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जेनेरिक की जगह लिखी ब्रांडेड दवा…तो डॉक्टर पर होगी कार्रवाई

शिमला : प्रदेशभर के अस्पतालों में चिकित्सकों द्वारा जैनरिक दवाइयां न लिखने पर स्वास्थ्य विभाग सख्त हो गया है। विभाग ने तय किया है कि दस पर्चियों से कम का निरीक्षण कोई भी अधिकारी नहीं करेगा। निरीक्षण में यदि डॉक्टर गलत पाया गया तो उसे तत्काल नोटिस भेजा जाएगा। अगर डॉक्टर ने जेनेरिक की जगह ब्रांडेड दवा लिखी होगी तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पर्ची पर डॉक्टर को जेनेरिक दवा लिखनी होगी, वह भी साफ शब्दों में। जो डॉक्टर बड़े अक्षरों में दवाई लिखेगा, स्वास्थ्य विभाग उसे बेहतर अंक देकर सम्मानित करेगा। लगातार नेगेटिव मार्किंग के लिए चिकित्सक को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा।

डॉक्टर पर नजर रखने को बीएमओ, एमएस और सीएमओ की टीम जिले में काम करेगी। सभी एमएस अपने अस्पताल, बीएमओ ब्लॉक और सीएमओ जिला स्तर पर किसी भी अस्पताल, सीएचसी या पीएचसी का मुआयना करेंगे। डॉक्टर को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। ये रेशनल, सेमी रेशनल और इरेशनल हैं। विभाग इरेशनल श्रेणी के डॉक्टर पर तत्काल कार्रवाई करेगा।

प्रदेशभर के अस्पतालों में चिकित्सकों द्वारा जैनरिक दवाइयां न लिखने पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा 243 चिकित्सकों को नोटिस भेजे गए हैं जिनमें 71 चिकित्सकों को कारण बताओ नोटिस व 142 चिकित्सकों को चेतावनी नोटिस जारी किए हैं। द्वारा 243 चिकित्सकों को नोटिस भेजे गए हैं जिनमें 71 चिकित्सकों को कारण बताओ नोटिस व 142 चिकित्सकों को चेतावनी नोटिस जारी किए हैं।

बता दें कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी मरीजों को पर्ची पर ब्रांडेड दवा लिखने की मनाही की गई है। यदि कोई चिकित्सक ब्रांडेड दवाई लिखता है तो उसे अस्पताल के एम.एस., सी.एम.ओ. व स्वास्थ्य निदेशक तक को जवाब देना पड़ेगा।

क्या होती है जेनेरिक दवा : किसी एक बीमारी के इलाज के लिए तमाम तरह की रिसर्च और स्टडी के बाद एक रसायन (साल्ट) तैयार किया जाता है जिसे आसानी से उपलब्ध करवाने के लिए दवा की शक्ल दे दी जाती है। इस साल्ट को हर कंपनी अलग-अलग नामों से बेचती है। कोई इसे महंगे दामों में बेचती है तो कोई सस्ते। लेकिन इस साल्ट का जेनेरिक नाम साल्ट के कंपोजिशन और बीमारी का ध्यान रखते हुए एक विशेष समिति द्वारा निर्धारित किया जाता है। किसी भी साल्ट का जेनेरिक नाम पूरी दुनिया में एक ही रहता है।

क्या आप जानते हैं : अधिकत्तर बड़े शहरों में एक्सक्लुसिव जेनेरिक मेडिकल स्टोर होते हैं, लेकिन इनका ठीक से प्रचार-प्रसार ना होने के कारण इसका लाभ लोगों को नहीं मिल पाता। मजूबरी में ठीक जानकारी ना होने के कारण गरीब भी केमिस्ट से महंगी दवाएं खरीदने पर मजबूर हो जाता है।

सस्ती दवाएं मिल सकती हैं: आमतौर पर डॉक्टर्स महंगी दवाएं लिखते हैं इससे ब्रांडेड दवा कंपनियां खूब मुनाफा कमाती हैं लेकिन क्या आप जानते हैं आप डॉ. की लिखी सस्ती दवाएं भी खरीद सकती हैं। जी हां, आपका डॉक्टर आपको जो दवा लिखकर देता है उसी साल्ट की जेनेरिक दवा आपको बहुत सस्ते में मिल सकती है. महंगी दवा और उसी साल्ट की जेनेरिक दवा की कीमत में कम से कम पांच से दस गुना का अंतर होता है। कई बार जेनरिक दवाओं और ब्रांडेड दवाओं की कीमतों में 90 पर्सेंट तक का भी फर्क होता है।

जेनेरिक दवाएं और भ्रम: जेनेरिक दवाएं बिना किसी पेटेंट के बनाई और सरकुलेट की जाती हैं। हां, जेनेरिक दवा के फॉर्मुलेशन पर पेटेंट हो सकता है लेकिन उसके मैटिरियल पर पेटेंट नहीं किया जा सकता। इंटरनेशनल स्टैंडर्ड से बनी जेनेरिक दवाइयों की क्वालिटी ब्रांडेड दवाओं से कम नहीं होती। ना ही इनका असर कुछ कम होता है। जेनेरिक दवाओं की डोज, उनके साइड-इफेक्ट्स सभी कुछ ब्रांडेड दवाओं जैसे ही होते हैं। जैसे इरेक्टाइल डिस्फंक्शन के लिए वियाग्रा बहुत पॉपुलर है लेकिन इसकी जेनेरिक दवा सिल्डेन्फिल नाम से मौजूद है. लेकिन लोग वियाग्रा लेना ही पसंद करते हैं क्योंकि ये बहुत पॉपुलर ब्रांड हो चुका है। इसकी खूब पब्लिसिटी इंटरनेशनल लेवल पर की गई है। वहीं जेनेरिक दवाइयों के प्रचार के लिए कंपनियां पब्लिसिटी नहीं करती। जेनेरिक दवाएं बाजार में आने से पहले हर तरह के डिफिकल्ट क्वालिटी स्टैं र्ड से गुजरती हैं।

ठीक इसी तरह से ब्लड कैंसर के लिए ‘ग्लाईकेव’ ब्राण्ड की दवा की कीमत महीनेभर में 1,14,400 रूपये होगी, जबकि दूसरे ब्रांड की ‘वीनेट’ दवा का महीने भर का खर्च 11,400 से भी कम आएगा।

क्यों सस्ती होती हैं जेनेरिक दवाएं: जहां पेंटेट ब्रांडेड दवाओं की कीमत कंपनियां खुद तय करती हैं वहीं जेनेरिक दवाओं की कीमत को निर्धारित करने के लिए सरकार का हस्तक्षेप होता है। जेनेरिक दवाओं की मनमानी कीमत निर्धारित नहीं की जा सकती। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक, डॉक्टर्स अगर मरीजों को  जेनेरिक दवाएं प्रिस्क्राइब करें तो विकसित देशों में स्वास्थय खर्च 70 पर्सेंट और विकासशील देशों में और भी अधिक कम हो सकता है।

इन बीमारियों की जेनेरिक दवा होती है सस्ती : कई बार डॉक्टर सिर्फ साल्ट का नाम लिखकर देते हैं तो कई बार सिर्फ ब्रांडेड दवा का नाम। कुछ खास बीमारियां हैं जिसमें जेनेरिक दवाएं मौजूद होती हैं लेकिन उसी सॉल्ट की ब्रांडेड दवाएं महंगी आती हैं। ये बीमारियां हैं जैसे- हार्ट डिजीज, न्यूरोलोजी, डायबिटीज, किडनी, यूरिन, बर्न प्रॉब्लम. इन बीमारियों की जेनेरिक और ब्रांडेड दवाओं की कीमतों में भी बहुत ज्यादा अंतर देखने को मिलता है।

कैसे पता करें जेनेरिक और ब्रांडेड दवा में अंतर: एक ही साल्ट की दो दवाओं की कीमत में बड़ा अंतर यूं तो जेनेरिक दवा का सबूत हो सकता है लेकिन इसके लिए कई मोबाइल ऐप जैसे Healthkart plus और Pharma Jan Samadhan भी मौजूद हैं. इनके जरिए आप आसानी से सस्ती दवाएं खरीद सकते हैं।

जेनेरिक दवाओं के लाभ-

  • जेनेरिक दवा ब्रांडेड दवाओं से सस्ती होती हैं। इससे आप हर माह अच्छी खासी कीमत बचा सकते हैं।
  • जेनेरिक दवाएं सीधे खरीददार तक पहुंचती हैं।
  • इन दवाओं की पब्लिसिटी के लिए कुछ खर्चा नहीं किया जाता। इसलिए ये सस्ती होती हैं।
  • सरकार इन दवाओं की कीमत खुद तय करती है।
  • जेनेरिक दवाओं का असर, डोज और इफेक्ट्स ब्रांडेड दवाओं की तरह ही होते हैं।

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