नौणी विवि मे जैविक खेती पर दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का समापन

  • किन्नौर के 40 किसानों ने लिया कार्यक्रम में भाग
नौणी विवि मे जैविक खेती पर दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का समापन

नौणी विवि मे जैविक खेती पर दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का समापन

नौणी : किसानों की संवेदीकरण और क्षमता निर्माण पर आधारित दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का डॉ. वाईएस परमार औद्यानिकी और वानिकी विश्वविद्यालय नौणी में समापन हुआ। इस प्रशिक्षण शिविर मे किन्नौर जिला के निचार ब्लॉक के 40 किसान, जिसमें युवा किसान व महिलाएं भी शामिल हैं, को जैविक खेती के बारे में जानकारी दी गई। इस कार्यक्रम को बिजनेस मैनेजमेंट विभाग ने ‘स्वस्थ हिमालय क्षेत्र के लिए सुधारित जीवन शैली, स्थिर कृषि-पारिस्थितिकी प्रणालियों के लिए किसानों की संवेदनशीलता, जागरूकता और क्षमता निर्माण के लिए जैविक खेती संवर्धन’ विषय पर आधारित परियोजना के तहत आयोजित किया। यह परियोजना जीबी पंत हिमालय पर्यावरण एवं विकास संस्थान, अल्मोड़ा, उत्तराखंड द्वारा प्रायोजित की गई थी।

प्रशिक्षण के उद्घाटन सत्र में, नौणी विवि के कुलपति डा॰ एचसी शर्मा ने जैविक और शून्य लागत प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं पर किसानों को संबोधित किया। उन्होंने किसानों को जैविक खेती अपनाने और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने की सलाह दी। उन्होंने प्रतिभागियों से समुदायीक जल भंडारण प्रणालियों को विकसित करने का आग्रह किया, जिससे कम वर्षा वाले महीनों में भी पानी की समस्या से निपटने में मदद मिलेगी।

विश्वविद्यलय के अनुसंधान निदेशक ड़ा॰ जेएन शर्मा ने किसानों को जैविक खेती को अपनाने की बात कही प्रेरित किया और उनसे इस विषय में जागरूकता फैलाने और बेहतर मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के लिए योगदान देने के लिए अन्य किसानों को संवेदनशील बनाने के लिए प्रेरित किया। प्रतिभागियों ने विश्वविद्यालय के खेतों का भी दौरा किया जहां विश्वविद्यालय में शून्य बजट प्राकृतिक कृषि के समन्वयक डा॰ राजेश्वर चंदेल ने इस तकनीक पर विस्तृत जानकारी दी।

कार्यक्रम के समन्वयक डा॰ यास्मीन जंजुआ और बिज़नस मैनेजमेंट विभाग के विभागाध्यक्ष डा॰ केके रैना ने भी किसानों को संभोधित किया। इसके अलावा डा॰ अंजली चौहान ने जैविक खाद में पीजीपीआर और बायो-फ़र्टिलाइजर्स और इसके महत्व पर एक व्याख्यान और प्रदर्शन दिया। डा॰ पीयूष मेहता ने जैविक उत्पादों के विपणन के बारे में जानकारी दी। जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी गई।

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