अनियमित जमा योजना व चिट फंडों पर प्रतिबंध लगाने के नए विधेयक को मंजूरी

अनियमित जमा योजना व चिट फंडों पर प्रतिबंध लगाने के नए विधेयक को मंजूरी

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने निवेशकों की बचतों की रक्षा करने के लिए एक प्रमुख नीतिगत पहल करते हुए निम्नलिखित विधेयकों को संसद में पेश करने की मंजूरी दे दी हैः-

  • अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध लगाने संबंधी विधेयक, 2018 और
  • चिट फंड (संशोधन) विधेयक, 2018

अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध लगाने संबंधी विधेयक, 2018

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध लगाने संबंधी विधेयक, 2018 को संसद में पेश करने की मंजूरी दे दी है। इस विधेयक का उद्देश्य देश में गैर-कानूनी जमा राशि से जुड़ी समस्याओं से निपटना है। ऐसी योजनाएं चला रही कंपनियां/संस्थान वर्तमान नियामक अंतरों का लाभ उठाते है और कड़े प्राशासनिक उपायों के अभाव में गरीबों और भोले-भाले लोगों को ठगते हैं।

विवरणः अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध लगाने संबंधी विधेयक, 2018 देश में गैर-कानूनी बचत योजनाओं से जुड़ी बुराई से निपटने के लिए एक विस्तृत कानून इस प्रकार प्रदान करेगा,

  • अनियमित जमा राशि से संबंधित गतिविधियों पर पूर्ण रोक

(ख)अनियमित जमा राशि लेने वाली योजना को बढ़ावा देने अथवा उनके संचालन के लिए सजा

(ग) जमाकर्ताओं को अदायगी करते समय धांधली के लिए कड़ी सजा

(घ) जमा करने वाले प्रतिष्ठानों द्वारा चूक की स्थिति में जमा राशि की अदायगी सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा एक सक्षम प्राधिकार की नियुक्ति

(ङ) चूक करने वाले प्रतिष्ठान की संपत्ति कुर्क करने के लिए अधिकार देने सहित सक्षम प्राधिकार की शक्तियां और कामकाज

(च) जमाकर्ताओं की अदायगी की निगरानी और अधिनियम के अंतर्गत अपराधों पर कार्रवाई करने के लिए अदालतों का गठन

(छ) विधेयक में नियमित जमा योजनाओं को सूचीबद्ध करना, जिसमें सूची का विस्तार करने अथवा काट-छांट करने के लिए केन्द्र सरकार को सक्षम बनाने का खंड हो।

प्रमुख विशेषताएं :

विधेयक की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैः

  • विधेयक में प्रतिबंध लगाने संबंधी एक मूलभूत खंड हैं, जो जमा राशि लेने वाले को किसी भी अनियमित जमा योजना के लिए राशि लेने के लिए प्रोत्‍साहित करने, उसे प्रचलित करने, विज्ञापन जारी करने अथवा जमा राशि स्वीकार करने से रोकता है। इसका प्रमुख नियम यह है कि विधेयक अनियमित जमा राशि लेने वाली गतिविधियों पर रोक लगाएगा, इसे वर्तमान कानून और नियामक ढांचे के बजाय प्रत्याशित अपराध माना जाएगा, जो पर्याप्त समय के साथ यथार्थ निवेश पर लागू होगा।
  • विधेयक में तीन अलग-अलग प्रकार के अपराध निर्धारित किए गए हैं, जिनमें अनियमित जमा योजनाओं को चलाना, नियमित जमा योजनाओं में धांधली और अनियमित जमा योजनाओं को गलत तरीके से प्रोत्साहन।
  • विधेयक में बचाव कार्य करने के लिए कड़ी सजा और भारी जुर्माने की व्यवस्था की गई है।
  • विधेयक में ऐसे मामलों में जमाराशि को निकालने अथवा उसकी अदायगी के लिए पर्याप्त प्रावधान किए गए है, जहां ऐसी योजनाओं के लिए अवैध तरीके से जमा राशि जुटाने में सफलता मिल जाती है।
  • विधेयक में सक्षम प्राधिकार द्वारा संपत्तियों/परिसंपत्तियों को कुर्क करने और जमाकर्ताओं को अदायगी के लिए सम्‍पत्ति की अनुवर्ती वसूली का प्रावधान किया गया है।
  • संपत्ति की कुर्की और जमाकर्ताओं को धनराशि लौटाने के लिए स्पष्ट समय निर्धारित किया गया है।
  • विधेयक में एक ऑनलाइन केन्द्रीय डेटाबेस तैयार करने की व्यवस्था है जिससे देश में जमा करने की धनराशि लेने की गतिविधियों के बारे में सूचनाएं एकत्र करने और उन्हें साझा करने की व्यवस्था होगी।
  • विधेयक में “जमाराशि लेने वाले” और “जमाराशि” को विस्तार से परिभाषित किया गया है।
  • “जमाराशि लेने वालों” में धनराशि लेने वाली अथवा मांगने वाली सभी संभावित कंपनियां (व्यक्तियों सहित) शामिल होंगी। इनमें केवल उन विशिष्ट कंपनियों को शामिल नहीं किया जाएगा, जिन्हें कानून द्वारा शामिल किया गया है।
  • “जमाराशि” को इस तरीके से परिभाषित किया गया है कि जमा राशि लेने वालों पर प्राप्तियों के रूप में जनता की जमा राशि को छिपाने से रोक होगी और साथ ही अपने सामान्य व्यवसाय के दौरान किसी प्रतिष्ठान द्वारा धनराशि स्वीकार करने से रोक होगी।
  • एक विस्तृत केन्द्रीय कानून होने के कारण विधेयक में कानून की सर्वश्रेष्ठ प्रक्रियाओं को अपनाया गया है साथ ही कानून के प्रावधानों को लागू करने की प्रमुख जिम्मेदारी राज्य सरकारों को सौंपी गई है।

पृष्ठभूमिः वित्त मंत्री ने 2016-17 के अपने बजट भाषण में गैर-कानूनी जमाराशि लेने वाली योजनाओं से जुड़ी बुराइयों से निपटने के लिए एक विस्तृत केन्द्रीय कानून लाने की घोषणा की थी। पिछले दिनों देश के विभिन्न भागों में ऐसी घटनाएं सामने आई जिनमें गैर-कानूनी तरीके से जमा राशि लेने की योजनाओं के जरिए लोगों के साथ धोखाधड़ी की गई। इस तरह की योजनाओं के सबसे अधिक शिकार गरीब और ऐसे लोग हुए जिनको वित्तीय मामलों की जानकारी नहीं थी और ऐसी योजनाएं अनेक राज्यों में चल रही थीं। साथ ही वित्त मंत्री ने अपने 2017-18 के बजट भाषण में घोषणा की कि गैर-कानूनी जमा योजनाओं की बुराइयों को कम करने के लिए एक विधेयक का मसौदा सार्वजनिक किया जाएगा और उसे अंतिम रूप देने के बाद जल्द ही पेश किया जाएगा।

चिट फंड (संशोधन) विधेयक, 2018 : प्रधानमंत्री  नरेन्द्री मोदी के अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने चिट फंड (संशोधन) विधेयक, 2018 को संसद में पेश करने की मंजूरी दे दी। चिट फंड क्षेत्र की सुव्यवस्थित वृद्धि और चिट फंड उद्योग के रास्ते में आने वाली अड़चनों को समाप्त करने के लिए, साथ ही अन्य वित्तीय उत्पादों तक लोगों की अधिक वित्तीय पहुंच सुनिश्चित करने के लिए, चिट फंड कानून, 1982 में निम्नलिखित संशोधनों का प्रस्ताव किया गया हैः

चिट फंड कानून, 1982 के अनुच्छेद 2(बी) और 11(1) के अंतर्गत चिट व्यवसाय के लिए “बंधुत्व कोष” शब्द का इस्तेमाल उसकी अंतर्निहित प्रकृति को स्पष्ट करने और एक अलग कानून के अंतर्गत प्रतिबंधित “प्राइज चिट” से उसके कामकाज को अलग करना है।

चिट का ड्रॉ कराने के लिए कम से कम दो ग्राहकों की जरूरत को बरकरार रखते हुए और कार्यवाही की अधिकृत रिपोर्ट तैयार करने के लिए, चिट फंड (संशोधन) विधेयक, 2018 में यह इजाजत देने का प्रस्ताव है कि वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए कम से कम दो ग्राहक शामिल हों, जिसकी रिकॉर्डिंग चिट के अंतिम चरणों की दिशा में ग्राहकों की मौजूदगी के रूप में फोरमैन द्वारा की जाए। फोरमैन के पास कार्यवाही की अधिकृत रिपोर्ट होगी, जिस पर कार्यवाही के दो दिन के अंदर ऐसे ग्राहकों के हस्ताक्षर होंगे;

फोरमैन के कमीशन की अंतिम सीमा अधिकतम पांच प्रतिशत से बढ़ाकर सात प्रतिशत करना, क्योंकि कानून के लागू होने तक दर अपरिवर्तनीय है, जबकि ऊपरी खर्चों और अन्य खर्चों में कई गुना वृद्धि हुई है।

फोरमैन को यह अधिकार दिया जाएगा कि वह ग्राहकों से बकाये की राशि ले ताकि उन ग्राहकों के लिए चिट कंपनी द्वारा मुआवजे की इजाजत दी जा सके, जिन्होंने पहले से ही धनराशि निकाल ली है ताकि उनके द्वारा धांधली को रोका जा सके; और

चिट फंड कानून, 1982 के अनुच्छेद 85(ख) में संशोधन ताकि चिट फंड कानून तैयार करते समय 1982 में निर्धारित सौ रूपये की सीमा को समाप्त किया जा सके, जो अपना महत्व खो चुकी है। राज्य सरकारों को सीलिंग निर्धारित करने और उसमें समय-समय पर वृद्धि करने की इजाजत देने का प्रस्ताव किया गया है।

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