इस साल होलिका दहन के लिए बहुत ही शुभ संयोग, जानें: होली का मुहूर्त, कैसे होगी साधनाएं व मन्त्र सिद्ध : कालयोगी आचार्य महिन्दर शर्मा

इस साल होलिका दहन के लिए बहुत ही शुभ संयोग, जानें: होली का मुहूर्त, कैसे होगी साधनाएं व मन्त्र सिद्ध : कालयोगी आचार्य महिन्दर शर्मा

  • भद्राकाल के समय होलिका दहन शुभ नहीं
  • फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि में करना चाहिए होलिका दहन

इस वर्ष होली 1 और 2 मार्च को है। शुभ समय सायं 7 बजकर 37 मिनट पर है व भद्रा समाप्त हो जाएगी। इसके बाद से होलिका दहन किया जाना शुभ रहेगा। वैसे शास्त्रों में बताए गए नियमों के अनुसार इस साल होलिका दहन के लिए बहुत ही शुभ स्थिति बनी हुई है। यह कई वर्षों के बाद हो रहा है कि होलिका दहन के लिए तीन चीजों का एक साथ होना बहुत ही शुभ होता है। पूर्णिमा तिथि हो, प्रदोष काल हो और भद्रा नहीं लगी हो। इस साल होलिका दहन पर ये तीनों संयोग बन रहे हैं। इसलिए होली आनंददायक रहेगी, होली का त्योहार आमतौर पर दो दिनों का होता है। पहले दिन होलिका दहन किया जाता है और उसके अगले दिन रंगोत्सव मनाया जाता है। जिसे धुलण्डी भी कहा जाता है।

शास्त्रों के नियमानुसार होलिका दहन फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि में करना चाहिए। इस साल हिमाचल में शिमला, चंडीगढ़, दिल्ली, लखनऊ व देहरादून में 1 मार्च को सुबह 8 बजकर 58 मिनट से पूर्णिमा तिथि लग रही है लेकिन इसके साथ भद्रा भी लगी होगी। होली के एक दिन पहले होलिका दहन होता है।

हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता है। होलिका दहन के बाद अगली सुबह को गुलाल और रंगों से लोग सराबोर होने लगते हैं। लोग मस्ती में फागुआ और गीत गाते हैं। होलिका दहन का रिवाज कई सालों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है। जिसके अनुसार होली के एक महीने पहले माघ पूर्णिमा वाले दिन गुल्लर के पेड़ की टहनी को मोहल्ले के चौराहे के बीच में लगा दिया जाता है। इसके बाद फाल्गुन पूर्णिमा पर लोग मिलकर लकड़ियां एकत्र कर होलिका दहन करते हैं। होलिका दहन करने से पहले विधिवत पूजा की जाती है और दहन का शुभ मुहूर्त देखा जाता है फिर होलिका को अग्नि दी जाती है।

पूजा विधि: पूजा के लिए इस दिन जल, रोली, फूल माला, चावल, गुड़ और नई पकी फसल के पौधों की बालियां रखें। होलिका दहन के शुभ मुहूर्त के समय चार मालाएं होलिका को अर्पित की जाती है। इसके बाद तीन या सात बार होलिका की परिक्रमा करनी चाहिए।  शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन पूर्णिमा तिथि में प्रदोष काल के दौरान करना चाहिए, लेकिन ध्यान रखें कि जब भद्राकाल चल रहा हो तो इस दौरान होलिका दहन नहीं करना चाहिए। भद्राकाल के समय होलिका दहन शुभ नहीं माना जाता है।

  • 1 मार्च की रात्रि तंत्र का भी प्रयोग किया जा सकता है इस शुभ काल में मंत्रों को भी सिद्ध किया जा सकता है।

उक्त मन्त्र आप सभी कर सकतें हैं जाप

  • ॐ ह्लिम ॐ
  • ॐ क्लीं ॐ ऐं बज्र स्वयं सिद्ध
  • पैसों के लिए : ॐ लं लं लक्ष्मये ऐं श्री नमः
  • कालयोग एस्ट्रो शिमला 82638-82638,9129500004

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