उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी वैज्ञानिकों तक पहुँच सके और वो समय पर समाधान उन्हें बता सकें।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक डा. जे.एन. शर्मा विशिष्ट अतिथि रहे। उनके अनुसार, आज के प्रतियोगी दौर में कौशल विकास एक ऐसा विषय जिसे इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों द्वारा पूरा किया जा सकता है। उन्होंने प्रतिभागियों को बागवानी की मदद से कृषि में विविधता लाने और अधिकतम लाभ लेने के लिए वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने की जरुरत के बारे में भी बताया।

कार्यक्रम के समन्वयक डा. आरएस स्पेहिया ने बताया कि प्रशिक्षण के लिए किसानों को हिमाचल प्रदेश बागवानी विभाग द्वारा प्रायोजित किया गया। मृदा विज्ञान और जल प्रबंधन विभाग के प्रमुख डा॰ जे.सी. शर्मा ने कहा कि राज्य में पहली बार कृषि कौशल परिषद (एएससीआई) के साथ संबंधित विषय पर एक महीने का कौशल विकास कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। इस साल, इस विषय पर विश्वविद्यालय में चार और प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जायेंगें।

किसानों को निर्माण और मरम्मत, फलों और सब्जियों की नर्सरी उत्पादन और फसल उत्पादन तकनीक वाले ग्रीन हाउस कार्यों के सभी पहलुओं में प्रशिक्षित किया गया। इसके अलावा कार्यक्रम के दौरान रोग और कीट प्रबंधन, संरक्षित स्थितियों में सूक्ष्म सिंचाई प्रबंधन, जैविक खाद और जैव-उर्वरकों के साथ मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने के बारे में भी बताया गया। विश्वविद्यालय के फूल विज्ञान, पादप रोग, सब्जी विज्ञान और कीट विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों ने भी ग्रीनहाउस प्रौद्योगिकी से संबंधित विभिन्न विषयों पर प्रतिभागियों को संबोधित किया।

कार्यक्रम में प्रतिभागियों का स्वतंत्र परीक्षणकर्ताओं द्वारा मूल्यांकन किया गया और सफल उम्मीदवारों को एएससीआई द्वारा प्रमाणित प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया। ग्रीनहाउस ऑपरेटर की नौकरी के लिए यह प्रमाण पत्र पूरे भारत में मान्य होगा।

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