फसल बीमा योजना के दायरे में फूलगोभी व बंदगोभी

आम बजट 2018-19 :किसानों व गरीबों को राहत

नई दिल्ली: केंद्रीय वित्‍त मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्‍व में सरकार ने राजनीतिक लाभ-हानि पर ध्‍यान दिए बिना हर क्षेत्र में गंभीरता से कार्य किए हैं। लोकसभा में आम बजट 2018-19 पेश करते हुए केंद्रीय वित्‍त और कॉरपोरेट मामले मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सरकार ने देश में किसानों, गरीबों और अन्‍य कमजोर वर्गों को लाभ देने और अवि‍कसित क्षेत्रों के उत्‍थान के लिए विभिन्‍न कार्यक्रमों का शुभारंभ किया है।

सरकार उज्‍जवला योजना के माध्‍यम से देश के गरीबों को नि:शुल्‍क गैस कनेक्‍शन प्रदान कर रही है। सौभाग्‍य योजना के माध्‍यम से चार करोड़ घरों को बिजली कनेक्‍शन से जोड़ा जा रहा है। तीन हजार से ज्‍यादा जन औषधि केंद्रों में 800 से ज्‍यादा दवाईयां कम मूल्‍य पर बेची जा रही हैं। स्‍टैंट की कीमत नियंत्रित की गई है गरीबों के लिए नि:शुल्‍क डायलिसिस हेतु विशेष योजना शुरू की गई है।

वित्‍त मंत्री ने कहा कि गरीबों और मध्‍यम वर्ग को आवास योनजाओं में भी ब्‍याजदर में बड़ी राहत दी जा रही है। सरकारी सेवाएं चाहे बस या ट्रेन टिकट या सभी को ऑनलाइन प्रमाण-पत्र उपलब्‍ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। दो से तीन दिन के भीतर घर पर पासपोर्ट, एक दिन में कंपनी का रजिस्‍ट्रेशन जैसे लाभ देश में बड़े वर्ग को दिए जा रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि प्रमाण पत्रों को सत्‍यापित करने की बाध्‍यता खत्‍म कर दी और समूह ‘ग’ और ‘घ’ नौकरी में साक्षात्‍कार समाप्‍त करने से लाखों नौजवानों को समय और पैसे की बचत हुई है। सरकार हर व्‍यक्ति को उपयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।

जेटली ने कहा कि चार वर्ष पूर्व वर्तमान सरकार ने एक ईमानदार स्‍वच्‍छ और पारदर्शी सरकार देने की शपथ ली थी। सरकार ने भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के मजबूत प्रदर्शन को बनाए रखने के लिए कड़े फैसले लेने में सक्षम नेतृत्‍व का भरोसा दिलाया। वित्‍त मंत्री ने कहा कि सरकार ने गरीबी को समाप्‍त करने बुनियादी ढांचे के निर्माण में तेजी लाने के साथ-साथ एक दृ‍ढ़, आत्‍म विश्‍वास से परिपूर्ण नवीन भारत के निर्माण का संकल्‍प लिया था।

उन्‍होंने कहा कि सरकार ने बुनियादी ढांचे के सुधारों की एक श्रृंखला को सफलतापूर्वक कार्यांवित किया है। माल और सेवाकर (जीएसीट) सहित अप्रत्‍यक्ष कर प्रणाली को सरल बना दिया गया है। वित्‍त मंत्री ने कहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकी के उपयोग से गरीबों तक लाभ पहुंचाने का लक्ष्‍य और प्रभावी हुआ है। उच्‍च मूल्‍य की मुद्रा के विमुद्रीकरण से संचालन में नकदी मु्द्रा की मात्रा कम हुई है। इससे कराधान आधार और अर्थव्‍यवस्‍था को और अधिक डिजिटल बनाने में मदद मिली है।

वित्‍त मंत्री ने कहा कि शोधन अक्षमता और दिवालियापन कोड को लागू किए जाने से ऋणी-ऋणदाताओं के बीच संबंध बदला है। बैंकों के पुन: पूंजीकरण से बैंक अब विकास की गति को सहायता प्रदान करने में अधिक सक्षम हो गए हैं। उन्‍होंने कहा कि इन सभी संरचनात्‍मक सुधारों से मध्‍यम और दीर्घावधि में भारतीय अर्थव्‍यवथा को लंबे समय तक टिकाऊ सुदृढ़ विकास गति को प्राप्‍त करने में सहायता मिलेगी। वित्‍त मंत्री ने कहा कि इसके परिणाम स्‍वरूप भारत विश्‍व की सबसे तेजी से उभरती हुई अर्थव्‍यवस्‍थाओं में पहुंच गया है। अंतरराष्‍ट्रीय मुद्राकोष ने हाल ही में भारत के लिए अगले वर्ष में 7.4 प्रतिशत की वृद्धि की घोषणा की है।

  • किसानों की आय दोगुनी करना  : सरकार ने अब तक अघोषित सभी खरीफ फसलों के लिए उत्पादन लागत से कम से कम डेढ़ गुना एमएसपी तय करने की घोषणा की
  • वित्त मंत्री ने कृषि क्षेत्र के लिए संस्थागत ऋण को वर्ष 2017-18 के 10 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर वर्ष 2018-19 में 11 लाख करोड़ रुपये करने की घोषणा की
  • जल्द नष्ट होने वाली जिन्सों जैसे कि आलू, टमाटर और प्याज की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव की समस्या से निपटने के लिए 500 करोड़ रुपये के ‘ऑपरेशन ग्रीन्स’ की घोषणा, इससे उत्पादक और उपभोक्ता दोनों ही लाभान्वित होंगे
  • अत्यंत विशिष्ट औषध एवं सुगंधित पौधों की संगठित खेती तथा संबंधित उद्योग की सहायता के लिए 200 करोड़ रुपये का आवंटन
  • 22,000 ग्रामीण हाटों को ग्रामीण कृषि बाजारों (ग्राम) के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि किसान सीधे उपभोक्ताओं और व्यापक खरीदारी करने वालों को अपनी उपज की बिक्री कर सकें
  • 22,000 ग्रामों और 585 एपीएमसी में कृषि विपणन से संबंधित बुनियादी ढांचे के विकास एवं उन्नयन के लिए 2,000 करोड़ रुपये का कोष बनाया जाएगा
  • खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए आवंटन को दोगुना कर 1,400 करोड़ रुपये किया गया, सरकार विशिष्ट कृषि-प्रसंस्करण वित्तीय संस्थानों की स्थापना को बढ़ावा देगी

केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों के मंत्री अरुण जेटली ने आज संसद में आम बजट 2018-19 पेश करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की आजादी के 75वें साल में अर्थात वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने का आह्वान किया है। मंत्री ने बजट 2018-19 में कृषि क्षेत्र के लिए अनेक नई पहलों की घोषणा करते हुए कहा, ‘हम किसानों की आमदनी बढ़ाने पर विशेष जोर दे रहे हैं। हम कृषि को एक उद्यम मानते हैं और किसानों की मदद करना चाहते हैं, ताकि वे कम खर्च करके समान भूमि पर कहीं ज्यादा उपज सुनिश्चित कर सकें और उसके साथ ही अपनी उपज की बेहतर कीमतें भी प्राप्त कर सकें।’

जेटली ने यह घोषणा करते हुए काफी प्रसन्नता जाहिर की कि सरकार ने अब तक अघोषित सभी खरीफ फसलों के लिए उत्पादन लागत से कम से कम डेढ़ गुना एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) तय करने का निर्णय लिया है। मंत्री ने कहा कि यह ऐतिहासिक निर्णय देश के किसानों की आमदनी दोगुनी करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा और केंद्र एवं राज्य सरकारों के साथ सलाह-मशविरा कर नीति आयोग एक अचूक व्यवस्था कायम करेगा, जिससे कि किसानों को उनकी उपज की पर्याप्त कीमत मिल सके।

एक अहम कदम के रूप में सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए संस्थागत ऋण को वर्ष 2017-18 के 10 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर वर्ष 2018-19 में 11 लाख करोड़ रुपये करने की घोषणा की। सरकार के विज़न को आगे बढ़ाते हुए वित्त मंत्री ने बजट 2018-19 में 500 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ ‘ऑपरेशन ग्रीन्स’ लांच करने की घोषणा की, ताकि जल्द नष्ट होने वाली जिन्सों जैसे कि आलू, टमाटर और प्याज की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव की समस्या से निपटा जा सके। ‘ऑपरेशन फ्लड’ की तर्ज पर शुरू किया गया ‘ऑपरेशन ग्रीन्स’ इस क्षेत्र में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), कृषि-लॉजिस्टिक्स, प्रसंस्करण सुविधाओं और प्रोफेशनल प्रबंधन को बढ़ावा देगा। श्री जेटली ने 100 करोड़ रुपये तक के कारोबार वाली किसान उत्पादक कंपनियों (एफपीसी) को होने वाले लाभों के संदर्भ में पांच वर्षों की अवधि तक 100 प्रतिशत की कटौती की घोषणा की जिसकी शुरुआत वित्त वर्ष 2018-19 से होगी। इसके पीछे मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र में कटाई उपरांत मूल्य संवर्द्धन में प्रोफेशनल नजरिए को बढ़ावा देना है।

इसके अलावा, जेटली ने यह जानकारी दी कि सरकार ने बड़े पैमाने पर जैविक खेती को बढ़ावा दिया है। बड़े क्लस्टरों, विशेषकर प्रत्येक 1000 हेक्टेयर में फैले क्लस्टरों में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और ग्रामीण उत्पादक संगठनों (वीपीओ) में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका कार्यक्रम के तहत क्लस्टरों में जैविक खेती करने के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। मंत्री महोदय ने कहा कि अत्यंत विशिष्ट औषध एवं सुगंधित पौधों की संगठित खेती में सहायता करने और इत्र, आवश्यक तेलों तथा अन्य संबंधित उत्पादों का उत्पादन करने वाले छोटे एवं कुटीर उद्योगों की मदद करने के लिए 200 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।

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